असम में दस लोगों की हत्या

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- Author, अमिताभ भट्टासाली
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
असम पुलिस के अनुसार राज्य के दो पश्चिमी ज़िलों में अलग-अलग घटनाओं में विद्रोहियों ने दस ग्रामीणों की हत्या कर दी. जान गंवाने वाले सभी लोग एक ही संप्रदाय से ताल्लुक़ रखते थे.
पुलिस के मुताबिक़ ये हत्याएं गुरुवार शाम को संदिग्ध बोडो विद्रोहियों ने की. मरने वालों में छह महिलाएं और दो बच्चे हैं. चार लोग जख्मी हैं और उनकी हालत गंभीर बनी हुई है.
बोडोलैंड क्षेत्र केपुलिस महानिदेशक एल आर बिश्नोई ने बीबीसी को बताया, ''दो अलग-अलग हमलों में दस लोग मारे गए हैं. पहली घटना बक्सा ज़िले में हुई, जहां विद्रोहियों ने तीन लोगों की जान ले ली और एक को घायल कर दिया. कोकराझार में हुई दूसरी घटना में सात लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई.''
पहली घटना बक्सा में नेशनल पार्क के क़रीब नरसिंह गांव में हुई, जबकि दूसरी कोकराझार के सपूतग्राम के बालापारा में आधी रात को.
बीती रात कोकराझार कस्बे में संदिग्ध विद्रोहियों ने एक पत्रकार की पिटाई भी की.
एनडीएफबी का हाथ
कोकराझार के तमुलपुर इलाक़े में एक बोडो युवक पर हमले की भी ख़बर है. अभी इस बात की पुष्टि नहीं हुई कि ये बदले की कार्रवाई थी या नहीं.
पुलिस महानिदेशक बिश्नोई कहते हैं कि इन हत्याओं के लिए नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ़ बोडोलैंड (एनडीएफबी) का संगबिजित गुट ज़िम्मेदार है.
बोडोलैंड मुस्लिम स्टूडेंट यूनियन (एबीएमएसयू) के महासचिव रकीबुल इस्लाम ने कहा, ''बोडोलैंड क्षेत्र में 24 अप्रैल को वोटिंग हुई थी. तब से ही मुसलमानों को बोडो संगठनों द्वारा धमकियां दी जा रही थीं. उनका मानना था कि मुसलमानों ने बोडो उम्मीदवारों के ख़िलाफ़ वोटिंग की है.''
बोडोलैंड क्षेत्रीय परिषद में बीडीपी सत्ता में है. माना जाता है कि उसे अंडरग्राउंड संगठनों का समर्थन हासिल है. चुनाव में खड़े बोडो उम्मीदवारों में पूर्व बीएसएफ प्रमुख रंजीत मूशाहारी भी शामिल हैं.
ये पहला मौक़ा है जब बोडोलैंड इलाक़े की 70 फ़ीसदी आबादी वाले ग़ैर बोडो समुदायों ने एक ग़ैर बोडो उम्मीदवार उल्फा के पूर्व कमांडर हीरा शारानिया को चुनाव मैदान में उतारा है.
धमकियां
चुनावों से पहले बहुत से मुसलमान मतदाताओं ने बीबीसी से कहा था कि वो शारानिया को वोट करेंगे. हालांकि उन्हें बोडो संगठनों से लगातार मिल रही धमकियां का डर भी था.
कुछ मुसलमानों का कहना था कि अगर उन्हें सुरक्षित रहना है तो वे बोडो के ख़िलाफ़ वोटिंग का ख़तरा मोल नहीं ले सकते.
हालांकि पुलिस महानिदेशक ने इन हत्याओं और चुनाव के बीच किसी संबंध से इनकार किया है.
बोडोलैंड इलाक़े में जून 2012 से ही सांप्रदायिक संघर्षोंकी वारदातें होती रही हैं जिनमें सैकड़ों लोग जान से हाथ धो चुके हैं तो लाखों बेघर हो गए हैं.
बहुत से बेघर अब तक पैतृक गांवों में नहीं लौटे हैं और दूसरे इलाक़ों में रह रहे हैं.
हथियार
मुसलमान नेताओं ने आरोप लगाया है कि समर्पण कर चुके विद्रोही हथियारों के साथ खुले घूम रहे हैं. उन्होंने अब तक हथियार जमा नहीं किए हैं.
सेना और राज्य पुलिस ने संघर्ष विराम कर चुके संगठनों और समर्पण कर चुके लोगों से हथियार जब्त करने का अभियान चलाया था. स्थानीय सूत्रों का कहना है कि इनमें से बहुत से लोगों के पास अब भी हथियार हैं.
असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने बीबीसी से कहा कि इलाक़े के ज़्यादातर हथियार जमा कराए जा चुके हैं.
बोडो आदिवासियों का प्रतिनिधित्व करने वाले कई संगठन तेलंगाना की ही तरह अलग राज्य का निर्माण चाहते हैं.
लेकिन बोडोलैंड स्वायत्तशासी क्षेत्रीय परिषद के इलाक़े में रहने वाले ग़ैर बोडो बंगाली हिन्दू और मुस्लिम, असमी और दूसरी आदिवासी जातियां ऐसे किसी भी अलग राज्य का विरोध करती रही हैं.
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