मोदी मंत्रिमंडल: संघ का असर या चुनाव पर नज़र

मोदी मंत्रिमंडल विस्तार

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    • Author, उर्मिलेश
    • पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने मंत्रिमंडल का पहला विस्तार किया.

मोदी मंत्रिमंडल में चार कैबिनेट, दो राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और पंद्रह राज्यमंत्रियों सहित कुल 21 नए चेहरे शामिल किए गए.

इस मंत्रिमंडल विस्तार में आखिर किसकी छाप है? आरएसएस की, नरेंद्र मोदी या क्षेत्रीय-जातीय समीकरणों की?

पढ़िए उर्मिलेश का विश्लेषण

मोदी मंत्रिमंडल विस्तार

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल का पहला विस्तार राजनीतिक विवादों से नहीं बच सका. भाजपा के सबसे पुराने गठबंधन-सहयोगी शिवसेना ने महाराष्ट्र की तरह केंद्र में भी बगावती तेवर दिखाए.

ऐन मौके पर अपने एक सदस्य को राज्यमंत्री पद की शपथ लेने से रोककर शिवसेना ने मोदी के प्रभामंडल के आगे फिलहाल झुकने से इनकार किया.

शिवसेना के इस झटके से मंत्रिमंडल विस्तार के जश्नी माहौल पर तनाव की रेखाएं साफ नजर आईं.

हर काम तेज़ी से करने वाले प्रधानमंत्री ने नए मंत्रियों के बीच विभागों के बंटवारे में वक़्त लिया और उसकी विधिवत घोषणा रविवार को देर रात ही हो सकी.

इस बात की अटकलें भी लगती रहीं कि मोदी मंत्रिमंडल में 'सेना' के कोटे के एकमात्र मंत्री अनंत गीते नए घटनाक्रमों के बाद सरकार में रहेंगे या बाहर जाएंगे? फैसला दो-एक दिन के अंदर हो जाएगा.

फेरबदल

मोदी मंत्रिमंडल विस्तार मनोहर पर्रिकर

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मंत्रिमंडल विस्तार में चार कैबिनेट, तीन राज्यमंत्री(स्वतंत्र प्रभार) और चौदह राज्यमंत्रियों सहित कुल 21 नए चेहरे शामिल किए गए. इसके साथ ही कुछ पुराने मंत्रियों के विभागों में फेरबदल भी हुआ.

अब तक भारी-भरकम और अपनी पसंद का स्वास्थ्य मंत्रालय संभाल रहे दिल्ली के दिग्गज हर्षवर्धन की राजनीतिक हैसियत घटाते हुए उन्हें विज्ञान एवं तकनीकी मंत्रालय सौंपा गया.

उनकी जगह पहली बार मंत्रिमंडल में शामिल हुए जगतप्रकाश नड्डा को स्वास्थ्य मंत्री बना दिया गया.

कहा जाता है कि नड्डा के कथित सिफारिशी-ज्ञापन पर ही तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने भारतीय आर्युविज्ञान संस्थान(एम्स) के एक तेज-तर्रार निगरानी अधिकारी को संस्थान से हटाने का फैसला किया था. इसे लेकर विवाद छिड़ गया और हर्षवर्धन को अपना बचाव करना मुश्किल हो रहा था.

कायांतरण

मनोहर पर्रिकर, नरेंद्र मोदी

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दूसरा बड़ा बदलाव रेल मंत्रालय के प्रभार में हुआ है. मंत्रिमंडल में पहले से शामिल सदानंद गौड़ा को रेल मंत्रालय से हटाकर कानून मंत्रालय का प्रभार दिया गया और शिवसेना छोड़कर कुछ ही घंटे पहले भाजपा में शामिल हुए सुरेश प्रभु रेल मंत्री बनाए गए हैं.

पेशे से चार्टर्ड एकाउंटेंट प्रभु आर्थिक सुधारों और उदारीकरण के कट्टर समर्थक माने जाते हैं.

माना जा रहा है कि उनके रेल मंत्री बनने से भारतीय रेलवे का कायांतरण होगा और उसके विभिन्न उपक्रमों-क्षेत्रों में प्रस्तावित निजीकरण के अभियान में तेज़ी आएगी.

एक उल्लेखनीय बदलाव और दिखा. सूचना प्रसारण मंत्रालय का कामकाज भी अब वित्त मंत्री अरुण जेटली देखेंगे. अब तक यह मंत्रालय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर के पास था.

मोदी ने अपने एक अत्यंत भरोसेमंद और वरिष्ठ मंत्री को सूचना प्रसारण का प्रभार देकर इस बात का संकेत दिया है कि सोशल मीडिया के उभार और डिजिटाइजेशन के नए दौर में उन्हें और बेहतर 'मीडिया-प्रबंधन' की दरकार है.

कांग्रेस छोड़कर हाल ही में भाजपा में आए हरियाणा के जाट नेता चौधरी वीरेंद्र सिंह को भारी-भरकम ग्रामीण विकास मंत्रालय दिए जाने से भगवा-कुनबे में थोड़ी नाखुशी सी है.

चुनाव

नरेंद्र मोदी, उद्धव ठाकरे

माना जा रहा है कि यह फ़ैसला कुछेक राज्यों के भावी चुनावों के मद्देनज़र लिया गया. दिल्ली में जल्दी ही चुनाव होने हैं, जहां भाजपा को जाटों के समर्थन की दरकरार होगी.

लेकिन इस फ़ैसले से भाजपा के उस दावे की एक बार फिर पोल खुली कि वह अन्य पार्टियों से 'चाल, चरित्र और चेहरे' के स्तर पर अलग है या कि उसमें दलबदलुओं को नहीं, पार्टी के अनुशासित सदस्यों को महत्व दिया जाता है.

मोदी ने दिल्ली से सटे नोएडा के एक बड़े कारोबारी महेश शर्मा को राज्यमंत्री(स्वतंत्र प्रभार) बनाया है. शर्मा निजी अस्पतालों की श्रृंखला के मालिक हैं. वह पहली बार संसद के लिए चुने गए.

लेकिन पार्टी के सबसे मुखर मुस्लिम चेहरे और अनुभवी नेता मुख्तार अब्बास नकवी को जूनियर ही रखा गया, उन्हें अल्पसंख्यक मामलों का राज्यमंत्री बनाया गया.

अनुभव

मोदी मंत्रिमंडल विस्तार साध्वी निरंजन ज्योति

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मंत्रिमंडल की संरचना में इस तरह की कई और भी विसंगतियां दिखाई देती हैं.

राजनीति और प्रशासन, दोनों ही क्षेत्रों की नौसिखुआ स्मृति ईरानी सरकार गठन के समय देश की मानव संसाधन मंत्री बनी थीं लेकिन मंत्रिमंडल विस्तार में स्वतंत्र प्रभार के साथ राज्यमंत्री बनाए गए राजीव प्रताप रूडी और बंडारू दत्तात्रेय जैसों के अनुभव और सांगठनिक योगदान को वाजिब तवज्जो नहीं मिली. वे कैबिनेट दर्जा नहीं पा सके.

मोदी मंत्रिमंडल में राजनीतिक-प्रशासनिक रूप से दक्ष और अनुभवी लोगों की कमी गिनाई जाती रही है. राजनाथ सिंह, जेटली, सुषमा, वेंकैया और रविशंकर को छोड़ दें तो मोदी मंत्रिमंडल के ज्यादातर सदस्य अपेक्षाकृत अनुभवविहीन हैं.

इस लिहाज से दो प्रमुख चेहरों-मनोहर पर्रिकर और सुरेश प्रभु को सरकार में शामिल किया जाना महत्वपूर्ण है. दोनों समर्थ और अनुभवी हैं. दो दिन पहले तक गोवा के मुख्यमंत्री रहे पर्रिकर को देश का रक्षा मंत्री बनाया गया.

सामाजिक संतुलन

मोदी मंत्रिमंडल विस्तार गिरिराज किशोर

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इस विस्तार में मोदी ने आरएसएस और अपनी निजी पसंद के अलावा सामाजिक-संतुलन को भी तवज्जो दी है.

हिन्दी-पट्टी और पश्चिमी क्षेत्र के पिछड़े और हाशिए के अन्य समुदायों से कई नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह देकर यूपीए-2 के मुक़ाबले उन्होंने बेहतर 'सोशल इंजीनियरिंग' का परिचय दिया है. यह फैसला चुनावी-गणित से प्रेरित है.

यूपी से संघ की पसंद और अत्यंत पिछडे समुदाय की निरंजन ज्योति, एक समय राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के सर्वाधिक करीबी रहे पाटलिपुत्र के सांसद रामकृपाल यादव, चंद्रपुर(महाराष्ट्र) के सांसद हंसराज अहिर और होशिय़ारपुर(पंजाब) के सांसद विजय सांपला जैसे कई ऐसे नेताओं को जगह मिली है. निरंजन ज्योति यूपी में भगवा-ब्रिगेड का आक्रामक महिला चेहरा रही हैं.

बिहार के गिरिराज सिंह को अपनी अंध-मोदी-भक्ति का इनाम मिला गया. वे राज्यमंत्री बने हैं. लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कहा था कि जो लोग मोदी के आलोचक हैं, उन्हे भारत छोड़कर पाकिस्तान चले जाना चाहिए.

ले-देकर मंत्रिमंडल विस्तार से उठे ऐसे कुछ सवाल और विवाद फिलहाल बरक़रार हैं. सरकार सिर्फ अपने अच्छे क़दमों से ही इनका माकूल जवाब दे सकती है.

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