सांसदों की 'रोज़ेदार से ज़बरदस्ती' पर बवाल

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- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
दिल्ली स्थित महाराष्ट्र सदन में तैनात एक मुस्लिम कर्मचारी को रोज़े की हालत में शिव सेना के सांसदों के ज़रिए कथित तौर पर ज़बरदस्ती रोटी खिलाने का मामला सामने आया है.
ये घटना इसी महीने की 17 तारीख़ की है. एक निजी चैनेल की ओर से जारी फुटेज में शिव सेना के सांसद राजन विचारे को कैंटीन के मैनेजर अरशद के मुँह में रोटी ठूंसते हुए दिखाया गया है.
शिव सेना के क़रीब 11 सांसदों ने उस दिन कथित तौर पर कैंटीन में जमकर हंगामा किया और तोड़फोड़ भी की.
उन पर आरोप है कि उन्होंने केटरिंग स्टाफ़ के मैनेजर मोहम्मद अरशद को जबरन रोटी खिला दी जिससे उनका रोज़ा टूट गया और धार्मिक भावनाएं आहत हुईं.
हालांकि शिवसेना ने ऐसी किसी भी घटना से इनकार किया है.
संसद में हंगामा
महाराष्ट्र की सरकार ने महाराष्ट्र सदन की कैंटीन में हुई तोड़ फोड़ की घटना के बाद सदन के प्रबंधक को हटा दिया है.
इस कैंटीन का संचालन इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज़्म कॉर्पोरेशन यानी आईआरसीटीसी द्वारा किया जाता रहा है जिसने तत्काल प्रभाव से अपनी सेवाओं को बंद कर दिया है.
हालांकि सदन के प्रबंधक सुहास मामदपुरकर ने बीबीसी से बात करते हुए कहा है कि उन्हें 'बलि का बकरा' बनाया गया है.'
इस मामले को लेकर लोकसभा में सदस्यों ने जमकर हंगामा किया जिसको देखते हुए अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सदन को स्थगित कर दिया.

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लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सदन को पूरी घटना जानने का अधिकार है. जबकि संसदीय कार्य मंत्री वेंकैया नायडू ने लोकसभा की अध्यक्ष सुमित्रा महाजन से कहा कि जब तक मामले की पूरी जानकारी नहीं मिल जाती, तब तक इस विषय को सदन में ना उठाया जाए.
महाजन ने आश्वासन दिया कि वो शून्यकाल में मामले पर चर्चा कराएंगी मगर सदन में विपक्ष के सदस्य हंगामा करते रहे.
शिवसेना का इनकार
इस बारे में शिव सेना के सांसद संजय राउत ने कहा, "इस तरह के आरोप पूरी तरह निराधार हैं. यह पूरी तरह ग़लत है. इसे घटना को जो लोग धार्मिक रंग दे रहे हैं. उनको सबक सिखाया जाना चाहिए."
शिव सेना के सांसद अरविन्द सावंत ने घटना से इंकार करते हुए कहा कि महाराष्ट्र सदन में कुव्यवस्था के ख़िलाफ़ उन्होंने ज़रूर आवाज़ उठाई मगर किसी के मुँह में जबरन रोटी नहीं ठूंसी गई.
इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज़्म कार्पोरेशन यानी आईआरसीटीसी के उप महाप्रबंधक शंकर मल्होत्रा ने बीबीसी को बताया कि उनका विभाग महाराष्ट्र सदन में कैंटीन चलाता था.
मल्होत्रा का कहना था कि महाराष्ट्र सदन के स्थानीय आयुक्त ने पत्र लिखकर इस घटना के सम्बन्ध में माफ़ी मांगी है.
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