जम्मू-कश्मीर में भाजपा 370 पर चुप क्यों?

- Author, बीनू जोशी
- पदनाम, जम्मू से, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए
जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी ने जो 'विज़न डॉक्यूमेंट' जारी किया है, उसमें न तो अनुच्छेद 370 का कोई जिक्र है, न जम्मू क्षेत्र के साथ भेद-भाव की बात है.
भाजपा बार-बार इन मुद्दों के साथ-साथ हिंदू बाहुल्य जम्मू क्षेत्र को राजनीतिक तौर पर अधिक प्रभावशाली बनाने की बात करती आई है, लेकिन इन मुद्दों पर पार्टी का दस्तावेज़ चुप है.
तो क्या भाजपा ने अनुच्छेद 370 पर अपना स्टैंड बदल लिया है?
यदि ऐसा हो तो क्या उसे इसका राजनीतिक लाभ होगा या फिर ख़ामियाज़ा भुगतना पड़ेगा?
अनेक विश्लेषक मानते हैं कि यदि भाजपा अनुच्छेद 370 पर पुराना रवैया कायम रखती तो भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर में उसके पास अपनी ज़मीन तैयार करने का अच्छा मौका था.

इमेज स्रोत, EPA
वे ये भी मानते हैं कि इससे 87 सीटों वाली विधानसभा में 44+ के उसके लक्ष्य तक पहुंचने का रास्ता खुल सकता था.
भाजपा के पास लोकसभा में बहुमत भी है. हालाँकि राज्यसभा में उसके और सहयोगियों के पास बहुमत नहीं है.
एक ऐसा राज्य जहां इस पार्टी को हिंदुत्व के झंडाबरदार के तौर पर देखा जाता रहा है, वहाँ भाजपा के इस स्टैंड का क्या असर होगा?
पढ़िए पूरी रिपोर्ट
चुनाव के लिए राजनीतिक पार्टियों का समझौते करना कोई अनहोनी बात नहीं है. भाजपा भी ये करती रही है.
उसने भी कई तरीके अपनाए, अल्पसंख्यकों को अपनी ओर लाने की कोशिश की और जाति और भाषा का पत्ता खेला है.
लेकिन जम्मू और कश्मीर भारत के दूसरे राज्यों की तरह नहीं है.

इमेज स्रोत, EPA
यह महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश भी नहीं है जहां मुसलमानों की बड़ी आबादी रहती है और जो राजनीतिक पार्टियों की किस्मत प्रभवित करती है.
मुस्लिम बहुमत वाला राज्य
जम्मू और कश्मीर की अपनी कुछ विशेषताएं हैं, जातिवादी राजनीति, क्षेत्रीय आकांक्षाएं और राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियों की उलझा देने वाली मौजूदगी.
लेकिन जो बात इसे दूसरों से अलग करती है, वो ये कि जम्मू-कश्मीर भारत का इकलौता मुस्लिम बहुमत वाला राज्य है.

इसका भौगोलिक अस्तित्व भारत और पाकिस्तान के बीच बंटा हुआ है.
परमाणु हथियारों से लैस भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे विवाद का यह एक अहम मुद्दा भी है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी इस पर नज़र रहती है.
मिशन 44+
राज्य में भाजपा के महासचिव अविनाश राय खन्ना 'विज़न डॉक्यूमेंट' में अनुच्छेद 370 के न होने पर कहते हैं कि अनुच्छेद 370 पर पार्टी की राय के बारे में सबको पता है.

अविनाश खन्ना कहते हैं, "इस दस्तावेज़ में इन मुद्दों को लिए जाने की कोई जरूरत नहीं थी."
लेकिन जम्मू के कारोबारी घनश्याम शर्मा कहते हैं, "यह कश्मीरियों और अलगाववादियों को खुश करने की कोशिॆश है. जम्मू और कश्मीर में 44+ के मिशन को पाने के लिए बीजेपी जम्मू के हिंदुओं की कद्र नहीं कर रही है."

इमेज स्रोत, EPA
अनुच्छेद 370 पर भाजपा की नीति में आए 'बदलाव' पर जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, "इसमें कोई शक नहीं कि वे इस झंझट में फंसने से बच रहे हैं क्योंकि इससे उनकी मुश्किलें बढ़ेंगी. जम्मू में वे इसे (अनुच्छेद 370 को) राष्ट्रीय मुद्दे के तौर पर पेश कर रहे हैं और जैसे-जैसे वे ऊँची जगहों की ओर बढ़ते हैं, खामोश हो जाते हैं."
उमर अब्दुल्ला ने कहा, "...और कश्मीर में उनके उम्मीदवार कहते हैं... 'अगर आप अनुच्छेद 370 की बात करोगे तो हम बंदूक उठा लेंगे'... वे जगह के मुताबिक अपना स्टैंड बदल रहे हैं."
कांग्रेस नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद कहते हैं, "बीजेपी सत्ता के लिए अनुच्छेद 370 पर अपने स्टैंड से बदल गई है. वे जनसंघ के जमाने से ही इसे खत्म किए जाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन सत्ता के लिए उसने इसे भुला दिया."
विरोध की राजनीति

इमेज स्रोत, EPA
जम्मू यूनिवर्सिटी में राजनीति विज्ञान की प्रोफेसर रेखा चौधरी कहती हैं, "अनुच्छेद 370 को खत्म करने का मुद्दा बीजेपी की विरोध की राजनीति का हिस्सा था. जब एनडीए सत्ता में थी तो उनके पास बहुमत न होने का बहाना था."
प्रोफ़ेसर रेखा का कहना है, "अब बीजेपी इस मुद्दे पर चुप क्यों हैं? इसलिए, कि वे पार्टी का विस्तार करना चाहते हैं और उन्हें अहसास है कि कश्मीरी लोग अनुच्छेद 370 को खत्म करने की बात तो दूर, उसे हल्का करने की बात भी स्वीकार नहीं करेंगे."

इमेज स्रोत, AP
उन्होंने आगे कहा कि भाजपा जम्मू को गंभीरता से नहीं ले रही है जबकि जम्मू में मोदी की लहर थी न कि भाजपा की.
विश्लेषक और अनेक निवासी ये मानते हैं कि जम्मू और कश्मीर में क्षेत्रीय पार्टियां नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी अपने वादों को पूरा करने में नाकाम रही हैं.
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.</bold>)












