परमाणु समझौते से भारत को कितना फ़ायदा?

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    • Author, सौतिक बिस्वास
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के भारत दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच STY37022216भारत-अमरीका परमाणु सहमति के असल मायनेभारत-अमरीका परमाणु सहमति के असल मायनेनरेंद्र मोदी और बराक ओबामा की बातचीत और दोनों देशों की परमाणु मुद्दे पर हुई ताज़ा सहमति से भारत को आख़िर हासिल क्या हुआ?2015-01-25T22:24:23+05:302015-01-26T07:45:22+05:302015-01-26T10:47:08+05:302015-01-26T10:47:07+05:30PUBLISHEDhitopcat2 की घोषणा हुई. इसे भारत की ऊर्जा संबंधी जरूरतों के नज़रिए से बेहद ख़ास माना जा रहा है.

हालांकि एक बड़ा सवाल ये जरूर उठ रहा है कि इस समझौते से किसको ज़्यादा फ़ायदा होगा?

भारत को या फिर अमरीका को. कहा ये भी जा रहा है कि इससे अमरीकी कंपनियों को तत्काल फ़ायदा होगा.

इस समझौते के बाद क्या होगा?

विस्तार से पढ़िए आकलन

इस समझौते की नींव तो 2006 में पड़ गई थी, लेकिन किसी हादसे की सूरत में उत्तरदायित्व के सवाल पर यह समझौता आठ सालों तक अटका रहा.

इस समझौते के लिए अपनी सरकार को दांव पर लगाने वाले तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने संसद में कहा था, "परमाणु ऊर्जा की मुख्यधारा में आने की दशकों पुरानी मुश्किल दूर हो गई है."

अब एक बडा इंश्योरेंस पूल बनाया जा रहा है, इससे किसी नए विधेयक की जरूरत नहीं होगी. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अगर कोई हादसा होता है तो आर्थिक मुआवजे की जिम्मेदारी इंश्योंरेंस कंपनी की होगी.

विश्लेषकों का मानना है कि दोनों सरकारों ने इस दिशा में वो सब किया है जो वे कर सकते थे और अब आपूर्तिकर्ताओं या अमरीकी कंपनियों की बारी है, जो भारत के साथ कारोबार करना चाहते हैं.

भारत का लक्ष्य

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भारत ने ऊर्जा संबंधी जरूरतों को देखते हुए 2032 तक 63 हज़ार मेगावाट <bold><itemMeta overtyped-headline="परमाणु ऊर्जा उत्पादन"><warn>Unable to resolve XInclude for href="http://www.bbc.co.uk/asset/f8fce75c-0415-11e2-96ea-586ba79c3f60" xpointer="xmlns(bbc=http://www.bbc.co.uk/asset) xpointer(/bbc:*/bbc:itemMeta/*)"</warn></itemMeta></bold> को अपना लक्ष्य बनाया है, जो मौजूदा क्षमता से 14 गुना ज्यादा है.

भारत के पास 22 आण्विक केंद्र है और अगले दो दशक में 40 ऐसे केंद्रों को तैयार करने की योजना है.

अमरीकी आपूर्तिकर्ताओं को प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है. रूस भारत में 20 परमाणु रिएक्टर लगाने की योजना बना रहा है. फ्रांस भारत के पश्चिमी राज्य महाराष्ट्र में छह परमाणु रिएक्टर बना रहा है. अमरीका भी कम से कम आठ रिएक्टर बनाएगा.

ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि अमरीकी कंपनियों को इस समझौते से क्या मिलेगा?

इस सवाल के जवाब में वरिष्ठ पत्रकार पल्लव बागला कहते हैं, "उनके लिए ये आसान नहीं होगा, लागत एक अहम मसला होगा. आधुनिकि अमरीकी परमाणु रिएक्टर की लागत भारतीय परमाणु रिएक्टर की तुलना में कम से कम तीन गुनी ज़्यादा होती है. एक बात और है, अभी तक ऐसे रिएक्टर पूरी तरह तैयार भी नहीं हुए हैं."

अमरीका का फ़ायदा

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दो प्रमुख अमरीकी आपूर्तिकर्ता कंपनियों जनरल इलेक्ट्रिक और वेस्टिंगहाउस इलेक्ट्रिक कंपनी को गुजरात और आंध्र प्रदेश में रिएक्टर बनाने के लिए जमीन मिल चुकी है.

वेस्टिंगहाउस ने इस समझौते की प्रशंसा की है. वहीं जनरल इलेक्ट्रिक ने कहा कि वे इस समझौती की जल्द ही समीक्षा करेंगे.

जाहिर है कि ये अमरीकी कंपनियों के लिए अभी तस्वीर पूरी तरह साफ़ नहीं हुई है. अभी ये नहीं कहा जा सकता है कि आण्विक अनुबंध से उन्हें अरबों डॉलर की कमाई होगी.

दूसरी ओर, भारत में सशक्त एंटी-न्यूक्लियर लॉबी है, जो 2011 में जापान के फुकुशिमा में हुए हादसे का जिक्र करते हुए परमाणु संयंत्रों को खतरनाक मानते हैं. विवादास्पद भारतीय-रूसी परमाणु संयंत्र कुडनकुलम ने 2013 के बाद से बिजली का उत्पादन शुरू कर दिया है.

अभी भी परमाणु ऊर्जा को भारत में पूरा समर्थन नहीं मिल रहा है और दूसरी ओर परमाणु ऊर्जा की तस्वीर भी पूरी तरह साफ़ नहीं है.

परमाणु ऊर्जा की तस्वीर

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दुनिया भर के 30 देशों में 430 परमाणु संयंत्र काम कर रहे हैं जबकि 15 देशों में 72 संयंत्र अभी निर्माणाधीन हैं.

नए परमाणु संयंत्रों के बनने के बाद भी परमाणु ऊर्जा का उत्पादन कम हो रहा है. STYभारतीय परमाणु रिएक्टर सुरक्षित: आईएईएभारतीय परमाणु रिएक्टर सुरक्षित: आईएईएराजस्थान में दो परमाणु रिएक्टरों का मुआयना करने के बाद आईएईए ने कहा है कि भारत के रिएक्टर दुनिया के सबसे सुरक्षित और प्रभावशाली रिएक्टरों में शामिल हैं, जिनसे दुनिया बहुत कुछ सीख सकती है.2012-11-23T11:22:22+05:302012-11-23T11:39:45+05:30PUBLISHEDhitopcat2 (आईएईए) के मुताबिक मौजूदा समय में दुनिया भर की बिजली उत्पादन का महज 11 फ़ीसदी हिस्सा परमाणु संयंत्र पूरा कर रहे हैं, ये 1982 के बाद से सबसे कम है.

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वहीं जर्मनी 2022 के बाद पूरी तरह से परमाणु संयंत्रों को बंद करने जा रहा है, वहीं चीन 2020 तक अपनी परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता को तीन गुना करना चाहता है.

इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी के मुताबिक एक ओर STY37009948क्या सौर ऊर्जा परमाणु बिजली से बेहतर है?क्या सौर ऊर्जा परमाणु बिजली से बेहतर है?परमाणु ऊर्जा के मुद्दे पर ओबामा-मोदी की बातचीत की संभावना के मद्देनज़र एक विश्लेषण.2015-01-24T23:51:58+05:302015-01-25T11:37:47+05:302015-01-25T11:37:47+05:302015-01-25T11:53:15+05:30PUBLISHEDhitopcat2 कम हो रही हैं तो दूसरी ओर कई देशों में इसे अपनाने की होड़ है. इस प्रक्रिया में आर्थिक, तकनीकी और राजनीतिक प्रभाव अपना असर डाल रहे हैं और भारत भी इसका अपवाद नहीं है.

<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>