ताज महल के क़रीब उपले जलाना मना

भारत में ऐतिहासिक इमारत ताज महल के क़रीब गोबर के उपले जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. यह फ़ैसला सफ़ेद संगमरमर से बने ताज महल के वायु प्रदूषण के कारण पीले होते जाने के कारण लिया गया है.
ताज महल को यूनेस्को ने वैश्विक धरोहर के रूप में दर्ज किया है. हर साल लाखों लोग इसे देखने के लिए भारत के शहर आगरा आते हैं.
आगरा शहर के औद्योगिक क्षेत्र और तेल शोधन कारख़ानों के कारण ताज महल प्रदूषण का शिकार हो गया है.
शहर की सुंदरता

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आगरा के वरिष्ठ अधिकारी प्रदीप भटनागर ने समाचार एजेंसी एएफ़पी से कहा, "ताज महल के रंग बदलने को लेकर बार-बार शिकायतें की जाती रही हैं. इसलिए एक हालिया बैठक में फ़ैसला किया गया कि शहर की सीमा के अंदर गोबर के उपले जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया जाना चाहिए."
उम्मीद की जा रही है कि इस निर्णय के बाद ताज महल से कॉर्बन जमने की दर को कम किया जा सकेगा.
भटनागर ने कहा, "इसमें सुंदरता का पहलू भी शामिल है. हम नहीं चाहते कि शहर की दीवारें गोबर से पुती हों."
स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा

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भटनागर ने बताया कि आगरा शहर में स्वच्छ ईंधन के प्रयोग को बढ़ावा दिया जाएगा और अधिक लोगों को गैस कनेक्शन प्रदान किया जाएगा.
भारत के ग्रामीण इलाक़ों में गोबर के उपले का ईंधन के रूप में प्रयोग किया जाता है.
ताज महल उत्तर प्रदेश के आगरा में यमुना नदी के किनारे बना है. इसे 1653 में मुग़ल शहंशाह शाहजहाँ ने अपनी बीवी मुमताज़ महल की याद में बनवाया था. मुमताज़ की मौत बच्चे को जन्म देते समय हुआ था.
इस इमारत को मुग़ल कला के सर्वश्रेष्ठ उदाहरणों में से एक माना जाता है.
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