एक हादसा, 40 मौतें, वर्षों बाद कार्रवाई नहीं

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- Author, आलोक प्रकाश पुतुल
- पदनाम, रायपुर से बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए
छत्तीसगढ़ के कोरबा में वेदांता के निर्माणाधीन पावर प्लांट की चिमनी हादसे के पांच साल पूरे हो गए हैं लेकिन इस दुर्घटना में मरे लोगों को अब भी इंसाफ़ का इंतज़ार है.
23 सितंबर 2009 को वेदांता बालको के पावर प्लांट की 240 मीटर ऊंची चिमनी भरभरा कर गिर गई थी. इस हादसे में 40 मज़दूरों की मौत हो गई थी.
पांच साल बाद आज भी इन मज़दूरों की मौत के लिए ज़िम्मेदार ठहराए गए लोगों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं हुई है.
पुलिस ने इस मामले में बालको वेदांता, चीन की ठेका कंपनी शैनदोंग इलेक्ट्रिक पावर कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन यानी सेपको और भारतीय ठेका कंपनी जीडीसीएल के अधिकारियों के ख़िलाफ़ रिपोर्ट दर्ज की.
मामले की न्यायिक जांच भी हुई, लेकिन कुछ हुआ नहीं.
कोई कार्रवाई नहीं
हादसे में मारे गए कई मज़दूरों के परिवारों को आधा-अधूरा मुआवजा ही मिला और वे आज भी बिहार से लेकर छत्तीसगढ़ के कोरबा में वेदांता और सरकारी दफ्तरों में अपनी चप्पलें घिस रहे हैं.
बिहार के छपरा ज़िले के रघुवीर कोइरी कहते हैं, “मैं अपने 24 साल के जवान बेटे हरिशंकर की मौत के बाद से मुआवजे के लिए दौड़-भाग कर रहा हूं. जून में भी गया था लेकिन अब तक मुआवजा नहीं मिला.”

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लेकिन बालको वेदांता के संवाद प्रमुख बीके श्रीवास्तव का दावा है कि मज़दूरों को मुआवज़ा दे दिया गया और कंपनी ने दो-दो बार उन परिवारों का हालचाल लिया और उन्हें नौकरी की भी पेशकश की.
श्रीवास्तव कहते हैं, "एक परिवार को छोड़ कर कोई भी नौकरी के लिए नहीं आया.”
लेकिन इस हादसे में मारे गए रतनकुमार सिंह के भाई राजेश सिंह कहते हैं, “काहे नहीं करेंगे नौकरी. कंपनी वाला हमनी के नौकरी के लिए कहा था लेकिन आज तक नौकरी दिया नहीं. कउन बुड़बक नौकरी के लिए मना करेगा?”

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छपरा के ही आसिफ़ हुसैन की मां को शिकायत है कि घर का एकमात्र कमाऊ बेटे आसिफ़ की मौत के बाद दो जून की रोटी भारी पड़ रही है. उनका कहना है कि कंपनी की ओर से मात्र 415 रुपये का पेंशन मिलती है.
न्याय का इंतज़ार
चिमनी हादसे में मज़दूरों के परिवार वालों की मदद करने वाले फोरम फॉर फास्ट जस्टिस के संयोजक प्रवीण पटेल कहते हैं, “वेदांता कंपनी लंदन की है और इस कंपनी के ख़िलाफ़ ब्रिटिश क़ानून के तहत कार्रवाई भी होनी चाहिए और लोगों को उसी क़ानून के तहत मुआवज़ा भी मिलना चाहिए. संकट ये है कि राज्य और केंद्र सरकार वेदांता के मामले में दोस्ताना रुख अपनाए हुए हैं.”
अवैध तरीके से बन रही जिस चिमनी में हादसा हुआ था, वह फिर से बन कर तैयार हो गई है और 1200 मेगावाट के पावर प्लांट का काम अपने अंतिम चरण में है.

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न्यायिक जांच आयोग की सिफारिशें अदालत में हैं और पुलिस ने जिन 13 लोगों को जिम्मेदार माना था, वह रिपोर्ट भी. जिन लोगों पर आरोप लगे थे उनमें से कई ने बालको वेदांता कंपनी छोड़ दी है. इस घटना से संबंधित तीन चीनी अधिकारी अपने देश लौट गए हैं.
लेकिन जो 40 मज़दूर अपने घरों को लौट नहीं पाए, उनको परिजन अभी भी न्याय की उम्मीद में हैं.
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