दंगों के बारे में सीएम से पूछिए: आज़म ख़ान

हज़ारों लोग अपने घरों को छोड़ राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं.
इमेज कैप्शन, हज़ारों लोग अपने घरों को छोड़ राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं.
    • Author, इक़बाल अहमद
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली

उत्तर प्रदेश सरकार में वरिष्ठ मंत्री और समाजवादी पार्टी के मुस्लिम चेहरे कहे जाने वाले आज़म ख़ान ने कहा है कि मुज़फ़्फ़रनगर दंगों के लिए वो ज़िम्मेदार नहीं हैं क्योंकि वे सरकार के मुखिया नहीं हैं.

मंगलवार को दिल्ली में बीबीसी से एक ख़ास बातचीत में जब उनसे पूछा गया कि इतना बड़ा दंगा हुआ तो आख़िर चूक कहां हो गई, तो उनका जवाब था, ''इस बारे में सीएम साहब (मुख्यमंत्री अखिलेश यादव) ज़्यादा बेहतर बता पताएंगे क्योंकि वो ही एक्ज़क्यूटिव हेड(सरकार के मुखिया) हैं.''

जब मैंने फिर पूछा कि क्या उस ज़िले के प्रभारी मंत्री होने के नाते आपकी कोई ज़िम्मेदारी नहीं बनती, उन्होंने अपनी बात दोहराते हुए कहा, ''एक्ज़क्यूटिव हेड मैं नहीं हूं, इसलिए इस तरह की मेरी ज़िम्मेदारी नहीं बनती.''

'मीडिया है ज़िम्मेदार'

अखिलेश यादव के इस्तीफ़े या फिर राज्य सरकार की बर्ख़ास्तगी की मांगों के बारे में पूछे जाने पर आज़म ख़ान का कहना था, ''मांग तो कोई भी कर सकता है, आप इस हैसियत में हैं जैसा चाहें माहौल बना दें. यहां भी आप इस्तीफ़ा ले लें और इसे भी बीजेपी के हवाले कर दें.''

मुज़फ़्फ़रनगर
इमेज कैप्शन, कुटबी गांव में जाटों ने पंचायत कर मुसलमानों से गांव वापस लौटने की अपील की.

कई विपक्षी पार्टियां और मानवाधिकार कार्यकर्ता 2002 में गुजरात में हुए दंगों के लिए मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को ज़िम्मेदार ठहराते रहे हैं और उनके इस्तीफ़े की मांग करते रहे हैं.

मुज़फ़्फ़रनगर दंगों के बाद यही सवाल जब अखिलेश सरकार से किए जाने लगे तो इसका सीधा जवाब देने से बचते हुए आज़म ख़ान ने इसके लिए मीडिया को ज़िम्मेदार ठहराया. उनका कहना था, ''जैसा माहौल आप चाहेंगे वैसा बन जाएगा. एक कैमरा, एक व्यक्ति पूरे मुल्क को आग की लपेट में झोंक दे. क्या कर लेगा कोई.''

राहत शिविरों में रह रहे हज़ारों लोगों के बारे में उन्होंने कहा कि वहां किसी चीज़ की कमी नहीं है.

हालांकि सामाजिक कार्यकर्ता और मीडिया के लोग उन शिविरों का दौरा करने के बाद कह रहे हैं कि वहां के हालात बहुत ख़राब हैं और सरकार की तरफ़ से मदद न के बराबर है. आज़म ख़ान ने कहा कि सरकार की यही कोशिश है कि राहत शिविरों में रह रहे लोगों को शांतिपूर्ण तरीक़े से उनके घरों तक पहुंचाया जाए और उनकी पूरी हिफ़ाज़त की जाए.

ग़ौरतलब है कि दंगों के बाद अपने गांवों को छोड़ने पर मजबूर हुए लगभग 50 हज़ार लोग इस समय विभिन्न राहत शिविरों, मस्जिदों, मदरसों और स्कूल-कॉ़लेज में रह रहे हैं.

'सिफ़ारिशें लागू होंगी'

दंगा पीड़ितों को इंसाफ़ दिलाने के बारे में पूछे जाने पर आज़म ख़ान का कहना था, ''हुकूमत की सतह पर जितने भी क़दम उठाए जाने थे उनमें कोई कसर नहीं उठाई गई है और कोशिश यही की गई है कि ज़्यादा से ज़्यादा लोगों पर मरहम लगे. बाक़ी अदालत से जुड़े मामले हैं उनको वहीं देखेगी, उनमें हमलोग दख़ल नहीं दे सकते हैं.''

मुज़फ़्फ़रनगर
इमेज कैप्शन, कर्फ़्यू हटा लिया गया है लेकिन लोग अभी भी डरे और सहमे हुए हैं.

उन्होंने यक़ीन दिलाया कि मुज़फ़्फ़रनगर दंगों की जांच के लिए जो न्यायिक कमेटी बनाई गई है उनकी सभी सिफ़ारिशों को उनकी सरकार लागू करेगी.

अखिलेश सरकार के सत्ता में आने के लगभग डेढ़ साल में उत्तर प्रदेश में सौ से भी ज़्यादा दंगे होने की वजह पूछे जाने पर आज़म ख़ान ने कहा कि ये एक तफ़सीली बहस है जिस पर कभी और बातचीत होगी.

लेकिन ये पूछे जाने पर की आम तौर पर लोगों की ये धारणा है कि सांप्रदायिक दंगे राजनीतिक तौर पर समाजवादी पार्टी के लिए फ़ायदेमंद हैं, इसके जवाब में उन्होंने पहले कहा कि ये केवल आरोप हैं जो साबित नहीं हुए हैं.

उन्होंने इतना ज़रूर स्वीकार किया कि एक हादसा हुआ तो है जिससे इनकार नहीं किया जा सकता है.

दंगों के राजनीतिक लाभ के बारे में दोबारा पूछे जाने पर उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया.

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