रैप म्यूज़िक, ऑडी की चाह में नई राह की खोज?

- Author, फ़ैसल मोहम्मद अली,
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, कश्मीर से
बॉलीवुड में बनने वाली फ़िल्में क्षेत्र और भाषा की सीमा से बाहर भी लोकप्रिय हैं.
इन फ़िल्मों का जादू भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में भी चलता है. यहाँ के कई नौजवान शाहरुख़ ख़ान, सलमान ख़ान, कटरीना कैफ़ और हनी सिंह जैसे कलाकारों के प्रशंसक हैं.
कुछ तो मुंबई जाकर फ़िल्मों में अपना करियर भी बनाना चाहते हैं.
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'जनाब यहां ये न पूछें'...इस सलाह के बावजूद कश्मीर यूनिवर्सिटी के छात्रों से मेरा सवाल जारी रहा- 'कश्मीरी नौजवानों की बॉलीवुड में कितनी दिलचस्पी है?'
यहां मुझे सलमान ख़ान के चाहने वाले, कटरीना की 'वॉयस' के रसिया और पर्दे पर मूवी 'बैंग-बैंग' का लुत्फ़ लेकर लौटे नौजवान मिले.
पंजाबी रैप और हनी सिंह के भी चाहवान हैं, चाहे 'चार बोतल वोदका, काम मेरा रोज़ का' से कुछ लोगों को शिकायत है.
सॉफ़्टवेयर इंजीनियर मुदस्सर नक़ीब के मुताबिक़, "बॉलीवुड फ़िल्में कश्मीरी युवाओं के लिए बाहरी दुनिया में झांकने की खिड़की हैं. इनसे नए ड्रेसिंग सेंस, बातचीत के अंदाज़ में आ रहे बदलाव और नए शब्दों के इस्तेमाल का पता चलता है. और इसे यहां अपना भी ली जाता है."
जिंदगी में हमसफ़र

स्नातक की छात्रा अरीना रक़ीब के लिए बॉलीवुड और इससे जुड़ा गीत-संगीत, नाच-गाना ज़िंदगी को जीने लायक बना देता हैं.
अरीना कहती हैं, "मूड ख़राब हुआ तो डांस लगा लिया, माँ ने डांटा तो सैड सॉंग लगा दिया, अगर मूड ऑफ़ हो तो गा भी लिया."
टूरिज़्म मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहे मोहम्मद सोहेब कहते हैं, "कश्मीर की स्लो-लाइफ़ में हाल में चेंज आया है, लोगों की आकांक्षाएँ बढ़ी हैं. हमें अब मारूति-800 नहीं...ऑडी, लैम्बोरगिनी चाहिए.'
मुदस्सर कहते हैं कि कश्मीरी युवा म्यूज़िक और डांस के रास्ते शोहरत पाना चाहते हैं.
डीजे की ट्रेनिंग

अरशद आलम हमज़ा कॉलोनी के रहने वाले हैं और चंडीगढ़ से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद अब मुंबई जाकर डिस्क जॉकी (डीजे) की ट्रेनिंग हासिल करना चाहते हैं.
अरशद को लंबे और कठिन रियाज़ की ज़रूरत पड़ेगी.
म्यूज़िकल साज़ पर थिरकने को बेताब हो रही उंगलियों को क़ाबू करके वो बताते हैं, "अब्बा ने भी कह दिया है कि अगर मैं संगीत के क्षेत्र में करियर बनाना चाहूँ तो इजाज़त है."
कश्मीरी बैंड

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श्रीनगर में इस तरह के स्कूल चल रहे हैं जो लोगों को गीत-संगीत का प्रशिक्षण दे रहे हैं.
युवाओं में बैंड के प्रति भी आकर्षण बढ़ा है और कश्मीर में ब्लड रॉक्स, आकाश और सिंग्नेचर जैसे बैंड तैयार हो गए हैं.
बाहर के बैंडों में लड़के-लड़कियां हनी सिंह, अग्नि और कनाडा के पंजाबी रैपर बोहिमिया वग़ैरह को भी सुनते और गुनगुनाते हैं.
शायद इसी को देखते हुए चंद सालों पहले कुछ कश्मीरी युवतियों ने मिलकर प्रगाश नाम का एक बैंड तैयार किया था. लेकिन यहां के एक मुस्लिम धर्मगुरु ने उसे ग़ैर-इस्लामी क़रार दे डाला.
तालमेल की ज़रूरत

कश्मीर विश्वविद्यालय में समाजशास्त्र के प्रोफ़ेसर पीरज़ादा एम अमीन कहते हैं कि युवाओं को अति-रूढ़िवादी समाज और अति आधुनिकता के बीच तालमेल बिठाना होगा.
उनका मानना है कि एक ही बार में ऐसी क्रांति हो जाए, ऐसा मुश्किल है.
लेकिन लड़कियां, कम से कम जिन दो जिनसे हमारी बात हुई, इस बारे में बेबाक राय रखती हैं.
अरीना रक़ीब कहती हैं, "लड़कियों के साथ अब भी भेदभाव हो रहा है और अनेक को रैप म्यूज़िक की फाइल कंप्यूटर में दूसरे नामों से छुपा कर रखनी पड़ती है और वो बंद कमरे में ही डांस कर पाती हैं."
ख़ुद को बाथरूम सिंगर कहने वाली और शाहरुख़ ख़ान की फ़ैन अरीना ख़ुद को क़िस्मतवाली मानती हैं कि उनके मां-बाप ने उन पर ऐसी पाबंदियां नहीं लगाई हैं.
मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही इक़रा मज़ूर मौक़ा मिलने पर किसी बैंड में गाने को तैयार हैं.
हैदर से 'शिकायत'

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इक़रा ने हाल में आई फ़िल्म हैदर देखी है जिसमें उनके मुताबिक 'कश्मीर के मुद्दे को सच्चाई से दिखाया' गया है.
मगर वानी वसीम को फ़िल्म से इसलिए शिकायत है कि 'कश्मीर मुद्दे को दूसरे अंदाज़ से पेश किया गया है. हम इंतक़ाम पसंद नहीं हैं.'
इस सब के बावजूद भारत प्रशासित कश्मीर की ज़िंदगी के हर हिस्से पर हिंसा, चरमपंथ और उग्रवाद का साया साफ़ नज़र आता है.
घाटी के सिनेमा हाल्स पर चरमपंथियों के हुक्म से ताले लगे हैं.
बॉलीवुड हो या हॉलीवुड इंटरनेट या केबल टीवी के ज़रिए ही युवा इस अलग दुनिया में झांक सकते हैं.

कुछ कश्मीरी युवाओं को परवेज़ रसूल के भारतीय क्रिकेट टीम में भी खेलने पर एतराज़ है.
वहीं इक्का-दुक्का ये भी सवाल करते हैं कि वो भारतीय टीम में न खेलें तो 'क्या बंदूक लेकर उस पार चले जाएं?'
तो क्या कश्मीरी युवा नई राह तलाश कर रहे हैं? लेकिन फिलहाल इसे परिभाषित करना जल्दबाज़ी होगी.
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