'तेलुगू हितों के लिए' पार्टी बनाएंगे किरण रेड्डी

इमेज स्रोत, AFP
आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी ने गुरुवार को नई पार्टी के गठन की घोषणा की. उन्होंने कहा है कि वह तेलुगू लोगों के हितों और एकीकृत आंध्र प्रदेश के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे.
हालांकि, उन्होंने नई पार्टी के नाम और दूसरी औपचारिकताओं के बारे में नहीं बताया. उन्होंने कहा कि नई पार्टी की नीतियों और कार्यक्रमों की घोषणा 12 मार्च को राजमुंदरै में एक आम सभा के दौरान की जाएगी.
इससे पहले किरण कुमार रेड्डी ने तेलंगाना विधेयक के लोकसभा में पारित होने के विरोध में 19 फरवरी को कांग्रेस से इस्तीफ़ा दे दिया था. उन्होंने विधानसभा की सदस्यता से भी इस्तीफ़ा दे दिया था.
<link type="page"><caption> किरण कुमार रेड्डी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/02/140219_andhra_cm_reddy_sm.shtml" platform="highweb"/></link> ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, "तेलुगू लोगों के सम्मान और गरिमा को बनाए रखने के लिए हम सभी मिलकर नई पार्टी की शुरुआत कर रहे हैं."
उन्होंने कहा कि जिस तरह से राज्य का विभाजन किया गया, उससे तेलुगू लोगों को काफी ठेस पहुंची है."
रेड्डी ने कहा, "इस दौरान प्रक्रियाओं की अनदेखी की गई... तेलुगू लोगों का अपमान किया गया. इसके चलते हम नई पार्टी बना रहे हैं ताकि तेलुगू लोगों के सम्मान और गरिमा को बनाए रखा जा सके."
भारी विरोध

इमेज स्रोत, AFP
नई पार्टी के गठन के साथ ही किरण कुमार रेड्डी का मुकाबला सीमांध्र में टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस के साथ होगा. सभी ओपिनियन पोल में सीमांध्र क्षेत्र में वाईएसआर कांग्रेस को आगे बताया जा रहा है.
माना जा रहा है कि बीते दिनों कांग्रेस से निकाले गए छह सांसद भी रेड्डी के साथ आ सकते हैं. इससे पहले किरण कुमार रेड्डी ने आगे की योजना पर विचार करने के लिए अपने साथियों के साथ बैठक की.
उन्होंने <link type="page"><caption> आंध्र प्रदेश के विभाजन</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/02/140221_telangana_highlights_rns.shtml" platform="highweb"/></link> के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दाखिल की, जिस पर सुनवाई के लिए शीर्ष अदालत राज़ी हो गई है.
इस याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई होगी. इससे पहले सात फरवरी और 17 फरवरी को इस बारे में दायर दो याचिकाओं को अदालत ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि जब तक विधेयक को संसद की मंजूरी नहीं मिल जाती है, तब तक इस पर सुनवाई 'समय से पूर्व' होगी.
लोकसभा में भारी विरोध और शोर-शराबे के बीच तेलंगाना विधेयक पारित हुआ था. बाद में इस विधेयक को राज्यसभा ने भी अपनी मंजूरी दे दी. हालांकि अभी तक तेलंगाना को अलग राज्य का दर्जा नहीं मिला है.
<bold>(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए <link type="page"><caption> यहां क्लिक करें</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link>. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)</bold>












