संसद में कामकाज का माहौल बदल रहा है?

राज्यसभा के कामकाज के दौरान एक दृश्य

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16वीं लोकसभा के दूसरे सत्र के खत्म होने के बाद आए आंकड़ों को खंगालें तो बीते दशक से हालात बदले हुए लगते हैं.

लोकसभा ने उपलब्ध समय से ज्यादा काम किया जबकि अमूमन होने वाले शोर-शराबे से सदन का वक्त भी पहले के तुलना में कम बर्बाद हुआ.

पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च की ओर से जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि कानून बनाने और संसद के सामने लाए गए मुद्दों पर बहस करने में पिछली सरकारों की तुलना में ज्यादा वक्त दिया गया.

रिपोर्ट की ख़ास बातें पढ़िए:

शोर शराबा कम हुआ

रामविलास पासवान

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  • संसद के दोनों ही सदनों ने उपलब्ध वक्त से ज्यादा समय तक काम किया. हालांकि राज्यसभा में कामकाज में अधिक बाधा डाली गई.
  • इसकी वजह ये हो सकती है कि लोकसभा में सरकार के सांसदों की तादाद ज्यादा है जबकि राज्यसभा में विपक्षी खेमा गिनती के लिहाज़ से ज्यादा है.
  • पिछले दस सालों में इस संसद सत्र में दूसरी बार सबसे अधिक काम हुआ है. 2005 के मॉनसून सत्र में संसद ने उपलब्ध समय का 110 फ़ीसदी इस्तेमाल किया था.

अबाध प्रश्नकाल

बजट सत्र के दौरान लोकसभा का एक दृश्य

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  • संसद का हर दिन प्रश्नकाल के साथ शुरू हुआ. संसद के कामकाज के इस हिस्से में सांसद सरकार के मंत्रियों से सवाल पूछते हैं.
  • हालांकि बजट सत्र के दौरान लोकसभा का प्रश्नकाल राज्यसभा की तुलना में बेहतर रहा. निर्धारित सवालों में से 24 फीसदी के मंत्रियों ने मौखिक जवाब दिए.
  • 2004 के बाद से सभी संसद सत्रों के दौरान प्रश्नकाल के लिए ये सबसे बेहतर वक्त रहा.

कानून और बहस

नवनिर्वाचित लोकसभा उपाध्यक्ष एम थम्बीदुरई को बधाई देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

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  • 16वीं लोकसभा के दूसरे सत्र के कामकाज का 33 फीसदी वक्त बजट पर बहस करने में दिया गया.
  • 14वीं और 15वीं लोकसभा के पहले बजट सत्र के दौरान उपलब्ध समय का 36 फीसदी और 50 फीसदी वक्त बजट पर बहस करने में लगाया गया.
  • 12 फीसदी वक्त कानूनों पर बहस करने में दिया गया. पिछली दोनों लोकसभाओं के पहले बजट सत्रों की तुलना में ये कहीं बेहतर था.
  • इस सत्र में लोकसभा में छह विधेयक पारित किए गए जिनमें जजों की नियुक्ति, तेलंगाना के गठन और ट्राई में संशोधन से जुड़े विधेयक थे. नृपेंद्र मिश्र को प्रधान सचिव बनाने की राह आसान करने के लिए कानून में संशोधन किया गया.

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