पीडीपी: मोदी नहीं वाजपेयी की भाजपा से नाता?

- Author, फ़ैसल मोहम्मद अली
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर की पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने बुधवार को जिस तरह की पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 'वंदना' की उसने मोदी काल की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को भी शायद अचंभे में डाल दिया हो!
भाजपा ने महबूबा मुफ़्ती के बयान का स्वागत किया है और कहा, "वो पीडीपी के साथ औपचारिक तौर पर बातचीत की शुरुआत का इंतज़ार कर रही है."
हालाँकि भाजपा ने पीडीपी अध्यक्ष की शांति प्रक्रिया, हुर्रियत को बातचीत में शामिल करने, जम्मू-कश्मीर के लिए विशेष पैकेज जैसी बातों पर खुले तौर पर कुछ नहीं कहा है.
दोनों दलों के बीच अनौपचारिक बातचीत का सिलसिला कुछ वक़्त से जारी है.
संकेतों का मतलब

जानकारों का कहना है कि पीडीपी प्रमुख को वाजपेयी की याद ने अचानक से ही नहीं घेर लिया था, बल्कि ये बात किसी ख़ास मक़सद को ध्यान में रखकर कही गई थी.
कश्मीरियों को संकेत: पीडीपी अगर भाजपा के साथ जा रही है तो उसकी नींव वाजपेयी की 'कश्मीरियों के ज़ख़्मों पर मरहम लगाना है' वाली नीति पर आधारित होगी.
एक मतलब ये भी था कि दोनों दलों के बीच कोई 'राजनीतिक समझौता' होगा तो वो नरेंद्र मोदी के कट्टर हिन्दुत्व से दूर होगा, जिसके ख़ौफ़ को कई जगहों पर कश्मीर में हुए अधिक मतदान का कारण भी बताया गया है.
पीडीपी-भाजपा गठबंधन की संभावना को लेकर घाटी में प्रदर्शन भी हुए हैं.

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महबूबा ने जम्मू में दिए बयान में कश्मीर की जनता के चुनौतीपुर्ण फ़ैसले की बात भी कही और केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की ज़िम्मेदारी की बात को भी उठाया.
गेंद भाजपा के पाले में: राज्य के दो हिस्सों जम्मू और कश्मीर में वोटिंग के बिल्कुल अलग-अलग पैटर्न की बात उठाकर उन्होंने गेंद अपनी राष्ट्रीयता का ढिंढोरा पीटने वाली भाजपा के पाले में डाल दी है.
वैसे कुछ जानकार ये भी कहते हैं कि हो सकता है कि ये बात भाजपा के ही इशारे पर कही गई हो!
बंटे वोट और ख़तरा

पूर्व राजनयिक और कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने अपने एक लेख में कहा है कि सूबे में जिस तरह की स्थिति उभरती दिख रही है उससे सबसे ज़्यादा ख़ुशी अलगाववादियों और पाकिस्तान को होगी.
अय्यर का ये लेख हालांकि चुनाव परिणाम आने के पहले लिखा गया था लेकिन इसमें राज्य के दो अलग-अलग हिस्सों – मुस्लिम-बहुल कश्मीर और हिंदू-बहुल जम्मू; के बीच दो फाड़ की कोशिश और उसके दुष्परिणाम का ज़िक्र था.
अभी आए नतीजों में भाजपा को सारी 25 सीटें जम्मू क्षेत्र में ही हासिल हुई हैं.
भाजपा का दावा
गुरुवार को भाजपा नेता राज्यपाल एनएन वोहरा से मिले.

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भाजपा नेता जुगल किशोर ने गवर्नर से मुलाक़ात के बाद कहा, "जम्मू-कश्मीर की जनता ने भाजपा को जो मत दिया है वो सरकार बनाने के लिए दिया है."
उन्होंने स्थाई सरकार बनाने की बात भी कही.
इससे पहले, पार्टी ने पीडीपी की तरफ़ से दूसरे दलों के साथ ‘ग्रांड एलायंस’ की बात को जम्मू-विरोधी बताया था.
पीडीपी-कांग्रेस और नेशनल कांन्फ्रेंस के साथ मिलकर एक बड़ा गठबंधन तैयार करने की बात पार्टी के प्रवक्ता नईम अख़्तर के हवाले से आई थी, जिसपर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी.
राजनीतिक विश्लेषक सईद मलिक भी उस स्थिति को ख़तरनाक मानते हैं जिसमें जम्मू की जनता का प्रतिनिधित्व सरकार में न हो.
आसान नहीं है राह

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साल 2008 में अमरनाथ भूमि स्थानांतरण आंदोलन के वक़्त लोगों ने जम्मू-श्रीनगर सड़क को बंद कर दिया था, सूबे के दो हिस्से उग्र हो गए थे, हालात मुश्किल से क़ाबू में आ पाए थे.
पीडीपी की मुश्किल ये है कि अगर ऐसे हालात पैदा हो जाते हैं कि सूबे का एक हिस्सा ख़ुद को उपेक्षित महसूस करता है और तो सरकार चलाना आसान नहीं होगा.
सैलाब से तबाह हुए सूबे में पुनर्निमाण के लिए स्थाई सरकार की आवश्यकता है. उर्दू अख़बार चट्टान के मुख्य संपादक ताहिर मुहियुद्दीन के मुताबिक़ पीडीपी इसी कोशिश में लगी है.

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मुहियुद्दीन का कहना है कि पार्टी में एक विचार है कि अगर वो भाजपा के साथ नहीं जाती है तो उसे फंड नहीं मिलेंगे जो तबाह कश्मीर को फिर से बेहतर बनाने के लिए ज़रूरी हैं.
पीडीपी के प्रवक्ता नईम अख़्तर ने बीबीसी से कहा कि पार्टी के पास विकल्प तो हैं, लेकिन सब मुश्किलों भरे हैं.
फ़िलहाल पीडीपी नेता मुज़फ्फ़र बेग और समीर कौल भाजपा के साथ बातचीत में शामिल रहे हैं.
वहीं, कांग्रेस की तरफ़ से ख़ुद राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री ग़ुलाम नबी आज़ाद ने मुफ़्ती मुहम्मद सईद से फ़ोन पर बात की है.
कहां-कहां मतभेद

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वहीं, महबूबा मुफ़्ती के बुधवार के बयान से ये समझा जा रहा है कि पीडीपी भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाने की इच्छुक है.
सईद मलिक कहते हैं कि दोनों पार्टियों की विचारधाराओं में इतना अधिक फ़र्क़ है कि उसे कम करने और कुछ बिंदुओं पर तैयार होने में थोड़ा वक़्त लग सकता है.

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सूत्रों का कहना है कि धारा 370 के अलावा पश्चिमी पाकिस्तान से आकर सूबे में रह रहे विस्थापतों की नागिरकता और दूसरे ऐसे कई सवाल हैं जिन पर पीडीपी और भाजपा को बैठकर एक साझा नीति तैयार करनी होगी.
एक मामला ये भी है कि दोनों दल बारी-बारी से मुख्यमंत्री का पद लेंगे या वो किसी एक के पास रहेगा.
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