दिल्ली यूनिवर्सिटी से भी तो पूछें: कुलपति

ज़मीरुद्दीन शाह

इमेज स्रोत, amu.ac.in

    • Author, दिलनवाज़ पाशा
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के कुलपति ने छात्राओं के लाइब्रेरी न जा पाने के विवाद को विश्वविद्यालय का 'मीडिया ट्रायल' बताते हुए पूछा है कि यही सवाल दिल्ली विश्वविद्यालय से क्यों नहीं पूछा जा रहा है.

एएमयू की अंडर-ग्रेजुएट लड़कियों के लाइब्रेरी इस्तेमाल करने पर रोक से हाल में विवाद खड़ा हो गया है. अंडर-ग्रेजुएट लड़कों के अब्दुल्ला हॉल लाइब्रेरी इस्तेमाल करने पर कोई रोक नहीं है.

एएमयू के कुलपति लेफ़्टिनेंट जनरल जमीरुद्दीन शाह ने बीबीसी से बातचीत में ज़ोर देकर कहा कि वे एएमयू का (वेस्टर्नाइज़ेशन) पश्चिमीकरण नहीं होने देंगे.

शुक्रवार को एक छात्रा की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एएमयू को नोटिस ज़ारी किया है जिसका कुलपति के अनुसार कोर्ट में ही जवाब दिया जाएगा.

'मंत्रालय फंड दे तो विस्तार करेंगे'

लड़कियों के लाइब्रेरी इस्तेमाल करने के सवाल पर कुलपति ने कहा, "लड़कियों के लाइब्रेरी इस्तेमाल करने से हमें कोई दिक़्क़त नहीं हैं. कुछ विभागों की स्नातक छात्राएं पहले से ही मुख्य लाइब्रेरी का इस्तेमाल कर रही हैं."

उन्होंने कहा, "दिल्ली में भी कई कॉलेज हैं जिनकी लड़कियाँ दिल्ली विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में नहीं जा सकती हैं. तो फिर सवाल अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी पर ही क्यों उठाया जा रहा है?"

अलीगढ़ की छात्राएं

उन्होंने कहा, "मानव संसाधन मंत्रालय अगर हमें लाइब्रेरी विस्तार के लिए फंड देगा तो हम ज़रूर विस्तार करेंगे. अंडर-ग्रेजुएट लड़कियाँ भी लाइब्रेरी आ सकेंगी."

बराबरी का मौक़ा

भेदभाव के सवाल पर उन्होंने कहा, "हम लड़कियों को इज़्ज़त देते हैं, बराबरी का मौक़ा देते हैं और उनका सशक्तिकरण करते हैं. जितनी इज़्ज़त लड़कियों को एएमयू में मिलती है किसी और यूनिवर्सिटी में नहीं मिलती."

उन्होंने कहा, "प्रेस कुछ भी कहे, हम अपने रास्ते पर चलते रहेंगे. हम पश्चिमी तौर-तरीक़े अख़्तियार नहीं करेंगे. जो हमारी संस्कृति है हम उसके मुताबिक ही चलते रहेंगे."

हालांकि कुलपति ने यह स्पष्ट नहीं किया कि पश्चिमी तौर-तरीके से उनका क्या आशय है.

इससे पहले कुलपति के बयान कि लड़कियाँ लाइब्रेरी आएंगी तो पीछे लड़के भी चले आएंगे, पर भी बीबीसी ने उनसे सवाल पूछा.

लेफ़्टिनेंट जनरल जमीरुद्दीन शाह ने कहा कि इसे एक मुहावरे की तरह इस्तेमाल किया गया था जिसके ग़लत अर्थ निकाले जा रहे हैं.

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