एक किताब का किसी बिस्तर के सिरहाने होना

- Author, निधीश त्यागी
- पदनाम, संपादक, बीबीसी हिंदी सेवा
किताबों के ज़रिए किसी भाषा के सफ़र को नापना शायद न वाजिब है न काफ़ी. पर ज़रूरी तो है.
किसी भी ज़िंदा समाज की नब्ज़ उसकी किताबों के ज़रिए परखी जा सकती है, और इसलिए उसपर बातचीत और बहस दोनों ज़रूरी हैं.
जिन समाजों के पास ऐसी किताबों का अभाव होता है, उनके ज़िंदा होने की शिद्दत और जुम्बिश भी संदेह के घेरे में होते हैं.
ख़ासतौर पर तब जब वह देश और काल अपने सबसे बड़ी उहापोह से गुज़र ही रहा हो.
हिंदी का विस्तार

क्या उस समय के विमर्श, उस दौर की राजनीति, उस मोड़ की दिक़्क़तों, पेचीदगियों, बदहवासी, उम्मीदों और उदासियों को अलग-अलग शक्लों में उस समय के साहित्य ने पढ़ा और ठीक से लिखा?
हिंदी का विस्तार उन किताबों से बहुत ज़्यादा है जिनसे हम किसी साल या दशक को पहचान देते हैं.
<link type="page"><caption> पढ़ें: 2014 का उल्लेखनीय कविता संग्रह</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/12/141225_hindi_books_2014_poetry_rns.shtml" platform="highweb"/></link>
सिनेमा, समाज, टीवी धारावाहिक और फिर डिजिटल/ मोबाइल/ सोशल मीडिया भाषा को लगातार नए सिरे से गढ़ रहे हैं.

क्या ये सच हिंदी साहित्य के लिखे में दर्ज हुआ? क्या वह उस विस्तार का हिस्सा है या अपने में ही सिकुड़ा-सिमटा हुआ?
ये सवाल गम्भीर लगते हैं और इनकी पड़ताल का एक तरीक़ा उन किताबों के बारे में जानना हो सकता है, जो उस वक्त की नुमाइंदगी करती हैं.
तयशुदा कवायद

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पाँच साल पहले जब मैं जब पुणे में एक अंग्रेज़ी अख़बार का सम्पादक था, मेरे लिए ये जानना थोड़ा मुश्किल था कि हिंदी में किन किताबों का ज़िक्र चल रहा है.
<link type="page"><caption> पढ़ेंः पहली ‘बेस्ट सेलर’ थी भारत पर लिखी किताब</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/international/2012/10/121024_oldest_book_on_india_aa" platform="highweb"/></link>
अंग्रेज़ी में सालाना पुस्तक सूचियाँ बनाना एक तयशुदा क़वायद की शक्ल ले चुका है. उससे ये भी पता चलता है कि उस साल का कुल जमा हासिल क्या है.
एक तरफ़ वे दर्ज करती चलती हैं उस हासिल को और कई बार किताबों को छूट और भूल जाने से बचाती हुई भी.
<link type="page"><caption> क्या अंग्रेज़ी भी भारतीय भाषा हो गई है?</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/06/140622_hindi_social_needs_vs_political_needs_sp" platform="highweb"/></link>
हिंदी में ऐसे ठिए कम ही हैं जहाँ किताबों की कोई सालाना सूची सहेजी जाती है.
फेहरिस्त

बीबीसी हिंदी ने पिछले साल भी कई सारे सम्पादकों, साहित्यजीवियों और रचनाधर्मियों से बात कर एक पहल की थी 2013 की पुस्तक सूची बनाने की, जो आप <link type="page"><caption> यहाँ देख सकते हैं</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/indepth/hindi_booklist_2013" platform="highweb"/></link>.
<link type="page"><caption> पढ़ेंः साल 2013 की उल्लेखनीय किताबें</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/indepth/hindi_booklist_2013.shtml" platform="highweb"/></link>
अब जब हम साल 2014 की दहलीज़ लाँघने ही वाले हैं, हमने इस सिलसिले को आगे बढ़ाया है.
हिंदी को लेकर उत्साह रखने वाले लोग चाहे हिंदी पट्टी में हों या बाहर, शायद इन फेहरिस्तों को अपने ज़हन में दर्ज कर सकते हैं.
<link type="page"><caption> पढ़ेंः हिंदी: दलित साहित्य की 10 श्रेष्ठ रचनाएँ</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/09/130912_hindi_special_dalit_sahitya_akd" platform="highweb"/></link>

ये कहना ज़रूरी है कि कोई भी फ़ेहरिस्त एक अंतिम सत्य की तरह नहीं होती. उससे असहमत हुआ जा सकता है.
यह भी ग़ौर किया जा सकता है कि कई श्रेणियों में जो है वह काफ़ी नहीं है. हिंदी का संसार इतना विहंगम है कि वहाँ इस तरह की बहस और उत्साह अधिक देखने मे आना चाहिए.
<link type="page"><caption> पढ़ेंः हिंदी से कौन और क्यों डरता है?</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/06/140620_hindi_contoversy_analysis_priyadarshan_tk" platform="highweb"/></link>
जरूरी विमर्श

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किसी अकादमिक अध्यापक कक्ष, किसी सरकारी ख़रीद का हिस्सा बनने से कहीं ज़्यादा ज़रूरी है एक अच्छी किताब का किसी बिस्तर के सिरहाने पर रखा होना.
उन लोगों तक पंहुच पाना जिनमें भाषा साँस लेती है और धड़कती है. जिंदगी को थोड़ा बदलने, खिड़कियों को थोड़ा खोलने और दुनिया को थोड़ा बेहतर समझने के लिए.
<link type="page"><caption> पढ़ेंः हिंदी के लिए दोधारी तलवार सोशल नेटवर्किंग?</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/09/120914_facebook_hindi_akd" platform="highweb"/></link>

हमारी ईमानदार कोशिश है कि हिंदी के महत्वपूर्ण साहित्यिक हस्ताक्षरों के ज़रिए हम उस सुधी पाठक के काम आ सकें, वह चाहे दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न हो.
शायद इससे हिंदी समाज के उस विमर्श को थोड़ा विस्तार मिल सके, जो ज़रूरी है और ज़रूरत भी. तो हम आपके लिए अगली कड़ी में लेकर आएँगे 2014 के उल्लेखनीय कविता संग्रह.
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां <link type="page"><caption> क्लिक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>












