बस यही 'अपराध' मैं हर बार करता हूं...

सुप्रीम कोर्ट के धारा 377 पर पुनर्विचार से इनकार के बाद मुंबई में पहली बार एलजीबीटी समर्थकों ने एक रैली निकाली. इसमें सात देशों, नौ शहरों से करीब 5,000 लोग शामिल हुए.

मुंबई समलैंगिक रैली, गे परेड
इमेज कैप्शन, सुप्रीम कोर्ट के धारा 377 पर पुनर्विचार करने से इनकार के बाद शनिवार को मुंबई में समलैगिको की पहली बड़ी रैली हुई. (सभी फोटोः बीबीसी संवाददाता वैभव दीवान)
मुंबई समलैंगिक रैली, गे परेड
इमेज कैप्शन, परेड में शामिल कई लोगों का कहना था कि इस साल की परेड में पिछले साल से कम लोग आए हैं. इसका कारण धारा 377 के फिर से लागू होने का डर भी माना जा रहा है.
मुंबई समलैंगिक रैली, गे परेड
इमेज कैप्शन, लेकिन इसके बावजूद इस परेड में कई ऐसे परिवार भी आए जो अपने समलैंगिक बच्चों की यौन इच्छाओं का सम्मान करते हैं.
मुंबई समलैंगिक रैली, गे परेड
इमेज कैप्शन, परेड में शामिल समलैंगिक अधिकार समर्थकों का कहना था कि नाज़ फ़ाउंडेश के साथ मिलकर इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के सामने एक बार फिर उठाया जाएगा.
मुंबई समलैंगिक रैली, गे परेड
इमेज कैप्शन, भारत के नौ राज्यों से समलैंगिक अधिकार समर्थकों के अलावा सात देशों से लोग इस परेड में शामिल हुए.
मुंबई समलैंगिक रैली, गे परेड
इमेज कैप्शन, विदेशों में होने वाली रंगारंग गे परेड की तर्ज पर मुंबई में भी समलैंगिक अधिकार समर्थक अलग-अलग ड्रेस और मुखौटे पहन कर आए.
मुंबई समलैंगिक रैली, गे परेड
इमेज कैप्शन, किन्नर लक्ष्मी नारायण परेड में जोश से नारा लगाती दिखीं, "ये तो बस अंगड़ाई है आगे बहुत लड़ाई है." इससे उनके साथी किन्नरों में जोश भर दिया.
मुंबई समलैंगिक रैली, गे परेड
इमेज कैप्शन, परेड में कई समलैंगिक जोड़ों ने भी भाग लिया. शनिवार को हुई इस परेड में 5,000 से ज़्यादा लोगों के शामिल होने का अनुमान है.
मुंबई समलैंगिक रैली, गे परेड
इमेज कैप्शन, मुंबई में पहली गे परेड का आयोजन सन 2008 में हुआ था. समलैंगिक अधिकारों की मांग करती यह रैली हर साल अगस्त क्रांति मार्ग से गिरगाम चौपाटी तक जाती है.
मुंबई समलैंगिक रैली, गे परेड
इमेज कैप्शन, लगभग 2 किलोमीटर की इस परेड में लोग नारे, पोस्टर और रंग-बिरंगे कपड़ों में नज़र आते हैं. समलैंगिको की एकता का प्रतीक इंद्रधनुषी झंडा और गुब्बारे भी परेड की रौनक रहते हैं.
मुंबई समलैंगिक रैली, गे परेड
इमेज कैप्शन, सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से समलैंगिक अधिकार समर्थकों को धक्का तो ज़रूर लगा है लेकिन इस परेड के देखकर लगा कि अभी इनके जोश में कमी नहीं आई है और ये लंबी लड़ाई के लिए तैयार हैं.