एचएमटी की टिक-टिक सहेजने की कोशिश

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- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
जब अतीत की यादें आती हैं, तो दर्द भी पैदा करती हैं. यही वजह है कि भारी संख्या में लोग एचएमटी घड़ियों की दुकानों के सामने क़तार लगाए लगाए हुए हैं और एक दो नहीं बल्कि कई घड़ियाँ ख़रीद रहे हैं, ख़ासकर हाथ से चाबी भरने वाली घड़ियाँ.
बेंगलुरू में पिछले दो दिनों में ही एचएमटी घड़ियों की बिक्री में तीन से चार गुना बढ़ोत्तरी हो गई है.
<link type="page"><caption> कैसी है पहली ऐपल स्मार्ट वॉच?</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2014/09/140909_smartwatch_apple_tb.shtml" platform="highweb"/></link>
यह वही शहर है जहां 53 वर्ष पहले कभी सार्वजनिक क्षेत्र की इस कंपनी ने अपनी पहली फ़ैक्ट्री लगाई थी.
और सही मायनों में यह तब तक 'देश का वक़्त' बनी रही, जब तक निजी कंपनियों के आगे इसने हथियार नहीं डाल दिए.
एचएमटी घड़ियाँ इकट्ठा करने वाले इतिचंदा पोनप्पा ने बीबीसी हिंदी को बताया, ''लोगों को जागरूक करने के लिए कि एचएमटी अभी ज़िंदा है, तीन सौ सदस्यों वाला एक फ़ेसबुक पेज बनाया गया था, जिसमें ब्रिटेन के भी सदस्य थे. लोग पहले ही मान बैठे थे कि यह कंपनी बंद हो चुकी है.''
चाहने वालों को झटका

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इसीलिए, जब केंद्र सरकार ने पिछले हफ़्ते इसे बंद करने का निर्णय लिया तो किरण बाबू जैसे दुकानदार में भी ग्लानि पैदा हो गई.
बाबू कहते हैं, ''जब मैंने अख़बारों में ख़बर पढ़ी तो मुझे बहुत दुख हुआ. हमने बीते सालों में एक भी एचएमटी घड़ी नहीं ख़रीदी थी. मैंने अपनी दुकान बंद की और मैं चाबी से चलने वाली <link type="page"><caption> घड़ी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2014/02/140226_wrist_blog_tb.shtml" platform="highweb"/></link> खोजने निकल पड़ा. एक घड़ी के लिए मैंने 200 रुपए अधिक दिए.''
पोनप्पा के पास 650 एचएमटी घड़ियों का कलेक्शन है जिसमें नब्बे प्रतिशत हाथ से चाबी वाली घड़ियाँ हैं.
कुछ और घड़ियाँ पाने की चाहत में वह बेंगलुरू के केंद्र में स्थित एचएमटी शोरूम के आस-पास मंडरा रहे थे.
चाबी वाली घड़ियों में ऐसा क्या है?
एचएमटी घड़ियों के शौकीन

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पोनप्पा कहते हैं, ''एक <link type="page"><caption> घड़ी</caption><url href="www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/01/130117_mobile_wrist_watch_sdp.shtml" platform="highweb"/></link> की अहमियत समय से ज़्यादा होती है. ऐसी एक घड़ी में 120 पुर्ज़े होते हैं. आपने यदि इन्हें अलग कर दिया तो फ़िर आप इन्हें जोड़ नहीं पाएंगे. एक आम आदमी के लिए यह बहुत ही जटिल होता है. यही इसकी ख़ासियत है. आपको इसकी चाबी 12 बार घुमानी पड़ती है और यह 24 घंटे चलती रहती है. इसकी टिक-टिक-टिक सुनना भी बहुत दिलचस्प होता है.''
वह बहुत दुखी हैं, ''मुझे उन लोगों पर बहुत तरस आता है जो बहुत ही महंगी घड़ियाँ ख़रीदते हैं. एचएमटी घड़ियों को मैं उनकी सादगी के लिए पसंद करता हूं.''
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