स्पाइसजेट किंगफिशर की राह पर तो नहीं?

स्पाइसजेट एयरलाइंस का एक विमान

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    • Author, साइमन एटकिंसन
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़, मुंबई

भारत के उड्डयन बाज़ार में कम कीमतों में विमान सेवाएं मुहैया कराने वाली कंपनी स्पाइसजेट के भविष्य को लेकर कयासों का दौर जारी है.

पिछले दो हफ्तों में इसके शेयरों की कीमतें औधें मुंह गिरकर तकरीबन आधी रह गई हैं.

कंपनी भारत सरकार से आपातकालीन परिस्थितियों के मद्देनज़र बातचीत कर रही है. लेकिन सवाल उठता है कि आखिर कहाँ चूक हो गई.

उड़ानें रद्द

स्पाइसजेट एयरलाइंस का काउंटर

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दूसरी तरफ़ देखें तो भारत के हवाईअड्डों पर यह व्यस्त समय है जब यात्री त्यौहार और नए साल की छुट्टियां मनाने अपने घरों से निकल रहे हैं.

लेकिन अगर इन मुसाफ़िरों में से किसी ने स्पाइसजेट एयरलाइन में टिकटें खरीद रखी हैं तो शायद उनकी सांसें अटकी हुई होंगी.

यह अब कोई छुपी हुई बात नहीं रह गई है कि स्पाइसजेट संघर्ष की राह पर चल रहा है. उसे मजबूरी में अपनी सैंकड़ों उड़ानें रद्द करनी पड़ी हैं.

मौजूदा अनिश्चितता की वजह से विमानन कारोबार का नियमन करने वाली सरकारी एजेंसी ने स्पाइसजेट के 30 दिनों से ज़्यादा की एडवांस टिकट बुकिंग करने पर रोक लगा दी है.

आर्थिक मदद

स्पाइसजेट एयरलाइंस

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इसमें कोई शक नहीं कि ये कदम विमान यात्रियों की सुरक्षा के लिए उठाया गया है लेकिन इस फैसले का मकसद ये तय करना भी है कि स्पाइसजेट टिकटों की बिक्री से कितनी रकम उठा सकती है.

पिछले कुछ दिनों से स्पाइसजेट के अधिकारी सरकार के साथ बातचीत में लगे हुए हैं.

उनकी कोशिश है कि जब तक मौजूदा निवेशकों या फिर नए निवेशकों से उसे और आर्थिक मदद न मिल जाए तब तक सरकार उन्हें ईंधन की आपूर्ति करती रहे.

लेकिन ईंधन की ऊँची कीमतें उनकी कई समस्याओं में से एक हैं, रखरखाव का खर्च और एयरपोर्ट का शुल्क भी इनमें शामिल हैं.

किंगफिशर की घटना

किंगफिशर एयरलाइंस

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उड्डयन क्षेत्र के कई जानकारों का कहना है कि स्पाइसजेट एयरलाइन के प्रंबधन से जुड़े कामकाज का ज़िम्मा बाहरी सलाहकारों को सौंपने का फ़ैसला भी एक बड़ी गलती थी.

स्पाइसजेट की मुसीबतों का एक पहलू किराए की जंग भी है, कम भाड़ा वसूलने वाली विमाननन कंपनियां मुसाफिरों को लुभाने में ज़्यादा कामयाब होती दिख रही हैं.

किंगफिशर एयरलाइंस

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स्पाइसजेट को अपने रूटों पर प्रतिस्पर्द्धी कंपनियों से भी दो चार होना पड़ रहा है.

पिछले सालों में किंगफिशर एयरलाइन में आया संकट लोगों के ज़हन में अब भी ताज़ा है.

स्पाइसजेट भी लगभग उन्हीं मुश्किलों से गुज़र रहा है जिन हालात का किंगफिशर को सामना करना पड़ा था.

अफसलता का दोहराव एक ऐसी बात होगी जिसे न तो सरकार, न तो उद्योग जगत और न ही यात्री देखना चाहते हैं.

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