तमिलनाडु के सियासी समीकरण किसके हक में?

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    • Author, इमरान क़ुरैशी
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

आमतौर पर शक्तिशाली प्रतिद्वंद्वी से जीतने के लिए चुनावी गठबंधन फ़ायदेमंद माना जाता है.

मगर यदि भाजपा के साथ डीएमडीके और पीएमके के नए गठबंधन पर नज़र डाली जाए तो इससे एआईएडीएमके की नेता और तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता को मदद मिलती नज़र आ रही है.

डीएमके प्रमुख करुणानिधि भाजपा की तरफ़ से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को अपना 'अच्छा दोस्त' बताते है जबकि मोदी की असल में पुरानी मित्र जयललिता हैं.

जयललिता ने मोदी के तीसरी बार मुख्यमंत्री चुने जाने पर अपना विशेष प्रतिनिधि भी उनके पास भेजा था.

विभाजित विपक्ष

भाजपा ने डीएमडीके को 39 में से 14 सीटें और पी रामदोस की पीएमके को दो या दो से अधिक सीटें देने का वादा किया है.

यहां संख्या से ज़्यादा चुनावी समीकरण महत्वपूर्ण है. भाजपा ने डीएमके का डीएमडीके और पीएमके के साथ गठबंधन नहीं होने दिया. ये बात भाजपा के लिए फ़ायदेमंद होगी.

डीएमडीके, विजयकांत

<link type="page"><caption> डीएमके</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/01/140124_dmk_alagiri_suspension_analysis_rd.shtml" platform="highweb"/></link> की अगुआई में दो दलित पार्टियों सहित डीएमडीके और पीएमके के साथ गठबंधन से चुनाव में जीतना जयललिता के लिए टेढ़ी खीर साबित होता.

<link type="page"><caption> सीपीआई</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/02/140202_jaylalita_aiadmk_meeting_sk.shtml" platform="highweb"/></link> और सीपीएम के साथ समझौता ख़त्म कर दिए जाने और डीएमके और कांग्रेस के अलग-थलग पड़ जाने की स्थिति में अब विभाजित विपक्ष जयललिता की ही मदद करेगा.

डेक्कन क्रॉनिकल के स्थानीय संपादक भगवान सिंह ने बीबीसी हिंदी को बताया, "भाजपा के साथ डीएमडीके के जुड़ने से जयललिता की एआईएडीएमके की स्थित ज़्यादा बेहतर हो गई है. यहां हमें ये भी नहीं भूलना चाहिए कि भाजपा अब भी नई रणभूमि में जीत की संभावनाएं तलाश रही है.’’

डीएमडीके से अलग होकर एआईएडीएमके से जुड़ने वाले एक विधायक बताते हैं, "तमिलनाडु में मोदी फ़ैक्टर को काफ़ी बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया गया है. पिछले चुनाव में भाजपा को कुल वोट का 1.3 प्रतिशत वोट ही मिला था. यदि वह डीएमडीके के साथ जाती है तो इससे ज़्यादा सीटें मिल सकती है." वे उन आठ विधायकों में से एक हैं जिन्हें जयललिता ने अपना समर्थन ज़ाहिर करने के लिए बुलाया था.

सीटों की हिस्सेदारी

नरेंद्र मोदी

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इमेज कैप्शन, जयललिता भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को अपना 'पुराना मित्र' बताती हैं.

हालांकि राजनीतिक विश्लेषक दक्षिणी राज्यों में मोदी फ़ैक्टर पर अलग-अलग राय रखते हैं.

एक विश्लेषक पहचान ज़ाहिर नहीं किए जाने के आश्वासन पर बताते हैं, ''नई पीढ़ी मोदी के बारे में अलग राय रखती है. पहली बार मोदी के नाम की चर्चा ग्रामीण और क़स्बाई इलाक़ों में शुरू हुई है. इसका फ़ायदा मोदी को कितना मिलता है यह तो चुनाव के बाद ही पता चलेगा. हां, जो डीएमके बनाम <link type="page"><caption> एआईएडीएमके</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/02/140227_jayalalita_pm_photoshopped_posters_rd.shtml" platform="highweb"/></link> की राजनीति से ऊब चुके हैं, उनका झुकाव भाजपा की ओर हो सकता है.’’

सवाल है कि इसका डीएमके और कांग्रेस की राजनीति पर क्या असर हो सकता है? सभी जानते हैं कि करुणानिधि के बेटे और वारिस एमके स्टालिन कांग्रेस के साथ समझौते के विरोध में रहे हैं. डीएमके पार्टी के लोग खुलेआम स्टालिन का नाम लेते हुए कहते हैं कि वे कांग्रेस के साथ जाना नहीं चाहते.

डीएमके पार्टी डीएमडीके के साथ गठबंधन बनाने के लिए काफ़ी उत्सुक थी मगर बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी. डीएमके और डीएमडीके के बीच उन 16 सीटों पर मतभेद रहे जिन पर डीएमडीके चुनाव लड़ना चाहती थी लेकिन डीएमके इन 16 सीटों पर कोई हिस्सेदारी नहीं चाहती थी.

मुस्लिम वोटर

तमिलनाडु में राजनीति पारंपरिक तरीक़े से होती रही है. कही हुई बातों का मतलब उतना नहीं होता जितना अनकही बातों का. सीटों के बंटवारे पर सहमति नहीं बनने के बाद वाम दलों ने जयललिता से अपना रास्ता अलग कर लिया. जयललिता तमिलनाडु में लोकसभा की सभी 39 सीटों पर अपने उम्मीदवारों को उतारकर अपना मन बदलने का इशारा कर रही थीं.

दरअसल जयललिता तमिलनाडु में वामदलों को छह सीटें देने के लिए राज़ी नहीं थीं. जयललिता वाम दलों को सिर्फ़ एक से ज़्यादा सीट नहीं देना चाहती थी जबकि वाम दल तीन सीटें चाहती हैं.

जयललिता ने कभी ख़ुद को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार के रूप में पेश नहीं किया मगर उनकी पार्टी और समर्थकों के लिए अब यह एक राष्ट्रीय एजेंडा है.

जयललिता ने वाम दलों के साथ गठबंधन खत्म कर दिया है.

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इमेज कैप्शन, जयललिता ने वाम दलों के साथ गठबंधन खत्म कर दिया है.

वरिष्ठ पत्रकार केएन अरूण का कहना है, ''इसका अर्थ ये है कि चुनाव के बाद गठबंधन का विकल्प खुला हुआ है. यदि एनडीए को सरकार बनाने के लिए संख्या कम पड़ती है तो उन परिस्थितियों में हम जयललिता के मोदी के साथ जाने की संभावना से इंकार नहीं कर सकते.’’

भाजपा के साथ चुनाव पूर्व गठबंधन करने से जयललिता के <link type="page"><caption> मुस्लिम वोटर</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/12/131215_muslim_series_4_narendra_modi_riots_madni_ia.shtml" platform="highweb"/></link> नाराज़ हो सकते हैं. संभवतः यही वजह है कि एआईएडीएमके की ओर से भाजपा के साथ गठबंधन बनाने की कोई पहल नहीं की गई.

भाजपा राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य एच.राजा कहते हैं, ''एआईएडीएमके की ओर से भाजपा के साथ गठबंधन के लिए की जाने वाली किसी पहल का हमें कोई संकेत नहीं मिला है. हमारी बातचीत डीएमडीके के साथ चल रही है.’’

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