बेदी ही बीजेपी की उम्मीद की 'किरण' हैं?

इमेज स्रोत, PTI
- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले पूर्व आईपीएस अफसर किरण बेदी को बीजेपी में शामिल करके उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने से दो सवाल उठते हैं.
क्या वो बीजेपी को चुनाव में जीत दिला सकेंगी? क्या नरेंद्र मोदी के रहते पार्टी को किसी और स्टार की ज़रुरत है?
कहा जा रहा है कि किरण बेदी को पार्टी में शामिल करने का फैसला केवल पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का है.
उन्हें आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल की काट के लिए उसी तरह की साफ़ छवि वाला नेता चाहिए था. इस संदर्भ में किरण बेदी का चुनाव सही नज़र आता है.
पढ़े पूरा ब्लॉग

इमेज स्रोत, AP
विजय गोयल, सतीश उपाध्याय और हर्ष वर्धन भाजपा के जाने पहचाने चेहरे हैं और मुख्यमंत्री के उम्मीदवारी के दावेदार भी थे.
लेकिन पार्टी के फैसले से लगता है कि अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी को शिकस्त देना उनके बस की बात नहीं.
बेदी को दिल्ली चुनाव से ठीक पहले पार्टी में शामिल करना इस बात का संकेत है कि चुनाव के लिए पार्टी में आत्म विश्वास की कमी है.
बीच मंझधार में कप्तान बदलने का काम या तो संकट के कारण किया जाता है या फिर कप्तान से भरोसा उठने के बाद.
जीत का भरोसा!

इमेज स्रोत, AFP
अब तक मैंने पार्टी के अंदर और इसके बाहर जितने लोगों से बातें की हैं उससे एक बात साफ़ निकल कर आती है और वो ये कि ये लोग किरण बेदी को एक अच्छा उम्मीदवार तो मानते हैं लेकिन उन्हें उनके नेतृत्व में पार्टी जीतेगी इसका भरोसा नहीं है.
कई पार्टी नेता उन्हें पार्टी में शामिल करने से खुश नहीं हैं. किरण बेदी को चुनाव के ठीक पहले पार्टी में लाना एक मुश्किल फैसला ज़रूर रहा होगा.
उनके नेतृत्व में भाजपा की चुनाव में हार और जीत, दोनों सूरत में नरेंद्र मोदी की छवि प्रभावित होगी. अगर हार हुई तो मोदी की हार माना जाएगा.
मोदी की लोकप्रियता

इमेज स्रोत, EPA
किरण बेदी को हार से अधिक नुकसान नहीं होगा लेकिन अगर उनके नेतृत्व में पार्टी जीत जाती है तो लोग सोचेंगे जीत बेदी के कारण हुई है जिससे मोदी की साख पर ज़रूर फ़र्क़ पड़ेगा.
प्रधानमंत्री हर हाल में ये चुनाव जीतना चाहते हैं. वो इससे ये जताना चाहते हैं कि आठ महीने सत्ता में रहने के बाद भी उनकी लोकप्रियता कम नहीं हुई है.

इमेज स्रोत, AFP
जिस शहर में वो देश के प्रधानमंत्री हैं, वहां की विधानसभा में भी वो पार्टी को विजयी देखना चाहते हैं.
पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री ने अपनी पार्टी का चुनावी प्रचार शुरू किया जो फीका सा रहा. शायद इसी कारण किरण बेदी को पार्टी में लाने की प्रक्रिया शुरू हो गई.
खुद किरण बेदी कई महीनों से पार्टी में शामिल होना चाहती थीं लेकिन दिल्ली चुनाव के ठीक पहले उन्हें पार्टी में शामिल करके उन्हें सीएम पद के लिए पार्टी का उम्मीदवार बनाना एक जोखिम भरा फैसला हो सकता है.
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












