भारत-अमरीका परमाणु सहमति के असल मायने

इमेज स्रोत, Reuters
- Author, पल्लव बागला
- पदनाम, विज्ञान मामलों के जानकार
भारत और अमरीका के बीच नागरिक परमाणु समझौते (सिविल न्यूक्लियर डील) के मुद्दे पर भारत सरकार के स्तर पर लगभग सहमति हो गई है. यानी, भारत परमाणु ऊर्जा से बिजली बनाने की दिशा में एक क़दम आगे बढ़ गया है.
दोनों देशों के बीच मतभेद का एक बिंदु यह था कि अमरीका का मानना था कि भारत का नागरिक परमाणु समझौता क़ानून अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं है.
भारत ने अमरीका को आश्वस्त किया है कि भारत का क़ानून, इंटरनेशनल कन्वेंशन ऑफ़ सप्लिमेंट्री कॉम्पनसेशन के अनुरूप है. अमरीका ने इसे स्वीकार कर लिया है.
रविवार को दोनों देशों के बीच न्यूक्लियर इंश्योरेंस पूल पर भी सहमति बनी है. इंश्योरेंस संबंधी जवाबदेही (इंश्योरेंस लाएबिलिटी) के तहत अब साढ़े सात सौ करोड़ रूपए सामान्य इंश्योरेंस कंपनी देंगी और बाक़ी साढ़े सात सौ करोड़ रुपए की सरकार की गारंटी होगी.
निगरानी का सवाल

इमेज स्रोत, AP
इससे पहले दोनों देशों के बीच परमाणु रिएक्टरों की निगरानी को लेकर भी मतभेद था.
अमरीका चाहता था कि अगर वो अपना सामान और तकनीकी देगा तो उसके इंस्पेक्टर इसकी निगरानी करेंगे. भारत इसके लिए तैयार नहीं था.
भारत का कहना था कि उसके पास संयुक्त राष्ट्र के न्यूक्लियर वॉचडॉग - अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के मानक हैं और भारत उन्हीं के नियमों एवं निगरानी के अनुसार आगे बढ़ेंगे.
भारत की शर्त ये भी थी कि वो किसी देश को भी द्विपक्षीय कार्यक्रमों की निगरानी नहीं करने देगा और इस मुद्दे पर भी सहमति बन गई.

इमेज स्रोत, RIA Novosti
अब भारत के परमाणु संयंत्रों की केवल आईएईए के मानकों के तहत निगरानी होगी.
मामला वाणिज्यिक कंपनियों के बीच

इमेज स्रोत, PIB
अब सारा मामला भारत की वाणिज्यिक कंपनी न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया लिमिटेड और न्यक्लियर रिएक्टर बेचने वाली दो अमरीकी कंपनियों वेस्टिंगहाउस तोशिबा और जनरल इलेक्ट्रिक के बीच का हो जाएगा. क्योंकि दोनों सरकारों के बीच जो सहमित बननी थी वो बन गई है.
अमरीकी कंपनियाँ अपने रिएक्टर भारत को सही दाम पर बेचेंगी तो ये रिएक्टर भारत में लग सकते हैं, और अगर वो अधिक दाम मांगेगे तो ये सौदा मुश्किल होगा.
ध्यान देने की बात है कि अमरीका की दोनों कंपनियाँ जो रिएक्टर बेच रही हैं उनका अभी कहीं प्रयोग नहीं हुआ है, कहीं भी ऐसे रिएक्टर सक्रिय नहीं है.
ऐसे में अगर अमरीका को इन रिएक्टरों को भारत को बेचना है तो भारत सही दाम पर ही सहमत होगा.
(बीबीसी संवाददाता संदीप सोनी से बातचीत पर आधारित)
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi " platform="highweb"/></link> पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)</bold>












