कश्मीर: त्रासदी जिसने लोगों को एक किया

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- Author, शुजात बुख़ारी
- पदनाम, श्रीनगर से वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
चरमपंथ और उससे जुड़ी घटनाओं की वजह से अक्सर सुर्ख़ियों में रहने वाला कश्मीर बीते कुछ दिनों से बाढ़ की वजह से चर्चा में है. इनके कारण कश्मीर की एक अलग तस्वीर उभरकर सामने आई है जो कई मायनों में बहुत ख़ास है.
पढ़ें शुजात बुख़ारी का पूरा विश्लेषण
कश्मीर में आई बाढ़ की वजह से तबाही के अलावा एक बात और सामने आई है. ये है एकजुटता, जो असाधारण है.
हर कोई अपने घर से निकलकर पानी से भरी सड़कों पर उतर रहा है और उन लोगों की मदद करने की कोशिश कर रहा है जो इस आपदा से प्रभावित हुए हैं.
युवक इस मामले में आगे हैं जो समूह बनाकर काम कर रहे हैं. जहां नाव नहीं हैं, वहां इन युवकों ने ज़रूरतमंदों तक पहुंचने का एक अलग ही तरीक़ा खोज निकाला है.
वे ड्रम, ट्रकों के ट्यूब, लकड़ी के पानी पर तैरने वाले टुकड़ों की मदद से लोगों को बचाने में जुटे हैं.
'सच्चे हीरो'
शायद यही वजह है कि एक वरिष्ठ स्तंभकार ज़ाहिद जी मोहम्मद ने फ़ेसबुक पर लिखा, ''ये हमारे सच्चे हीरो हैं. मैं आज ये बात पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूं कि हम किसी भी आपदा से उबर सकते हैं.''

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इस एकजुटता का एक और उदाहरण सज्जाद शेख़ हैं जो मदद के लिए ख़ुद आगे आए और अब तक 500 से अधिक लोगों को बचा चुके हैं.
वो दिल्ली से साढ़े तीन लाख रूपये ख़र्च करके एक बोट ख़रीदकर लाए और लोगों को बचाने के लिए हर दिन 12 घंटे से अधिक काम कर रहे हैं.
सज्जाद बताते हैं कि उन्होंने इस बोट को ख़रीदने के लिए क़र्ज़ तक लिया.
स्थानीय लोगों की भूमिका

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नेशनल डिज़ास्टर रेसपोंस फ़ोर्स यानी एनडीआरएफ़ ने भी लोगों को बचाने में अहम भूमिका निभाई और स्थानीय लोगों ने उनका भरपूर साथ दिया.
बाढ़ से बेघर हुए लोगों के लिए लंगर चलाए जा रहे हैं. सामूहिक रसोईघर बनाए गए हैं. ये सब कुछ मस्जिदों के अहातों में हो रहा है जहां ज़रूरतमंदों के लिए शामियाने लगाए गए हैं. मस्जिदों के अहातों से बाहर भी ऐसे इंतज़ाम देखे जा सकते हैं.
दिन निकलने के साथ ही दक्षिण और उत्तर कश्मीर में बाढ़ से बचे गांवों के लोग मदद के लिए उन इलाक़ों में निकल पड़ते हैं जहां लोग बाढ़ की आपदा झेल रहे हैं.
चिकित्सा शिविर

मरीज़ों के लिए कई चिकित्सा शिविर लगाए गए हैं. बड़े अस्पतालों की ग़ैर-मौजूदगी में ये शिविर राहत में अहम भूमिका निभा रहे हैं.
श्रीनगर के तीन प्रमुख अस्पतालों में पानी भरा है, इस वजह से वो किसी काम के नहीं रहे. ऐसे में निजी अहमद अस्पताल ज़रूरतमंदों को फ़ौरी तौर पर चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करा रहा है.
अस्पताल के मालिक डॉक्टर आसिफ़ खांडे कहते हैं कि प्रशासन ने हालात के प्रति असंवेदनशील रवैया दिखाया है.
लेकिन फिर भी आम लोग जिस तरह से लोगों की मदद कर रहे हैं, उससे ये आशा जगी है कि कश्मीर घाटी बाढ़ की विभीषिका से पैदा हुई चुनौती से निपट लेगी.
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