सपा ने गुल की 36 मंत्रियों की लाल बत्ती

अखिलेश यादव

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    • Author, अतुल चंद्रा
    • पदनाम, वरिष्ठ पत्रकार, लखनऊ से, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए

लोकसभा चुनाव में सपा को मिली करारी हार के बाद उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव ने मंगलवार को कठोर कदम उठाते हुए 36 मंत्रियों को बर्खास्‍त कर दिया है.

चुनाव के बाद मंगलवार को अखिलेश यादव ने पहली बार कैबिनेट की बैठक की. कैबिनेट मीटिंग के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने प्रदेश के मंत्रियों के साथ बैठक की.

इस बैठक के बाद अखिलेश यादव ने 36 दर्ज़ा-प्राप्त राज्य मंत्रियों की लाल बत्ती छीनने का आदेश जारी कर दिया.

हालांकिअखिलेश ने खुद इस्तीफ़ा देने से इंकार कर दिया.

बर्खास्त मंत्री

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी से हटाए गए राज्य मंत्रियों के नाम हैं: जगदीश यादव, केसी पांडेय, सचिन पति, ओमवीर तोमर, नरेंद्र भाटी, रंजना बाजपेयी, कमरुद्दीन, आशु मालिक, संदीप बंसल, सुरभि शुक्ला, लीलावती कुशवाहा, अनुराधा चौधरी, राजा चतुर्वेदी, कमलेश पाठक, केपी सिंह चौहान, सुरेंद्र मोहन अग्रवाल, अनीस मंसूरी राकेश यादव, राम सिंह राणा, हाजी इकराम, वसीम अहमद, विद्यावती राजभर, मोहम्मद अब्बास, इकबाल अली, रिबू श्रीवास्तव, मनोज राय, अंजला माहौर, साहब सिंह सैनी, कुलदीप उज्जवल, रामबाबू, वीरेंद्र सिंह, विद्यावती राजभर, इंदु प्रकाश मिश्रा, बहादुर सिंह, वीरबद्र उपाध्याय और सतेंद्र उपध्याय.

अखिलेश यादव, मुलायम सिंह यादव

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इनमे से नरेंद्र भाटी को छोड़ दें तो कोई ऐसा मंत्री नहीं है जिसके ऊपर इन चुनावों में बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी रही हो. नरेंद्र भाटी वही हैं जिन्होंने आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल को सिर्फ 41 मिनट में हटवाने का दंभ भरा था और वे मुलायम के विशेष कृपापात्र भी हैं.

सैफई से प्यार

सोमवार को सपा अध्यक्ष ने लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय पर सभी लोकसभा उम्मीदवारों से चुनावों में हार की समीक्षा की थी. ऐसे कयास लग रहे थे कि मुलायम कोई कड़ी कार्रवाई करेंगे.

लेकिन पार्टी के प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने मीटिंग के बाद पत्रकारों से कहा कि मुलायम ने सभी उम्मीदवारों से कहा है कि वे हतोत्साहित ना हों और लोगों का विश्वास जीतने के लिए फिर से जुट जाएँ.

अखिलेश यादव, लैपटॉप वितरण

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अखिलेश यादव को सरकार की योजनाओं में कोई भी ख़राबी नहीं नज़र आई. उनके अनुसार, कमी बस यही रही कि पार्टी सरकार की उपलब्धियों को ठीक ढंग से जनता तक पहुंचा नहीं पाई.

चुनावों में शर्मनाक हार के बावजूद अखिलेश सरकार का अभी भी सारा ध्यान सैफई पर ही लगा हुआ है. कैबिनेट बैठक में अखिलेश यादव ने सैफई में स्टेडियम बनाने के प्रस्ताव पर मुहर लगाई है.

मायावती की हार

जिस तरह सपा लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के सदमे से निकलने की कोशिश कर रही है, उसी प्रकार बहुजन समाज पार्टी भी उलझन में है.

मायावती

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आने वाले दिनों में बहुजन समाज पार्टी में भी बड़े फेरबदल के कयास लग रहे हैं. बसपा सुप्रीमो मायावती को 19 प्रतिशत वोट तो ज़रूर मिले हैं, लेकिन सीट एक भी नहीं मिली.

मायावती इस हार के लिए मुसलमानों को दोष देती हैं. उनका मानना है कि मुसलमानों ने बसपा से ज़्यादा सपा पर भरोसा कर अपने वोटों का बँटवारा होने दिया.

लेकिन वे इस बात को स्वीकार नहीं कर पा रही हैं कि दलित वोट भारतीय जनता पार्टी को मिले हैं.

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