केंद्रीय विद्यालय: अब जर्मन नहीं संस्कृत

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- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
केंद्रीय विद्यालयों में अब त्रिभाषा फ़ॉर्मूला के तहत जर्मन के बजाय संस्कृत भाषा पढ़ाई जाएगी.
मानव संसाधन मंत्रालय के हवाले से भारतीय अख़बारों में छपी एक ख़बर में कहा गया है कि यह निर्णय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी के नेतृत्व में केंद्रीय विद्यालय बोर्ड की बैठक में लिया गया.
देशभर में 500 से अधिक केंद्रीय विद्यालयों में जर्मन भाषा पढ़ाई जाती है.
केंद्रीय सरकार के अनुसार यह फ़ैसला भारतीय भाषाओँ को बढ़ावा देने की एक कोशिश है. केंद्र में जूनियर शिक्षा मंत्री एमएस कथीरिया ने बीबीसी को बताया कि उन्हें इस फ़ैसले के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं है पर वह संस्कृत के पक्ष में हैं.

उनके मुताबिक़, "देश के विश्वविद्यालयों और दूसरी संस्थाओं में जर्मन भाषा पढ़ाई जा रही है लेकिन मैं केंद्रीय विद्यालयों में संस्कृत पढ़ाए जाने के मंत्रालय के फ़ैसले के पक्ष में हूं."
आंदोलन की धमकी
इस फ़ैसले की आलोचना भी हो रही है. तमिलनाडु की पार्टी पीएमके के नेता एस रामदॉस ने इसके ख़िलाफ़ आंदोलन की धमकी दी है और इसे एक सियासी फ़ैसला कहा है.
उनके अनुसार इसे वापस न लिया गया, तो उनकी पार्टी आंदोलन भी शुरू कर सकती है. रामदॉस कहते हैं, "संस्कृत बहुत कम लोग बोलते हैं जबकि जर्मन भाषा सीखकर हमारे विद्यार्थी जर्मनी और दूसरे देशों में नौकरियां हासिल करते हैं."
रामदॉस इसे उत्तर भारतीय राजनेताओं की तरफ़ से भाषाई साम्राज्यवाद स्थापित करने की कोशिश बताते हैं.

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यह फ़ैसला 27 अक्तूबर को केंद्रीय विद्यालय बोर्ड की बैठक में लिया गया था. सूत्रों के अनुसार इसे तुरंत लागू किया जाएगा.
इससे कक्षा छह से आठ तक के हज़ारों विद्यार्थी प्रभावित होंगे. फ़ैसले का मक़सद त्रिभाषा सूत्र के तहत लिया गया है, जिसमें अंग्रेज़ी के अलावा दो भारतीय भाषाएं पढ़ाने की बात कही गई है.
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद से स्कूली पाठ्यक्रम में फेरबदल की कोशिशें चल रही हैं.
आलोचक कहते हैं मोदी सरकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इशारे पर शिक्षा का भगवाकरण करना चाहती है.
वहीं उसके समर्थक कहते हैं देश की संस्कृति और रीति रिवाज़ों की सुरक्षा कोई ग़लत काम नहीं है.
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