मुलायम ने मायावती को 'पीछे छोड़ा'

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- Author, अतुल चंद्रा
- पदनाम, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए
शाही अंदाज़ में जन्मदिन मनाने के लिए कभी बसपा नेता मायावती की आलोचना करने वाले मुलायम सिंह यादव अब अपने जन्मदिन पर आलोचनाओं में घिरे हैं.
शुक्रवार को लोहिया के शिष्य और समाजवाद के सबसे बड़े नेता कहे जाने वाले मुलायम सिंह यादव का 75वां जन्मदिन जिस तरह से रामपुर में मनाया गया उसने मायावती के जन्मदिन की भव्यता को बहुत पीछे छोड़ दिया है.
इंग्लैंड से विशेष रूप से मंगाई गई बग्घी और 75 फ़ीट का केक काटा गया. मुलायम सिंह की लम्बी आयु में पहली बार इस तरह से उनका जन्मदिन मनाया गया है.
समाजवाद का मखौल
उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष लक्ष्मीकान्त बाजपेयी ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, "आचार्य नरेंद्र देव और राम मनोहर लोहिया की विचारधारा के वंशज होने के नाते मुलायम सिंह का इस तरह से जन्मदिन मनाना प्रदेश में अभाव से उत्पीड़ित जनता के जले पर नमक छिड़कना है."
बाडपेयी कहते हैं, "अगर वो अपना जन्मदिन ग़रीबों की बस्ती में मनाते तो अच्छा होता".

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उत्तर प्रदेश में नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य कहते हैं, "वो (मायावती) हमेशा अपना जन्मदिन सादगी से मनाती हैं. इस तरह का तमाशा उन्होंने कभी नहीं किया".
मुलायम के जन्मदिन के आयोजन को ग़लत ठहराते हुए मौर्य ने कहा की मुलायम ने इस तरह से जन्मदिन मना कर लोहिया के विचारों और समाजवाद का मखौल उड़ाया है.
दुखद
राजनीतिक विचारक प्रोफ़ेसर एसके द्विवेदी को डर है कि जन्मदिन मनाने का स्तर कैसा हो, कहीं इसी पर प्रतिस्पर्धा ना शुरू हो जाए.
वो कहते हैं, "मेरा केक उसके केक से छोटा क्यों, यदि ऐसी मानसिकता नेताओं में आ गई तो लोकतंत्र के लिए वह दिन अत्यंत दुखद होगा."

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इसलिए प्रोफ़ेसर द्विवेदी कहते हैं कि जन्मदिन की राजनीति से बचना बहुत ज़रूरी है.
पत्रकार शरत प्रधान कहते हैं कि मायावती के जन्मदिन मनाने के तरीक़े की भर्त्सना करने वाले मुलायम आज ख़ुद उसी जाल में फँस गए हैं. "उन्हें लगता है कि आज़म की हर बात मानकर उनको मुस्लिम वोट मिल जाएगा."
शरत प्रधान के अनुसार आज़म को मुलायम के परिजन ही नहीं पसंद करते हैं और ना ही समाजवादी पार्टी का कोई दूसरा मुस्लिम नेता. रामपुर के आयोजन में रामगोपाल यादव की अनुपस्थिति इस बात का सबूत है.
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