पांच चुनाव जीते, लखपति से करोड़पति हुए

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- Author, अफ़रोज़ आलम साहिल
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
दिल्ली में विधानसभा चुनावों के लिए ज़ोरदार प्रचार जारी है. इस चुनाव का एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि कुछ ऐसे भी उम्मीदवार हैं, जो आज तक एक भी चुनाव नहीं हारे हैं.
इन्होंने लगातार पांच विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज की है और अब छठी बार ताल ठोक रहे हैं.
दिल्ली विधानसभा चुनावों के कुल 673 में से पाँच ऐसे प्रत्याशी हैं, जो साल 1993 के पहले विधानसभा चुनाव के बाद से अब तक लगातार चुनाव जीतते आए हैं.
ऐसे में यह जानना बेहद दिलचस्प होगा कि 22 साल के इस लंबे राजनीतिक सफर में अब इनकी आर्थिक हैसियत क्या है?
आर्थिक हैसियत

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बल्लीमारान से पांच बार चुनाव जीतने वाले हारुन यूसुफ़ जब 2003 में चुनाव लड़े थे तो वो सिर्फ आठ लाख रुपये की माली हैसियत रखते थे. लेकिन राजनीतिक हैसियत बढ़ने के साथ-साथ उनकी आर्थिक स्थिति भी मज़बूत होती गई. 12 साल बाद हारुन यूसुफ़ की संपत्ति 3.73 करोड़ रुपए है.
जीत के मामले में चौधरी मतीन का रिकॉर्ड भी कुछ ऐसा ही है. वो भी सीलमपुर से लगातार पांच बार चुनाव जीत चुके हैं.
2003 में चौधरी मतीन ने अपनी कुल संपत्ति 12 लाख रुपए बताई थी, जबकि अब वो 62.38 लाख रुपए की संपत्ति के मालिक हैं.
शोएब इक़बाल विभिन्न पार्टियों में रहने के बाद अब कांग्रेस के टिकट से किस्मत आजमा रहे हैं.
इनकी संपत्ति 2003 में 13 लाख रुपए की थी, जो अब 94.83 लाख रुपए हो चुकी है.
जनकपुरी से भाजपा प्रत्याशी जगदीश मुखी 2003 में 18 लाख रुपए के मालिक थे. लेकिन अगले ही पांच साल में वो 1.93 करोड़ रुपए के मालिक बन गए.
इतना ही नहीं 2013 में उनकी आर्थिक हैसियत बढ़कर 4.64 करोड़ रुपए हो गई. इस बार चुनाव आयोग को दिए गए हलफ़नामे में उन्होंवने अपनी संपत्ति 4.80 करोड़ बताई है.
ऊंची उड़ान

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साहिब सिंह चौहान तो 2003 से ही करोड़पति थे. इसके पहले वो यमुना विहार से चुनाव जीतते रहे हैं. 2008 से घोंडा विधानसभा क्षेत्र से चुनावी दंगल में वे कामयाब होते रहे हैं.
साल 2008 में उनकी संपत्ति में अधिक इज़ाफा नहीं हुआ था. लेकिन 2013 में वे पाँच करोड़ रुपए के मालिक हो गए. लेकिन लगता है कि केजरीवाल की सरकार में किस्मत ने इनका साथ नहीं दिया. इस एक साल में उनकी संपत्ति में डेढ़ करोड़ का नुक़सान हुआ और अभी वो 3.44 करोड़ रुपए के मालिक हैं.
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