बाढ़ से पता चला सरकार कैसे काम करती है

कश्मीर में बाढ़

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    • Author, सौतिक बिस्वास
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, नई दिल्ली

भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने भारत के एक निजी टीवी न्यूज़ चैनल से कहा कि उनकी सरकार को बाढ़ की विभीषिका का अंदाज़ा नहीं था और प्रशासन इससे निपटने के लिए तैयार नहीं था.

राज्य में बाढ़ की वजह से 200 से अधिक लोग मारे गए हैं. बाढ़ का पानी भले ही उतरने लगा है लेकिन राज्य में अभी भी 40,000 लोग फंसे हुए हैं जहां खाने-पीने की बहुत दिक़्क़त हो गई है. राहत दलों को लोगों के ग़ुस्से का सामना करना पड़ा है और कहीं-कहीं उन पर हमला भी किया गया है.

उमर सरकार की कार्यप्रणाली

एनडीटीवी को दिए साक्षात्कार में उमर अब्दुल्लाह ने जो बातें कहीं, उससे आपात स्थिति में उनकी सरकार की कार्यप्रणाली के बारे में कुछ रोचक जानकारी मिलती है.

उमर अब्दुल्लाह ने माना कि बाढ़ की स्थिति में पहले चौबीस घंटे में उनकी सरकार कुछ नहीं कर पाई क्योंकि ऐसा लगा जैसे कोई सरकार ही नहीं है.

उन्होंने कहा था, ''मेरी कोई सरकार नहीं थी. मैंने अपने कमरे में छह लोगों के साथ कोशिश शुरू की. मेरा सचिवालय, पुलिस मुख्यालय, नियंत्रण कक्ष, अग्निशमन सेवाएं, अस्पताल सारा बुनियादी ढांचा पानी के नीचे था.''

वे कहते हैं, ''मेरे पास सेलफ़ोन नहीं था, कनेक्टिविटी नहीं थी. मैं अब जाकर मंत्रियों और अधिकारियों से सम्पर्क कर पा रहा हूं. आज मैं उन मंत्रियों से मिला जो बाढ़ में बह गए थे.''

चेतावनी की अनदेखी

कश्मीर में बाढ़

आलोचना इस बात की हो रही है कि मौसम विभाग ने भारी बारिश की चेतावनी दी थी लेकिन उमर अब्दुल्लाह की सरकार ने इस पर अमल नहीं किया और लोगों को सुरक्षित जगहों पर समय रहते नहीं पहुंचाया.

हुआ ये भी कि अधिकारी और मंत्री, सरकारी मशीनरी भी बाढ़ में फंस गई और किसी काम की नहीं रही.

कुछ ख़बरों में ये भी कहा गया है कि पहले मंत्रियों और उनके परिवारों को बचाया गया और उन्हें जम्मू तथा दिल्ली रवाना कर दिया गया. इससे लोगों का ग़ुस्सा फूट पड़ा.

सरकार की विफलता

उमर अब्दुल्ला

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मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने रविवार को ट्वीट किया था कि ''घबराने की ज़रूरत नहीं है, हम आप तक पहुंचेंगे, मैं वादा करता हूं.''

इस पर राइज़िंग कश्मीर के संपादक शुजात बुख़ारी कहते हैं, ''ये उमर सरकार की पूरी तरह से विफलता रही. बाढ़ के एक हफ़्ते बाद भी श्रीनगर जैसी जगह में भी लोग भोजन-पानी के बिना फंसे हुए हैं.''

बाढ़ के शुरुआती दिनों में राइज़िंग कश्मीर ने एक संपादकीय भी छापा था जिसमें कहा गया था कि सरकार भले ही कह रही है कि वो स्थिति से निपटने के लिए तैयार है लेकिन ज़मीन पर ऐसी कोई तैयारी नज़र नहीं आ रही थी.

राज्य में जल्द ही विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं. लोगों में सरकार के ख़िलाफ़ ग़ुस्सा है. मौजूदा स्थिति में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह और उनकी नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी के लिए लोगों को अपनी ओर खींचना अब आसान नहीं होगा.

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