'कंपनियां जिम्मेदारी से भाग नहीं सकतीं'

इमेज स्रोत, Reuters

    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

दिल्ली में टैक्सी में महिला के साथ कथित बलात्कार से ये स्पष्ट होता है कि टैक्सी कंपनी बनाकर कारोबार करना कितना आसान है.

ऐसा प्रतीत होता है कि इस काम में टैक्सी कंपनी को किसी की सुरक्षा की चिंता नहीं करना पड़ती.

साफ़ संकेत ये भी है कि ये ऐग्रीगेटर सैंकड़ों ड्राइवरों को रोजी-रोटी कमाने का एक प्लेटफॉर्म तो मुहैया कराते हैं लेकिन यात्रियों की सुरक्षा की गारंटी नहीं ले सकते.

ये कंपनियां लगभग सभी मेट्रो शहरों और अनेक अन्य शहरों में सर्विस दे रही हैं. ये शहर और विशेष तौर पर बेंगलुरु तकनीक आधारित सेवा देने वाली कंपनियों की प्रयोगशाला बन गया है.

विशेष रिपोर्ट विस्तार से

उबर टैक्सी रेप मामला

इमेज स्रोत, Reuters

सरकार और कानूनी विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत में ऐसे कानून पर्याप्त संख्या में हैं जो यात्रियों के प्रति टैक्सी ऐग्रीगेटरों की पूर्ण जवाबदेही तय करते हैं.

टैक्सी ऐग्रीगेटर केवल इस आधार पर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते कि गाड़ी और वाहन परमिट उनके नहीं बल्कि ड्राइवर के नाम पर है.

सुप्रीम कोर्ट के वकील केवी धनंजय ने बीबीसी को बताया, " कंपनी को नुकसान की भरपाई भी करनी होगी. यदि किसी महिला ने उनकी सेवा ली है तो इस भरोसे पर कि ड्राइवर उन्हें लक्ष्य तक सही-सलामत पहुंचा देगा. मैं उस महिला को कहूंगा कि वो कंपनी पर मुकदमा करे.’’

<link type="page"><caption> कमाई उबर की, रिस्क बैठने वाले का</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/12/141209_uber_taxi_term_condition_sr" platform="highweb"/></link>

उबर टैक्सी रेप मामला

इमेज स्रोत, Reuters

कर्नाटक के परिवहन आयुक्त राम गौड़ा कहते हैं, ''मोटर वाहन अधिनियम के तहत कंपनी के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जी सकती है क्योंकि वह भी अपराध होने की परिस्थिति में उतनी ही जिम्मेदार होती है.’’

गाड़ियां कंपनियों की अपनी नहीं

उबर टैक्सी रेप मामला

इमेज स्रोत, AP

टैक्सी फ़ॉर श्योर (टीएफ़एस), ओला या उबर जैसे ब्रांड के लिए काम करने वाली अधिकांश गाड़ियों का मालिकाना हक इन कंपनियों के पास नहीं हैं.

डॉ. गौड़ा कहते हैं, "उदाहरण के लिए टीएफ़एस की बैंगलुरु में करीब 7,000 और भारत भर में 20,000 गाड़ियां हैं जो इसके 'लोगो' के साथ चलती हैं. लेकिन इसमें से केवल 101 टाटा नैनो ही अपनी मूल कंपनी सेरेंडिपिटी इनफ़ोलैब्स प्राइवेट लिमिटेड के तहत अधिकृत हैं."

टीएफ़एस के सह-संस्थापक अपरामेय राधाकृष्णन का कहना है, ''हमारा काम करने का तरीका अलग है. हम स्थानीय ऑपरेटर्स के साथ मिलकर काम करते हैं. इनके पास 30 से 50 ड्राइवर होते हैं.’’

बायोमेट्रिक टेस्ट

उबर टैक्सी रेप मामला

राधाकृष्णन के साथ ही ओला कैब के मार्केटिंग कम्यूनिकेशंस के निदेशक आनंद सुब्रह्मण्यम ने जोर देकर कहा, "अगर ड्राइवर अपना फ़ोन बंद कर देते हैं तो उनकी डिस्पैच टीम उन्हें कॉल करती है. हमारी कंपनी टैक्सियों की आवाजाही पर निरंतर नज़र रखती है. दिल्ली में उबर मामले के बाद ओला कैब अपनी गाड़ियों में जीपीएस ट्रैकिंग प्रणाली पर दोहरी नजर रखने की योजना बना रहा है."

मेरू कैब्स के सीईओ सिद्धार्थ पावा ने कहा, "भारत में रेडियो टैक्सी के अगुआ 'मेरु कैब' सरकार के साथ ही अन्य उद्यमों को भी अपने ड्राइवरों के प्रशिक्षण और सुरक्षा प्रक्रियाओं से जुड़ी जानकारियां बांटेगा. हम ड्राइवरों का बायोमेट्रिक टेस्ट भी करते हैं."

<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां <link type="page"><caption> क्लिक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</bold>