ए राजा को अपनी 'प्रजा' पर भरोसा

ए राजा, नीलगिरी में चुनाव प्रचार करते हुए
    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, नीलगिरी से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

भारत के टेलीकॉम घोटाले के बारे में दुनिया क्या सोचती है, कांग्रेस के नेता और दूसरे लोग क्या कहते हैं, ए राजा को इससे फ़र्क नहीं पड़ता है. वे अपने विरोधियों को ग़लत साबित करने के लिए जनता की अदालत में जा पहुंचे हैं.

तमिलनाडु में नीलगिरी की आरक्षित सीट से द्रमुक पार्टी के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ रहे ए राजा यहां अपनी दोबारा जीत के प्रति आश्वस्त हैं जहां उनका मुक़ाबला अन्नाद्रमुक पार्टी के सी गोपालकृष्णन से है.

प्रतिद्वंद्वी गोपालकृष्ण जहां टूजी घोटाले में उनकी कथित भूमिका का मुद्दा उठा रहे हैं, वहीं ए राजा इससे अप्रभावित नज़र आते हैं.

बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा, ''मैं एक ईमानदार आदमी हूं. मान भी लें कि मैंने मनमाने तरीके से एक फ़ैसला किया, लेकिन इस तरह तो कई फ़ैसले किए गए हैं. एक आदेश को ख़ारिज़ कर दिया गया तो इसका मतलब ये नहीं है कि वो आदेश ग़लत था.''

वे कहते हैं, ''कई बार ऐसा भी होता है जब संसद कोई क़ानून बनाती है और सुप्रीम कोर्ट उस पर रोक लगा देता है. तब आप ये तो नहीं कह सकते कि संसद ही ग़लत है.''

'टूजी घोटाला मायने नहीं रखता'

मज़े की बात तो ये है कि स्थानीय लोगों के लिए भी ये बात मायने नहीं रखती कि ए राजा का नाम टेलीकॉम घोटाले में आया.

ऐसे ही एक पूर्व सरकारी कर्मचारी एम सेल्वलिंगम कहते हैं, ''टूजी घोटाला हमारे जैसे लोगों के लिए नहीं है. ये आप जैसे लोगों के लिए एक मुद्दा हो सकता है. हां, वे खुलकर इस बारे में बात कर रहे हैं. हमारे लिए बस इतना मायने रखता है कि उन्होंने अच्छा काम किया है. कोई भी उनसे मिल सकता है और वो उसकी मदद करते हैं.''

फल बेचने वाले मोहम्मद नोएफिल कहते हैं, ''वे समाज के विभिन्न तबकों के बीच फ़र्क नहीं करते हैं. वे सभी से एक समान व्यवहार करते हैं.''

इसी तरह बैंक में काम करने वाले एक कर्मचारी ने अपना नाम ज़ाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा, ''लोग साल 2009 में बारिश के मौसम का वो दृश्य नहीं भूले हैं जहां भारी पैमाने पर भूस्खलन हुआ था और वो अपनी धोती कसकर लोगों की मदद में जुट गए थे.''

उस दौरान राजा के काम की सराहना करते हुए लोग आपको मैदानी इलाकों में भी मिल जाएंगे जहां अन्नाद्रमुक का दबदबा है. नीलगिरी लोकसभा क्षेत्र में कुछ छह विधानसभा सीटें हैं जिनमें से तीन पहाड़ी इलाके में है और तीन मैदानी.

मैदानी चुनौती

ए राजा को सबसे बड़ी चुनौती का सामना मैदानी इलाकों से करना पड़ रहा है जहां अन्नाद्रमुक नेता और तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे जयललिता ने राजा की हार सुनिश्चित करने के लिए पांच सदस्यों की एक टीम को काम पर लगाया है.

जयललिता ने इस काम के लिए डिप्टी स्पीकर, एक मंत्री और राज्यसभा सासंद समेत पार्टी के ज़िला स्तर के अधिकारियों को लगाया है जिनके बारे में जानकार कहते हैं कि राजा की हार नहीं हुई तो इन सबकी छुट्टी हो जाएगी.

लेकिन राजा इसे अपने लिए चुनौती नहीं मानते हैं. वे कहते हैं, ''ये मेरे लिए चुनौती नहीं हैं लेकिन कुछ मुद्दे ज़रूर हैं. मैं जब तक मंत्री था, अधिकारियों की बैठक बुलाकर काम करा सकता था लेकिन अब कोई ध्यान नहीं दे रहा है. विडम्बना तो ये है कि मुख्यमंत्री यहां अपने इस्टेट में लंबा वक्त गुजारती हैं. हेलीपैड से अपने इस्टेट तक की 30 किलोमीटर की दूरी हेलीकॉप्टर से तय करती हैं, लेकिन मैं इस क्षेत्र के चप्पे चप्पे का दौरा कर रहा हूं.''

वे कहते हैं, ''मैं यदि जेल में होता, तब भी सुनिश्चित करता कि सांसद विकास निधि के पांच करोड़ रूपये बंट जाएं. मैं लोगों के सामने यही सवाल उठा रहा हूं.''

नागरिक मंच कोनूर के सचिव राजेश कुमार जेम्स भी ए राजा के दावे की पुष्टि करते हैं. वे कहते हैं, ''वे ऐसे पहले सांसद हैं यहां के जिन्होंने इतना काम किया जिनसे लोग कभी भी मिल सकते हैं.''

लेकिन फिर भी उनकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि 24 अप्रैल को जब मतदान होगा, पहली बार वोट देने वाले युवा मतदाता किसका रुख़ करते हैं.

<bold>(बीबीसी हिंदी का एंड्रॉयड ऐप डाउनलोड करने के लिए <link type="page"><caption> क्लिक करें</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link>. आप बीबीसी हिंदी से <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> या <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> जैसे सोशल मीडिया माध्यमों पर भी जुड़ सकते हैं)</bold>