'सरकार की ग़लती बच्चे क्यों भुगतें'

भारत का सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से केंद्रीय विद्यालयों में मौजूदा सत्र में जर्मन भाषा की पढ़ाई ज़ारी रखने पर विचार करने के लिए कहा है.

सरकार की ओर से केंद्रीय विद्यालयों में छठी से आठवीं कक्षा के बच्चों को इसी साल से तीसरी भाषा के रूप में जर्मन भाषा की जगह संस्कृत पढ़ाने के लिए कहा गया था.

केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ छात्रों के परिजनों के एक समूह ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है.

स्मृति ईरानी

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इमेज कैप्शन, इससे पहले मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा था कि संस्कृत को अनिवार्य नहीं किया जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा कि संस्कृत को लागू करने की इतनी हड़बड़ी क्यों हैं.

अदालत में सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहातगी ने कहा कि सरकार और जर्मनी के बीच केंद्रीय विद्यालयों में जर्मन की तीसरी भाषा का दर्जा देने के लिए किया गया समझौता अवैध है और इसे जारी नहीं रखा जा सकता है.

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा कि सरकार की ग़लती की सज़ा बच्चों को क्यों दी जाए.

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को एक सप्ताह का समय दिया है.

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