कश्मीर: ये है भाजपा का मुसलमान चेहरा

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- Author, संजॉय मजूमदार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
श्रीनगर में आमीरा कदल का पड़ोस. एक युवती काले कपड़ों में सिर पर स्कार्फ लपेटे लोगों के दरवाजों पर दस्तक दे रही है.
पड़ोस के कई लोग मोहल्ले की संकरी गली में इकट्ठे हैं तो कुछ खिड़कियों से झांक रहे हैं.
महिलाओं ने उस युवती को घेर रखा है. कोई उसके गालों को थपथपा रहा है तो कोई उसे गले लगा रहा है.
वो युवती हैं हिना भट्ट, मंगलवार को जम्मू कश्मीर में होने वाले पहले चरण के चुनाव की उम्मीदवार.

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भारत-पाकिस्तान के बीच विवाद का केंद्र बन चुके मुस्लिम बहुल राज्य जम्मू कश्मीर में वे खूब सुर्खियां बटोर रही हैं.
हिना भट्ट एक कश्मीरी मुस्लिम हैं और विधानसभा चुनाव में भाजपा की ओर से उम्मीदवार हैं.
कश्मीरी पंडितों, सेना की भूमिका और सितंबर में आए विनाशकारी बाढ़ जैसे मसलों के बीच कश्मीर के लोग चुनाव को किस नजर से देखते हैं.
पढ़िए संजॉय मजूमदार की रिपोर्ट विस्तार से

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कश्मीर की राजनीति को लेकर भाजपा कभी संजीदा नहीं रही.
भारत के साथ कश्मीर के नाजुक रिश्ते पर कट्टर विचारधारा रखने वाली भाजपा का मुस्लिम बहुल कश्मीर में मजबूत आधार भी नहीं रहा है.
लेकिन मई में हुए आम चुनाव में भारी बहुमत से जीतने वाले नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अब भाजपा जम्मू कश्मीर में एक दांव लगा रही है.
गलियों में अपने पीछे समर्थकों और सुरक्षाकर्मियों की भीड़ के साथ जल्दी जल्दी आगे बढ़ती हिना भट्ट कहती हैं, “कश्मीर के लोग विकास चाहते हैं. और हमारे प्रधानमंत्री मोदी लोगों के लिए विकास का मुद्दा लेकर आए हैं.”
वे कहती हैं, “हमारे नवयुवक निराश हैं, रोजगार नहीं है, अवसरों की भयानक कमी है. हमारा उद्देश्य इन सब परिस्थितियों में बदलाव लाना है.”
44 का जादुई आंकड़ा

कम से कम घाटी में लोगों के बीच इसे घिसा-पिटा अभियान ही माना जा रहा है.
कई राजनीतिक दलों के बस मुट्ठी भर झंडे नजर आ रहे हैं. उनमें से अधिकांश यहां की राजनीति पर हावी रहने वाली सत्ताधारी नेशनल कांफ्रेस और विपक्षी दल पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की है.
लेकिन साथ ही ये भी सच है कि भाजपा लोगों का ध्यान खींच रही हैं, और साथ में असाधारण समर्थन भी.
सज्जाद लोन पूर्व अलगाववादी नेता रहे हैं. वे कुपवाड़ा, जिसे उनके परिवार का गढ़ माना जाता है, से चुनाव लड़ रहे हैं.
कुपवाड़ा में कभी चरमपंथियों का बोलबाला रहा है और यह भारत और पाकिस्तान प्रशासित कश्मीर को विभाजित करने वाली युद्धविराम रेखा यानि नियंत्रण रेखा के नज़दीक होने के कारण बेहद संवेदनशील इलाका रहा.
इस महीने की शुरुआत में दिल्ली में जब लोन और नरेंद्र मोदी मिले तो जम्मू कश्मीर में एक नई बहस शुरु हो गई कि क्या दोनों साथ आ सकते हैं.
कहा गया कि भाजपा सज्जाद लोन जैसे नेताओं को रिझाने की कोशिश कर रही है ताकि उनकी मदद से वह 87 सीटों वाली विधानसभा में 44 का जादुई आंकड़ा पार कर सके.
विनाशकारी भूकंप

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और जब सैयद अली शाह गिलानी जैसे कुछ कट्टरपंथी अलगाववादी नेता भाजपा की जीत की संभावना पर चिंता ज़ाहिर करते हैं तो दूसरों का तर्क होता है कि इससे कश्मीर में कोई खास बदलाव नहीं आने वाला है.
उदारवादी अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक़ का कहना है, “कश्मीर सरकार के हाथ में ज़्यादा कुछ नहीं है क्योंकि यहां सब कुछ दिल्ली से नियंत्रित होता है.”
लेकिन श्रीनगर की सड़कों पर चुनाव को लेकर कोई खास गहमागहमी नजर नहीं आ रही है.
कश्मीर अभी पिछले सितंबर में आई विनाशकारी बाढ़ से उबरने की कोशिश कर रहा है.
लाल चौक में पानी का स्तर यहां की इमारतों की पहली मंज़िल तक पहुंच गया था. भले पानी निकल गया हो लेकिन इससे होने वाला नुकसान साफ साफ दिख रहा है.
नाम नहीं ज़ाहिर करने की शर्त पर एक दुकानदार ने बताया, “हमें सरकार की ओर से नाममात्र का मुआवजा मिला है.”
वे बताते हैं, “मेरी दुकान बर्बाद हो गई, जितना भी माल जमा था सब नष्ट हो गया. मुझे इन सबसे उबरने में महीनों लग जाएंगे. ऐसे में चुनाव के बारे में कौन सोचता है.”
सेना की भूमिका और अधिकार

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कई लोग इस बात पर सहमत हैं कि नई सरकार कश्मीर की ज़मीनी हक़ीक़त में कोई बदलाव नहीं लाने वाली. खासतौर पर तब जब बात भारतीय सुरक्षा बलों की भूमिका और उपस्थिति तथा उन कानूनों पर छिड़ती है, जिनके दम पर वे अधिकारपूर्वक कार्रवाई करते हैं.
नवंबर के शुरु में जब सेना के जवानों ने दो कश्मीरी किशोरों को गोली चलाकर मार डाला था.
शायद पहली बार सेना ने स्वीकार किया कि उन्होंने लड़कों पर गलती से गोली चलाई.
मगर इतने भर से मोहम्मद युसुफ भट्ट को तसल्ली कहां मिलने वाली. उन दो किशोंरों में से एक 13 साल का बुरहान उनका बेटा था.
उनका कहना है, “उसके बस्ते में बंदूक या बम नहीं बल्कि किताबें थी. और उन्होंने उसे मार डाला.”
वे कहते हैं, “अगर कश्मीर के लोग सड़कों पर सुरक्षित ही नहीं हैं तो उनके लिए नई सड़कों और पुलों के वादे करने का क्या मतलब?”
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