उबर जैसी सेवाएं बदल सकती हैं परिवहन को..

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- Author, चिदानंद राजघट्टा
- पदनाम, वॉशिंगटन से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
दिल्ली में एक टैक्सी में कथित रूप से बलात्कार की घटना से पहले तक उबर टैक्सी सेवा सुविधाजनक, साफ़-सुथरी और विश्वसनीय मानी जाती थी.
जीपीएस तकनीक के इस्तेमाल से टैक्सी और उसमें बैठे यात्री की स्थिति का किसी भी समय पता लगाया जा सकता था.
लेकिन बलात्कार की घटना के बाद इस टैक्सी सर्विस की छवि को ज़बरदस्त धक्का लगा है और उसकी गतिविधियों पर भारत में कई जगह प्रतिबंध लगा दिया गया है.
लेकिन क्या प्रतिबंध लगाना समस्या का समाधान है?
पढ़िए पूरी रिपोर्ट

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पिछली दीवाली में सपरिवार भारत यात्रा के दौरान हमने कई बार उबर टैक्सी सर्विस का इस्तेमाल किया और यह सुविधाजनक, विश्वसनीय, तेज़, साफ़ और सस्ती लगी (ऑटो से भी सस्ती, जल्द ही आपको पता चलेगा क्यों).
मैंने तब लिखा भी था कि उबर जैसी सेवाएं भारत में परिवहन की तस्वीर को बदल देंगीं, जहां सार्वजनिक परिवहन सेवाएं खस्ताहाल हैं और निजी परिवहन भरोसे के लायक नहीं है.
भारत प्रवास के दौरान अगले दो हफ़्ते तक हमने उबर का कई बार इस्तेमाल किया और तभी हमें पता चल गया था कि यह दोधारी तलवार है. एक बार मेरी बीवी ने अपने फ़ोन से मेरे लिए टैक्सी मंगवाई.
दस मिट बाद मेरी पत्नी ने मुझे फ़ोन किया कि अरे, ये तो बहुत बुरा हुआ कि तुम एक अंडरपास के नज़दीक ट्रैफ़िक जाम में फंस गए हो. मेरी टैक्सी कहां है, वह अपने सेल फ़ोन पर देख सकती थी.
इसलिए अच्छा हो या बुरा, उबर जैसी टैक्सी सर्विस के साथ निजता की समस्या भी है. अगर आपने अपने फ़ोन से टैक्सी मंगवाई है तो आप अपने पति-पत्नी, बच्चों, मेहमानों को स्थिति पर नज़र रख सकते हो. लेकिन उबर को आपके रास्ते भी पता हैं.
दरअसल जब तक हम अमरीका लौटे तो सोचते रहे कि कैसे उबर के आंकड़ों का इस्तेमाल किया जा सकता है कि कौन व्यक्ति किस पते पर कितनी बार गया है.

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ग़लत हाथों में इस सूचना का जाना ख़तरनाक हो सकता है. अमरीका में उबर पर उन पत्रकारों का पीछा करने का आरोप लगा है जो उसके ख़िलाफ़ लिख रहे थे.
पैसा और ज़िम्मेदारी
लेकिन इसके और भी ख़तरे हैं. एक बार भारत में हमारे एक मेहमान ने हमारे घर से जो टैक्सी ली उसके लिए कोई पैसा नहीं दिया. क्योंकि उबर दीवाली प्रमोशन योजना चला रहा था और उन्हें 200 रुपये की छूट मिल गई.
उबर ऐसा इसलिए कर सकता है क्योंकि उसके पास बहुत पैसा है. करीब 1.2 अरब रुपये का निवेश जो वेंचर केपिटिस्ट ने किया है. एक बार उसने अन्य प्रतिद्वंद्वियों को बर्बाद कर बाज़ार पर पकड़ बना ली तो हमें उसी यात्रा के लिए 2,000 रुपए देने होंगे जिसके लिए अभी हम 350 रुपए देते हैं.
दुनिया भर में एयरलाइंस के व्यापार में भी यही हुआ है. लेकिन ग्राहकों को क्या मतलब- कम से कम तब तक, जब तक सब सही चल रहा है.
उबर और इसी तरह की और टैक्सियों के आने से पहले हम पड़ोस की ही एक टैक्सी सेवा का इस्तेमाल करते थे जिसे एक बेहद भला आदमी सुरेश चलाता था और उसके पास दो टैक्सी थीं.

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हमें सुरेश इतना पसंद था कि हमने उसे उबर के बारे में उसे भी बताया. उसके चेहरे पर चिंता की लकीरें थीं.
उसने बताया कि वह भी उबर ड्राइवर के रूप में काम करने की सोच रहा है, बस एक बार वह ऐप का इस्तेमाल करना सीख ले. लेकिन उसने सुना था कि उबर अमरीका में ड्राइवरों के पैसे काट रहा है.
अमरीका में उबर का हाल
यह सच भी है. अमरीका में उबर ड्राइवर नाराज़ हैं क्योंकि कंपनी ने दाम कम रखने और प्रतियोगिता ख़त्म करने के लिए ड्राइवरों को मिलने वाले फ़ायदे में कटौती की है.
अमरीका में 'सर्ज प्राइसिंग' नाम की एक चीज़ है. जब मांग बहुत ज़्यादा होती है तो कीमत बढ़ा दी जाती है- जैसे कि बर्फ़ीले तूफ़ान के वक्त या किसी बड़े मैच के दौरान स्टेडियम के पास.
आपको यह ग़लत लग सकता है लेकिन बाज़ार इसी तरह काम करता है.
इसके अलावा देनदारी के भी मसले हैं. सैन फ़्रांसिस्को में, एक उबर ड्राइवर सैयद मुज़फ़्फ़र ने सड़क पार करती एक महिला और दो बच्चों पर गाड़ी चढ़ा दी क्योंकि वह अपने उबर ऐप में यह देखने की कोशिश कर रहा था कि क्या नज़दीक में कोई ग्राहक है.
इस दुर्घटना में छह साल का एक बच्ची की मौत हो गई. उबर ने किसी भी तरह की ज़िम्मेदारी लेने से इनकार कर दिया.

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कंपनी का कहना था कि हालांकि वह ड्राइवर उबर के साथ साझीदार या अनुबंध पर काम कर रहा था लेकिन उसकी गाड़ी में कोई ग्राहक नहीं बैठा था इसलिए दुर्घटना की ज़िम्मेदारी उसकी ख़ुद की थी.
ड्राइवर के वकीलों का तर्क है कि क्योंकि फ़ोन ऐप चालू था और उसे ग्राहक की तलाश थी, इसलिए उबर की ज़िम्मेदारी है. यह मामला अभी अदालत में है.
प्रतिबंध हल नहीं
यह साफ़ है कि उबर के साथ कई दिक्कतें हैं और इसके अलावा नियमन, ज़िम्मेदारी, लाइसेंस और सुरक्षा जैसे मुद्दे भी हैं. लेकिन ऐसी सेवा पर प्रतिबंध किसी चीज़ का हल नहीं है.
उबर ने किसी महिला का बलात्कार नहीं किया- एक व्यक्ति ने कथित रूप से ऐसा किया.
हालांकि उबर की लापरवाही, पर्याप्त सुरक्षा जांच का इंतज़ाम न करना और उस व्यक्ति के ख़िलाफ़ पिछली शिकायतों पर कार्रवाई न करना कहीं न कहीं इस घटना की वजह बनीं.
उबर को इसकी सज़ा तो मिलनी ही चाहिए. लेकिन जीपीएस-स्मार्टफ़ोन आधारित टैक्सी सेवा के विचार को ही दरकिनार कर देना अक्लमंदी नहीं.

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पूरी दुनिया में उबर नियमन, जिम्मेदारियों, कराधान को लेकर जूझती रही है, अमरीका में भी स्थानीय प्रशासन, पारंपरिक टैक्सी यूनियनें और ग्राहक इस मुद्दे पर मिलकर काम कर रहे हैं ताकि एक उचित रास्ता निकाला जा सके.
उबर और ऐसी ही अन्य टैक्सी सेवाओं ने वाहनों का अधिकतम इस्तेमाल इस्तेमाल किया है, रोज़गार उपलब्ध करवाए हैं और ग्राहकों को बेहतर सुविधा और विकल्प दिए हैं.
इसे ख़त्म करने का मतलब अपने ही पैर पर कुल्हाड़ी मारना होगा.
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