छात्राएं लाइब्रेरी न जाएँ, पर क्यों?

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, लड़कियाँ

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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की अंडरग्रेजुएट लड़कियों को मुख्य लाइब्रेरी में जाकर पढ़ने की इजाज़त नहीं है.

अब ये विश्वविद्यालय में विवाद का विषय बन गया है.

हालाँकि, छात्राएँ लंबे समय से विश्वविद्यालय प्रशासन से ये सुविधा दिए जाने की माँग करती रही हैं.

विश्विविद्यालय की छात्राओं की संघ की नवनिर्वाचित अध्यक्ष गुल फ़िज़ा ख़ान ने अपने शपथ ग्रहण के दिन ही कुलपति के सामने फिर से यह माँग उठाई. विश्वविद्यालय में छात्राओं की अलग संघ है.

कुलपति ने जगह की कमी का हवाला देते हुए फिर से यह माँग मानने में असमर्थता जताई.

बीबीसी हिन्दी ने इस मसले पर छात्रा संघ की अध्यक्ष और कुलपति से अलग-अलग उनकी राय जानी.

छात्रा संघ की गुल फ़िज़ा ख़ान की राय

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, लाइब्रेरी,

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सोमवार को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के विमेंस कॉलेज स्टूडेंट यूनियन का शपथ ग्रहण समारोह था. मैं इस बार कॉलेज की छात्रा संघ की प्रेसिडेंट चुनी गई हूँ. शपथ ग्रहण में कुलपति लेफ्टिनेंट-जनरल ज़मीरुद्दीन शाह भी मौजूद थे.

इस मौके पर हमने कुलपति से मांग की थी कि छात्राओं को मौलाना आज़ाद लाइब्रेरी में जाकर पढ़ने की इजाज़त दी जाए.

हम विमेंस कॉलेज के बीए फ़ाइनल वर्ष में अर्थशास्त्र पढ़ती हैं. हमारी तरह और भी लड़कियाँ लाइब्रेरी का फ़ायदा उठाना चाहती हैं, और यह पहला मौक़ा नहीं है, हर साल इस मांग को उठाया जाता है.

हमारा कहना है कि जब अंडरग्रेजुएट लड़के वहाँ पढ़ने जा सकते हैं तो छात्राएँ क्यों नहीं?

आख़िर हम भी तो उसी यूनिवर्सिटी का हिस्सा हैं, वो हमारी भी लाइब्रेरी है. तो हम लाइब्रेरी में क्यों नहीं जा सकते हैं?

जगह की तंगी

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, छात्राएँ
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कुलपति ने हमारी मांग यह कह कर ख़ारिज कर दी कि वहाँ जगह की बहुत ज़्यादा तंगी है और लड़कियां ऑनलाइन किताबें ले सकती हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि अभी जो रीडिंग रूम हैं वे लड़कों को ही कम पड़ जाते हैं.

लेकिन हम यह नहीं मानते हैं. जगह है और यूनिवर्सिटी रीडिंग रूम बनवा सकती है. हमने अंदर के रीडिंग रूम में बैठकर पढ़ने की बात कही तो उसकी भी इजाज़त नहीं मिली.

रीडिंग रूम बनने में तो वक़्त लगेगा इसलिए हमने कहा कि लाइब्रेरी के लिए छात्राओं के पहचान पत्र ही बन जाएं ताकि वहाँ जाकर हम किताबें तो ख़ुद ले सकें.

लेकिन फिलहाल हमारी यह बात भी नहीं मानी गई है. ऑनलाइन किताबें मिल तो जाती हैं लेकिन हम वहाँ जाकर किताबें इशू भी नहीं करा सकते.

माँग नहीं मानी

एएमयू, वीसी

हमने उपस्थिति को लेकर भी मांग रखी. अभी सेमेस्टर प्रणाली में हर विषय में 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य है.

हमारी मांग है कि इसे घटा कर 65 प्रतिशत कर दिया जाए, इसे भी मानने से कुलपति ने इनकार कर दिया.

कई बार बीमारी के कारण हमारी उपस्थिति कम हो जाती है लेकिन यूनिवर्सिटी मेडिकल सर्टिफिकेट भी नहीं मानती.

हमने कहा कि कम से कम मेडिकल सर्टिफिकेट को तो मान लेना चाहिए. कुलपति ने कहा कि कुछ मामलों में वे मेडिकल सर्टिफिकेट की बात पर ग़ौर करेंगे.

कुलपति ज़मीरुद्दीन शाह की राय

ज़मीरुद्दीन शाह, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के उपकुलपति

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इमेज कैप्शन, विश्वविद्यालय के उपकुलपति ज़मीरुद्दीन शाह का कहना है कि लाइब्रेरी में जगह की तंगी है.

लड़कियों के मौलाना आज़ाद लाइब्रेरी जाने पर कोई मनाही नहीं है.

पोस्ट-ग्रेजुएट की छात्राएं लाइब्रेरी जाती भी हैं. यह रोक सिर्फ अंडरग्रेजुएट की छात्राओं के लिए है.

लाइब्रेरी 18 घंटे खुली रहती है फिर भी वहाँ बैठने की जगह नहीं रहती. लाइब्रेरी की सभी किताबें ऑनलाइन देखी जा सकती हैं और आर्डर की जा सकती हैं.

किताबें बहुत कम वक़्त में छात्राओं को पहुंचा दी जाती हैं. हम लाइब्रेरी में जगह की कमी को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं.

(पत्रकार अतुल चंद्रा से बातचीत पर आधारित)

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