ट्विटर पर उबर: किस-किस पर प्रतिबंध हो?

उबर विरोध प्रदर्शन

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उबर टैक्सी में कथित बलात्कार के बाद दिल्ली सरकार ने वेब-आधारित टैक्सी कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया है. इस पर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ सी आ गई है.

भारतीय सोशल मीडिया में उन चीज़ों का नाम लिया जा रहा है जिन्हें प्रतिबंधित कर बलात्कार को हमेशा के लिए रोका जा सकता है.

सोशल मीडिया पर कई लोगों ने प्रतिबंध का मज़ाक उड़ाया है लेकिन कुछ ने प्रतिबंध का समर्थन भी किया है.

पढ़िए समांथी दिसानायके और पारुल अग्रवाल की पूरी रिपोर्ट

1. 'पतियों पर प्रतिबंध लगे'

उबर

दि एकॉर्न ब्लॉग के नितिन पाई ब्लॉग में लिखते हैं, "दिल्ली सरकार को वयस्क महिला और पुरुषों के बीच संबंधों को प्रतिबंधित कर देना चाहिए. बॉयफ़्रेडों को प्रतिबंधित कर देना चाहिए. वैवाहिक बलात्कार की समस्या को सुलझाने के लिए पतियों पर भी प्रतिबंध लगा देना चाहिए."

बहुत से लोग यह कहना चाह रहे थे कि हो सकता है कि बलात्कार के लिए वेब-आधारित टैक्सी ऐप सीधे ज़िम्मेदार न हो बल्कि इसके कई बड़े और ज़्यादा परेशान करने वाले सामाजिक मनोवैज्ञानिक कारण हैं.

@सेठश्रुति ने ट्वीट किया: मुझे तो यह देखकर मज़ा आ रहा है कि कैसे सारा दोष @उबर पर मढ़ा जा रहा है क्योंकि कार मिलने से पहले तो भारत के बलात्कारियों ने कभी बलात्कार किया ही नहीं? #मिसिंगदिपॉएंट

2. 'ड्राइवरों को केबिन में बंद करें'

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नितिन पाई अपनी व्यंग्यात्मक शैली में आगे कहते हैं, "बस, मैट्रो और ट्रेन ड्राइवरों को उनके ड्राइविंग के केबिनों में बंद कर देना चाहिए और उनकी शिफ़्ट ख़त्म होने के बाद ही निकालना चाहिए."

इस तर्ज पर कई लोगों का तर्क है कि दिल्ली की बस में 2012 में बलात्कार होने के बाद सरकार को बसों पर भी प्रतिबंध लगा देना चाहिए था.

लेकिन एक गंभीर सवाल भी है. दिल्ली में एक कामकाजी महिला- और यह बात मैं अपने निजी अनुभव से भी जानती हूं- हमेशा किफ़ायती और सुरक्षित साधन ढूंढती रहती है.

कई पेशेवर महिलाएं ऑफ़िस जाने के लिए इन वेब आधारित सस्ती टैक्सी सर्विस पर निर्भर करती हैं. और जब महिला ने स्कर्ट पहनी हो तो वह सार्वजनिक परिवहन के बजाय इनमें ज़्यादा आज़ाद महसूस करती है.

@असीमरस्तोगी2 में असीम रस्तोगी कहते हैं: तो #उबर दुर्घटना के बाद अब सभी वेब आधारित टैक्सी सर्विस पर प्रतिबंध लगाने की है.... वाह... अब सभी महिलाएं कितना सुरक्षित महसूस कर रही होंगी, नहीं क्या?

3. 'महिलाओं के बाहर निकलने पर रोक'

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@गौरवकपूर ने ट्वीट कियाः उबर को बैन करना सही काम है. इसके साथ ही हें ऑफ़िस, कॉलेज, रेस्तरा, सिना और उन सभी जगहों पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए जहां महिलाएं जाती हैं. महिलाओं के घर से बाहर निकलने पर ही प्रतिबंध लगा दो.

यकीकन बहुत से लोगों ने हमें ऐसे बहुत सी वजहें बताई हैं, जिनकी वजह से बलात्कार होते हैं: महिलाओं के कपड़ों से लेकर आपकी राशि तक.

4. 'मोबाइल, बिजली बोर्ड का क्या'

अरुण शंकर ने ट्वीट किया: #उबर प्रतिबंधित. उस मोबाइल का क्या? उस ऑपरेटिंग सिस्टम का क्या जिसे वह इस्तेमाल कर रही थी? हे भगवान!! विद्युत आपूर्ति करने वाले बिजली बोर्ड का क्या. #उबर पर प्रतिबंध मज़ाक तो नहीं है?

5. 'अपराधियों को खुला घूमने दो'

उबर अभियुक्त

तूलिका दुबे ने ट्वीट किया: बसों, टैक्सियों, पबों, कपड़ों, ज़िंदगी पर प्रतिबंध लगा दो लेकिन अपराधियों को खुला घूमने दो. #उबेर

इससे मुझे समझ आता है कि बाहरी लोगों के लिए दिल्ली में एक महिला की मुश्किलों को समझना कितना मुश्किल है.

मुझे याद आता है कि हम कुछ दोस्त एक मेहमान को यह बता रहे थे कि यहां कैसे घूमना है. हम सब ने अलग सलाह दी. टैक्सी मत लेना, सिर्फ़ महिलाओं के मेट्रो डिब्बे में ही सफ़र करना, बस मत लेना.

अंततः हमें यह समझ चला कि हमने उनके लिए होटल के कमरे में रहने के सिवा कोई विकल्प नहीं छोड़ा था.

6. 'चाकू पर बैंडएड लगाओ'

इशिता मल्होत्रा ट्वीट करती हैः हां यह ठीक है यौन हिंसा और बलात्कार रोकने के लिए #उबर पर प्रतिबंध लगा देते हैं. और अगर कोई आपको चाकू मारे तो उस पर एक बैंडएड लगा दो. #गवर्नमेंटलॉजिक

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नेट पर ज़्यादातर महिलाओं ने कहा कि सरकार मूल मुद्दे से भटक रही है. व्यवस्थागत बदलाव के बजाय शासन ने ऊपरी बदलाव करने के विकल्प को चुना.

ऐसा पहली बार हुआ है कि भारतीयों ने ऐसी घोषणा पर इस व्यंग्यात्मक शैली में टिप्पणियां की हैं. बलात्कार की कई बड़ी घटनाओं के बाद लोग वास्तविक बदलाव के बजाय दिखावटी कदमों से ऊबने लगे हैं.

7. 'प्रतिबंध प्रतिबंध प्रतिबंध'

सोशल मीडिया पर मिताली चैटर्जी कहती हैं, "किताबों, संगीत कार्यक्रमों, क्रिकेट मैचों, कला प्रदर्शनियों, उबर पर प्रतिबंध लगा हो..... प्रतिबंध प्रतिबंध प्रतिबंध... यही वह चीज़ है जो हम सचमुच अच्छे से करते हैं..!!"

लेकिन कुछ लोगों ने प्रतिबंध का समर्थन भी किया

उबर पर तकनीकी वजह से प्रतिबंध लगाया गया और कुछ लोगों का मानना है कि कंपनी नियुक्ति में लापरवाही और पर्याप्त पड़ताल करने में असफलता के बावजूद बच जाएगी.

और तो और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने भी प्रतिबंध को लेकर संदेह जताया.

उबर ऐप

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लेकिन उबर पर प्रतिबंध का कुछ समर्थन तो है ही.

शिवानी ने ट्वीट किया, "हमें एक मिसाल कायम करनी होगी. और उबर पर प्रतिबंध एक मिसाल है."

यासिन कांबले कहते हैं कि हालांकि यह समधान नहीं है लेकिन यह "इस उद्योग के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश हो सकता है कि महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी है."

कई लोगों ने इस बात पर भी दुख व्यक्त किया कि ऐसे कदमों से उद्यमशीलता का दम घुंटता है.

इन ट्वीट्स में मज़ाक नज़र आ सकता है लेकिन इनमें निंदा है और ये महिलाओं के प्रति समाज, सरकार के नज़रिए को लेकर निराशा प्रकट करते हैं.

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