'वोट देने वाले को बिजली, न देने वाले की कटौती'

भारत बिजली संकट
    • Author, अतुल चंद्रा
    • पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, लखनऊ से, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए

उत्तर प्रदेश में सत्ताधारी समाजवादी पार्टी ने इस बात से इनकार किया है कि राजनीतिक कारणों से वाराणसी में बिजली कटौती की जा रही है जबकि आज़मगढ़ को 24 घंटे बिजली दी जा रही है.

लेकिन वाराणसी दक्षिण से भारतीय जनता पार्टी के विधायक श्यामदेव रॉयचौधरी इसके पीछे हालिया चुनाव परिणामों को बता रहे हैं जिनके अनुसार वाराणसी में भाजपा के नरेंद्र मोदी की जीत हुई जबकि आज़मगढ़ में समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव 63000 मतों से चुनाव जीते हैं.

जानकार मानते हैं कि राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण ज़िलों में बिना किसी बाधा के बिजली मिलना उत्तर प्रदेश के लिए कोई नई बात नहीं है.

यदि समाजवादी पार्टी की सरकार इटावा, मैनपुरी, कन्नौज, जो यादव परिवार के चुनावी क्षेत्र हैं, वहां सुचारू रूप से बिजली देने का इंतज़ाम करती है, तो बहुजन समाज पार्टी अपने बड़े नेताओं के क्षेत्रों में 24 बिजली आपूर्ति का इंतज़ाम करती रही है.

प्रदेश में इस मामले में हालात कुछ इस तरह के रहे है कि कि बिजली आपूर्ति के इस राजनीतिकरण पर इलाहाबाद हाई कोर्ट तक ने टिप्पणी की. अपने जुलाई, 2013 के आदेश में उसने इसे असंवैधानिक करार दिया था.

भेदभाव

लोगों की माने तो बिजली आपूर्ति का राजनीतिक पहलू वाराणसी और आजमगढ़ में विशेषकर देखने को मिल रहा हैं.

आजमगढ़ को उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन ने अनाधिकारिक रूप से अब 24 घंटे, बिना किसी कटौती के, बिजली आपूर्ति शुरू कर दी है.

चुनाव से पहले आजमगढ़ में सिर्फ 14-15 घंटे बिजली आती थी.

दूसरी ओर वाराणसी में, जहां की जनता ने नरेंद्र मोदी को भारी मतों से जिताया, विद्युत आपूर्ति में अभी तक पांच घंटों की घोषित कटौती हो रही थी. पूर्वांचल विद्युत उत्पादन निगम के तकनीकी निदेशक एम एल शर्मा के अनुसार अब यह कटौती सुबह 8 बजे से 10 बजे तक और रात में 10 बजे से 12 बजे तक हो रही है.

इससे पहले दिन में भी 2.15 बजे से 3.15 बजे तक आपूर्ति ठप रहती थी.

लेकिन वाराणसी के लोगों का कहना है कि अघोषित कटौती कब होगी और कितनी देर के लिए होगी, कुछ नहीं कहा जा सकता.

समाजवादी पार्टी

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इस गर्मी में जब तापमान 44 - 45 डिग्री चल रहा है, बिजली की इस कटौती से वाराणसी की जनता तो परेशान है ही, साथ में उद्योग पर भी इसका असर पड़ रहा है.

रामनगर औद्योगिक क्षेत्र के अध्यक्ष आरके चौधरी कहते हैं, "बिजली की समस्या अवर्णनीय है. हाल बेहाल है. बिजली कब आएगी और कब काट दी जाएगी कुछ पता नहीं रहता है. यदि घोषित कटौती चार घंटे की है तो अघोषित कटौती आठ घंटे की होती है. उद्योग तो भगवान भरोसे है."

एमएल शर्मा का कहना है कि मौसम के चलते मांग बढ़ी है और कहीं-कहीं तकनीकी कारणों से आपूर्ति रुक जाती है.

आरके चौधरी को शिकायत है कि प्रदेश के पावर कॉर्पोरेशन में अधिकारियों की कमी नहीं है लेकिन फिर भी लखनऊ और पूर्वांचल विद्युत निगम के लिए एक ही व्यक्ति मैनेजिंग डायरेक्टर का कार्यभार संभालते हैं. चौधरी कहते हैं, "यहां के लिए किसी अन्य अधिकारी को क्यों नहीं तैनात किया जा रहा है?"

आंदोलन

विधायक श्यामदेव रॉयचौधरी कहते हैं, "बदले की भावना से काम किया जा रहा है. चुनाव से पहले यहां आपूर्ति ठीक थी. आजमगढ़ को अब 24 घंटे बिजली मिल रही है इससे कोई अधिकारी इंकार नहीं कर रहा है. लेकिन यहां सिर्फ 14 -15 घंटे ही बिजली दी जा रही है."

श्यामदेव ने बताया कि उन्होंने तीन दिन पहले मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखा है जिसमे बिजली की समस्या की ओर उनका ध्यान आकर्षित किया है.

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श्यामदेव के अनुसार वाराणसी में ज़्यादातर मोहल्लों में ट्यूबवेल से पानी सप्लाई होता है. बिजली की कटौती के कारण पानी को लेकर भी जनता में हाहाकार मचा है. उन्होंने चेतावनी दी है कि नरेंद्र मोदी के शपथ लेने के बाद वे इस समस्या के लिए आंदोलन शुरू करेंगे.

समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने अपने संक्षिप्त उत्तर में कहा कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है के वाराणसी में राजनीतिक कारणों से बिजली कटौती ज़्यादा हो रही है.

प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन जनवरी से ग्रामीण इलाकों में 16 घंटे बिजली आपूर्ति कर रहा था. यह 16 घंटे की आपूर्ति बढ़ी हुई मांग के बाद भी की जा रही थी इस बढ़ी मांग को कॉर्पोरेशन ने एनर्जी एक्सचेंज से बिजली खरीद कर पूरा किया.

17 मई की डेली सिस्टम रिपोर्ट से साफ़ पता चलता है कि किस तरह 16 मई को चुनाव नतीजे आते ही विद्युत आपूर्ति घटाकर आधी कर दी गयी. पावर कॉर्पोरेशन की इस दैनिक रिपोर्ट में कितनी बिजली उत्पादित की गई, कितनी आयात की गई, तथा मांग और आपूर्ति का ब्यौरा दिया जाता है.

इस रिपोर्ट के अनुसार 17 मई को ग्रामीण क्षेत्रों में आपूर्ति 8.33 घंटे कर दी गई जबकि इससे पहले इन इलाकों में 16 घंटे आपूर्ति हो रही थी.

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