रोहतक छेड़छाड़: '..मैंने इसलिए बेल्ट निकाली'

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रविवार को सामने आए एक वीडियो के बाद हरियाणा के सोनीपत ज़िले की दो बहनों - आरती और पूजा की चर्चा हर तरफ़ है.
वो चलती बस में कथित तौर पर छोड़छाड़ करने वाले लड़कों के साथ अपने दम पर निपटीं, जबकि बस में बैठे लोगों ने उनकी कोई मदद नहीं की.
इस मामले में पुलिस ने तीनों लड़कों को गिरफ़्तार कर लिया है, लेकिन बताया जाता है कि लड़कियों के माता-पिता पर समझौते के लिए दबाव डाला जा रहा है.
पूजा के पिता राजेश कुमार बिजली विभाग के कर्मचारी हैं, उन्होंने बीबीसी से बातचीत में कहा कि "हम डरे हुए तो नहीं हैं लेकिन मामला लड़कियों का है इसलिए चिंता तो स्वाभाविक है".
दोनों बहनों में से एक, पूजा से बात की बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा ने और पूछा कि क्या कुछ हुआ था.
पूरी घटना, पूजा की जुबानी
"अगर ये वीडियो नहीं होता तो हमें पता ही नहीं चल पाता कि इन लड़कों का संबंध किस गांव से है. हम तो बस उन्हें चेहरे से जानते थे.
ये मामला रोहतक के नए बस अड्डे से शुरू हुआ था जहां हम बस लेने के लिए पहुंचे. ये लड़के अपना नंबर लिखकर हमारी तरफ़ फेंक रहे थे.
तीन चार बार इन्होंने ऐसा किया. मैंने उनसे कहा कि 'नंबर मत फेंको'. लेकिन वो नहीं माने और उन्होंने मेरे साथ ज़बरदस्ती की. उन्होंने कहा कि 'इस नंबर पर कॉल कर'.
इस सबके बीच हम बस में चढ़ गए. ये लोग भी हमारे साथ बस में दाख़िल हो गए. हमारी सीट के पास आकर बोले कि 'औक़ात तुम्हारी स्टपनी पर बैठने की है और यहां सीट पर बैठी हो'.

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मैंने इसका जवाब दिया कि 'तू बताएगा कि हमारी औक़ात कितनी है.'
तभी पीछे बैठी एक लड़की ने लड़कों से कहा कि 'क्यों इन लड़कियों को परेशान कर रहे हो'. इस पर उन्होंने कहा, 'हम इन को छोड़ देते हैं और तुझे परेशान कर लेते हैं.' और उसे परेशान करने लगे.
मैंने कहा कि 'लड़ाई हमारे साथ है, तो हमारे साथ ही रखो, इस लड़की को कुछ मत कहो'. वो मुझे गंदी गालियां देने लगे और छूने लगे.
तब मैंने कहा कि 'अब की बार हाथ लगाया तो पिटोगे'. फिर उन्होंने अपने किसी दोस्त को फोन किया और कहा कि लड़कियां पीटनी हैं, आजा.
'कोई विरोध नहीं करता'

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अगले गांव से एक लड़का और चढ़ गया. और फिर ये लोग हमारे साथ मारपीट करने लग गए. ख़ुद को बचाने के लिए मैंने बेल्ट निकाली और मारी.
इन्होंने मुझे बस से नीचे फेंक दिया और फिर हमारे साथ मार पीट की.
बस में किसी ने भी हमें बचाने की कोशिश नहीं की. हालांकि हम जानते हैं कि ऐसा ही होता है. कोई भी विरोध नहीं करता है.
उल्टे लड़कियों को ही सब बोलते हैं कि ऐसा मत करो, वैसा मत करो. लड़कों को कोई कुछ नहीं कहता.
अगर ये उम्मीद होती कि हमें बस में बैठे लोग बचाएंगे तो मुझे बेल्ट निकालनी क्यों पड़ती ? मैं पहले उनसे ही हेल्प मांगती.
लेकिन परिस्थितियां ही ऐसी हो गईं कि मुझे बेल्ट निकालनी पड़ी और उनको मारना पड़ा.
पहले ऐसे लोग कम बदतमीज़ी किया करते थे, उन्हें बातों से ही जवाब देने से काम चल जाता था. लेकिन इस बार तो इन्होंने हद पार कर दी और मारपीट करने लगे.
समझौते का दबाव

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अब हम से कहा जा रहा है कि समझौता कर लो. वो कह रहे हैं कि 18 तारीख़ को हमारे लड़के फौज में जॉइन करेंगे. समझौता करने से इनकी नौकरी बच जाएगी.
उन्होंने कहा कि 'हम लड़कों को पूरे गांव के सामने मारेंगे और लड़कियों के पैर पकड़वाएंगे'. मेरे पापा ने कहा कि 'अगर लड़कों को लगता है कि उन्होंने ग़लत किया है तो हम इसके लिए तैयार हैं'.
लेकिन फिर उन्होंने ऐसा करने से भी इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि अगर 'हमने अपने लड़कों को सज़ा दी या पुलिस ने उन्हें मारा तो वो आत्महत्या कर लेंगे'.
पुलिस की तरफ़ से समझौता करने के लिए कोई दबाव नहीं है लेकिन वो लोग कह रहे हैं कि अगर 'हमारे लड़कों ने आत्महत्या कर ली, तो हम केस आपके ऊपर ही दर्ज कराएंगे'."
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