'अभी काठ नहीं हुई भाजपा की हांडी'

महाराष्ट्र में नरेंद्र मोदी

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    • Author, मधुकर उपाध्याय
    • पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

लोकसभा चुनाव के बाद पहली बार बड़े स्तर पर सभी सियासी दलों को महाराष्ट्र और हरियाणा में होने वाले विधानसभा चुनाव में कड़े इम्तिहान से गुजरना पड़ रहा है.

चुनाव की गहमागहमी में महाराष्ट्र में प्रमुख राजनीतिक दल बिना गठबंधन के उतर रहे हैं.

कोई प्रधानमंत्री उपचुनाव में प्रचार नहीं करेगा इस नियम को गांठ बांध नरेंद्र मोदी चुनाव प्रचार में नहीं गए. इसका खामियाजा पार्टी को उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, कर्नाटक और उत्तराखंड में चुकाना पड़ा.

अब महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनाव प्रचार में भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री ने हुदहुद-बुदबुद की फ़िक्र किए बिना अंधाधुंध रैलियां की हैं.

मोटे तौर पर हरियाणा और महाराष्ट्र में अब तस्वीर क्या होगी? चुनाव परिणाम किसके पक्ष में जाएगा? किसको फायदा होगा और किसको नुकसान?

पढिए मधुकर उपाध्याय का आकलन:

भारतीय राजनीति अलिखित पर चलती है. इसी से संभावनाएं बनी रहती हैं. इसी से लोकतंत्र बचा रहता है. केवल लिखत-पढ़त का मामला हो तो देश भेड़-बकरियों का झुंड न बन जाए?

सब वैसा रहे, जैसा किताबों में दर्ज है. सब खूंटे से बंधे रहें. खूंटा तोड़ने-उखाड़ने की उम्मीद शून्य हो जाए.

अलिखित वाले चाय बेचते रहें, लिखित वाले उस्ताद बन जाएं. कुछ हुआ नहीं कि किताब खोलकर बैठ गए- धर्मग्रंथ से लेकर संविधान तक.

दिक्कत तब होती है जब कोई अलिखित वाला लिखित के झांसे में आ जाता है. यही भारतीय जनता पार्टी और उसके धाराप्रवाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुआ.

खुले आसमान में कनकौवा उड़ा रहे थे कि एक अलिखित को लिखित माना और धड़ाम से नीचे आ गए. पतंग कट गई.

नरेंद्र मोदी का महाऱाष्ट्र में चुनाव प्रचार

अलिखित सिद्धांत यह था कि कोई प्रधानमंत्री उपचुनाव में प्रचार नहीं करेगा, ख़ुद का उपचुनाव छोड़कर.

मोदी इसे पत्थर की लकीर मान बैठे. नहीं गए प्रचार करने. नतीजा उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, कर्नाटक और उत्तराखंड ने देखा.

पांच महीने पुरानी संभावनाओं ने भाजपा से मुंह मोड़ लिया. दूसरी ओर देखने लगीं.

मोदी का आभामंडल

बात बिगड़ रही थी लेकिन प्रधानमंत्री के फ़िरकी-डॉक्टर निराश नहीं थे. उन्होंने गेंद हवा में घुमा दी, जैसा एक दूसरे नरेंद्र, हिरवानी ने पहले किया था.

बिना कहे कहा गया कि उपचुनावों का संदेश साफ़ है. मोदी हट जाएं तो भाजपा-भट्ट झांझ-मजीरा बजाते रह जाएंगे. ताल-सुर से ख़ारिज. भजन करने लायक़ भी नहीं.

कहा नहीं गया लेकिन मतलब यही था कि पार्टी जिस आभामंडल से प्रकाशित है, उसकी उपेक्षा संभव नहीं है.

प्रधानमंत्री को अपने इस आभामंडल की क्षमता का अनुमान है. इसलिए उन्होंने महाराष्ट्र और हरियाणा के विधानसभा चुनावों को साधारण नहीं माना.

राजनीतिक गणित

हरियाणा, लोकहित पार्टी

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प्रधानमंत्री हुदहुद-बुदबुद की फ़िक्र किए बिना घूमते रहे. दस दिन में उनका आभामंडल रैलियों में तैंतीस बार चमका और लोग चमत्कृत हुए.

आभामंडल अपनी जगह, राजनीतिक गणित भी यही इशारा कर रहा था कि सब ठीक-ठाक है. ऐसा कि आभामंडल प्रभावित नहीं होगा बल्कि उसमें दो रत्न और जुड़ सकते हैं.

महाराष्ट्र में पंद्रह और हरियाणा में दस साल की कांग्रेसनीत सरकारों को अपने किए का ख़ामियाज़ा भी भुगतना ही था.

और यह भी एक तथ्य है कि उपचुनाव से दीगर, मोदीमय भाजपा की हांडी अभी काठ नहीं हुई है. काठ होने तक जितनी बार चूल्हे पर चढ़ जाए, अच्छा है.

असली परीक्षा

शरद पवार, नेशनल कांग्रेस पार्टी

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हालांकि पिछला अनुभव बहुत अच्छा नहीं रहा, भारतीय जनता पार्टी अपने एकमेव आभामंडल की चमक से इस क़दर आश्वस्त है कि उसने महाराष्ट्र और हरियाणा में अपनी बैसाखियां हटा देने का फ़ैसला किया.

अगर चमक वाक़ई चमत्कारिक है तो उसकी रोशनी में ख़ुद क्यों न चमकें? दूसरे उसका फ़ायदा क्यों उठाएं?

इस प्रयोग और आभामंडल की चमक ही दोनों राज्यों के विधानसभा चुनावों की असल परीक्षा हैं.

फ़िरकी डॉक्टर और समाचार चैनलों के प्रवक्ता-उपभोक्ता तक़रीबन निश्चिंत हैं कि इन चुनावों में कांग्रेस की नाव डूबने ही वाली है. ज़मीनी हक़ीक़त भी यही इशारा कर रही है.

सियासी जमातें

कृपाशंकर सिंह, कांग्रेस, महाराष्ट्र

लगता है कि कुल मिलाकर भाजपा और मोदी के लिए यह पायथागोरस का प्रमेय है, जिसके अंत में लिखा है ‘इति सिद्धम.’

क्योंकि जो असल विरोधी हो सकता था, है ही नहीं. उसने अखाड़ा छोड़ा भले न हो, हांफना दूर से सुनाई पड़ता है. ऐसे बेदम, बेसुध, परेशानहाल से क्या डरना? डर, जो है, उनसे है, जो कल तक अपने थे.

महाराष्ट्र में शिवसेना और हरियाणा में भारतीय राष्ट्रीय लोकदल यानी कि आईएनएलडी या इनेलो दोनों सियासी जमातें इन राज्यों में अपना प्रभाव क्षेत्र रखती हैं, जहां भाजपा उनके बिना कभी चली भी नहीं.

हरियाणा में उसका सबसे अच्छा प्रदर्शन दहाई के आंकड़े से नीचे रहा है. छह सीटें.

भाजपा के पक्ष में

हरियाणा के मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला

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इमेज कैप्शन, जमानत पर रिहा हरियाणा के पूर्व मुख्य मंत्री चौटाला जोर शोर से चुनाव प्रचार किया.

महाराष्ट्र में शिवसेना के अलावा शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी है और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना भी, जो फ़िलहाल, घरेलू तौर पर, शिवसेना की ओर झुक गई है.

जो तस्वीर अब दिखती है, मोटे तौर पर भाजपा के पक्ष में है. नुक़सान का सवाल ही नहीं है, देखना सिर्फ़ यह है कि उसे फ़ायदा कितना होता है.

स्पष्ट बहुमत नहीं मिला तो आगे का गणित पवार और चौटाला तय न करें, यह मोदी की सबसे बड़ी जीत हो सकती है.

पिछले दस दिन ख़ुद को और पार्टी को राष्ट्रहित से ऊपर रखने वाले मोदी हाथ में सुदर्शन चक्र लिए घूम रहे थे. गला बैठ गया, आवाज़ भर्रा गई. थकान भी होगी.

लेकिन मोदी थक जाएं तो मोदी ही क्यों रहें! अब फ़ुरसत हुई है कि हुदहुद से त्रस्त विशाखापट्नम देख आएं. ऊपर से. सो जा रहे हैं.

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