साथ रहने के लिए 'कजिन' बताना पड़ा

- Author, आकांक्षा सक्सेना
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
भारत के सर्वोच्च न्यायालय की ओर से अपराधी करार दिए जाने के बाद समलैंगिकों की दुश्वारियां और चुनौतियां तो बढ़ी, लेकिन साथ रहने की उनकी ललक में कोई कमी नहीं आई है.
आइए मिलवाते हैं राजधानी दिल्ली में पिछले दस साल से रह रहे ऐसे ही एक समलैंगिक जोड़े से.
ये जोड़ा है शिव और हिमाद्री का. दोनों दिल्ली में 10 साल से साथ रह रहे हैं.
शिव बताते हैं, "हम समलैंगिक हैं. समलैंगिक का मतलब खुश रहने वाले. हम एक-दूसरे का साथ पाकर बहुत खुश हैं."
प्रेम
हिमाद्री, सांस्कृतिक कार्यक्रम और शिक्षा से जुड़ी संस्था के लिए काम करते हैं जबकि शिव लिखते हैं और मूल रूप से उपन्यासकार हैं.
हिमाद्री और शिव जब पहली बार मिले तो उन्हें अच्छा लगा. धीरे-धीरे उनके बीच रिश्ताबनता गया.
शिव जब पहली बार हिमाद्री से मिले थे, उन पलों को याद करते हुए कहते हैं, "वे जिस तरह से मेरी ओर बढ़े और मुझे गले लगाया, वो स्पर्श मैंने भीतर तक महसूस किया."

उनके रिश्ते को लेकर दोनों के परिवार वालों की क्या प्रतिक्रिया रही, इसके बारे में बताते हुए शिव कहते हैं कि उनकी मां को इस रिश्ते से कोई दिक्कत नहीं थी. वे कहते हैं कि उनकी मां ने हिमाद्री को परिवार के सदस्य के रूप में स्वीकार कर लिया.
अपने परिवार की प्रतिक्रिया के बारे में हिमाद्री कहते हैं, "मेरी मां अब नहीं रहीं. भाई को मेरे समलैंगिक होने की खबर है. लेकिन मेरे यौन रुझान, या प्रेम के बारे में हमारे बीच कभी कोई चर्चा नहीं हुई."
झूठी बात
जब हिमाद्री और शिव दिल्ली में रहने के लिए किराए का घर तलाश रहे थे तो समलैंगिक होने के कारण उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा.
हिमाद्री बताते हैं कि किराए पर घर पाने के लिए उन दोनों को झूठ बोलना पड़ा. वे कहते हैं, "जब हमसे पूछा गया कि हम दोनों का आपस में क्या रिश्ता है, तो मैंने बताया कि हम कजिन हैं.
इस समलैंगिक जोड़े को लगता है कि समाज में अरेंज्ड मैरिज के अलावा किसी रिश्ते के लिए कोई स्पेस नहीं बना है. वे मानते हैं कि समलैंगिक, बच्चे पैदा नहीं कर सकते इसलिए समाज इस संबंध को कुदरती नहीं मानता, सामान्य नहीं मानता.
इस जोड़े को अपने संबंध छुपाने के लिए बाहर हर जगह सचेत रहना पड़ता है. उन्हें आशंका सताती रहती है कि यदि लोग उनके बारे में जान लें तो परेशान करेंगे या घूरेंगे.
गरिमा और अस्तित्व की लड़ाई
सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2013 में समलैंगिक संबंधों को नाजायज करार देते हुए ऐसे संबंध बनाने वालों को अपराधी घोषित कर दिया था.

हिमाद्री अदालत के इस फैसले से बेहद खफा हैं. वे कहते हैं, "हम अपने काम से काम रखते हैं. सभी तरह का टैक्स देते हैं. किसी भी दूसरे नागरिक की तरह अपने दायित्वों को निभाते हैं."
वे बेचैन होकर कह उठे, "क्या ये 21वीं सदी का वही भारत है जिसे दुनिया भर में एक स्वतंत्र देश और विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में जाना जाता है. क्या ये वही भारत है जो सुरक्षा परिषद् का स्थायी सदस्य बनना चाहता है."
वे आगे कहते हैं, "हमने समलैंगिक होकर कोई गुनाह नहीं किया सिवाय इसके कि हम एक दूसरे से प्यार करते हैं और साथ जीना चाहते हैं."
हिमाद्री दृढ़ आवाज में कहते हैं, "हम मरते दम तक अपनी गरिमा और अस्तित्व के लिए संघर्ष करते रहेंगे. हमारे पास बस यही एक विकल्प बचा है."
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