अब भी बच्चे मज़दूरी करते हैं यहां

इमेज स्रोत, Niraj Sahai
- Author, नीरज सहाय
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
कैलाश सत्यार्थी को नोबेल पुरस्कार ने दुनिया का ध्यान उन बच्चों की तरफ़ खींचा है जिनका बचपन मज़दूरी को विवश है.
बिहार के नवादा ज़िले के हिसुआ प्रखंड में 2002 में बच्चों को इस अभिशाप से बचाने की एक कोशिश हुई थी.
हिसुआ देश का पहला बाल श्रम मुक्त प्रखंड घोषित हुआ, जहां से क़रीब 750 बाल मज़दूर मुक्त कराए गए.
मगर आज हिसुआ प्रखंड उस घोषणा को मुंह चिढ़ाता लग रहा है.
सस्ते श्रम की मंडी

इमेज स्रोत, Niraj Sahai
तत्कालीन नगर पंचायत अध्यक्ष दिलीप कुमार के मुताबिक़ 'हैप्पी हिसुआ' कैंपेन एक मिशन का परिणाम था लेकिन निगरानी के अभाव में प्रखंड फिर सस्ते श्रम की मंडी बन गया.
मुक्त कराए गए बच्चे फिर उसी अंधेरे में लौटने को मजबूर हो गए.
हिसुआ में क़रीब 10 अगरबत्ती कारखाने हैं और हर एक में औसतन 20 से 25 बाल मज़दूर काम करते मिल जाएंगे.

इमेज स्रोत, Niraj Sahai
इसके अलावा ईंट-भट्टों, ढाबों आदि पर भी बच्चों से काम लिया जाता है.
एक नहीं कई
बस स्टैंड के पास मेरी मुलाक़ात हुई 13 साल के बाल मज़दूर राहुल कुमार से.
राहुल कहते हैं, "हर दिन सुबह छह से शाम सात बजे तक मिठाई की दुकान में काम करता हूं. चार भाई-बहनों में सबसे बड़ा हूं, मेरे पिता नहीं हैं. यहां काम करना मेरी मजबूरी है. हर महीने मुझे दो हज़ार रुपए मिलते हैं.

इमेज स्रोत, Niraj Sahai
राजगीर रोड से सटे ढाबे में 12 साल के वीरेंद्र मिले. जब उनसे बात करने की कोशिश की तो जवाब में उन्होंने सिर्फ़ नाम और उम्र का ज़िक्र किया और टेबल पर गिलास रखकर चले गए.
हिसुआ में एक नहीं कई राहुल-वीरेंद्र हैं.
जाएंगे कहां?
हालांकि प्रखंड श्रम प्रवर्तन अधिकारी किशोरी दास कहते हैं, "हम समय-समय पर अभियान चलाते हैं. कई बच्चे मुक्त भी कराए जाते हैं पर स्कूल की कमी और बाल संचय स्थल न होने से ये होटल जैसी जगहों पर फिर पहुंच जाते हैं."

इमेज स्रोत, Niraj Sahai
पूरे ज़िले में 88 बाल श्रमिक विशेष विद्यालय हैं. ऐसे तीन स्कूल इस प्रखंड में भी शुरू किए गए, लेकिन आज सभी स्कूल बंद हैं.
हिसुआ नगर पंचायत के वार्ड संख्या दो निवासी शिव कुमार बताते हैं कि बीते दो साल से स्कूल बंद हो गया है. मुझे डेढ़ साल का किराया भी नहीं मिला.
स्थानीय शिक्षक सर्वेश कुमार गौतम ने समस्या की ओर इशारा करते हुए बताया कि जहां 68 फ़ीसदी लोग कम उम्र में औसतन तीन बच्चे पैदा करते हों, वहां बच्चों से मजदूरी कराना उनकी मजबूरी है.
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml " platform="highweb"/></link> करें. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi " platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi " platform="highweb"/></link> पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)</bold>












