नीतीश राज में फ़रियादियों के लिए 'जहांगीरी घंटी'

- Author, मनीष शांडिल्य
- पदनाम, दरभंगा से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
बिहार के हरीशवारा गांव के वीर राय और उनके परिवार के दूसरे लोग पिछले कुछ समय से काफ़ी ख़ौफ़ज़दा हैं. जिस शख़्स पर उन्होंने मार-पीट करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई थी वो उन्हें कथित रूप से धमकियां दे रहा था.
थाने की कार्रवाई से निराश होकर वीर राय मधुबनी के पुलिस अधीक्षक से मिले, लेकिन उनकी मुश्किलें दूर नहीं हुईं.
लेकिन अब उन्हें ‘जहांगीरी घंटी’ बजाने के बाद यह भरोसा मिला है कि उनकी शिकायत पर दस दिनों के अंदर उचित कार्रवाई की जाएगी.
जहांगीरी घंटा
जिस ‘जहांगीरी घंटी’ ने वीर राय में न्याय की उम्मीद जगाई है, उसकी पहल दरभंगा ज़ोन के पुलिस महानिरीक्षक यानी आईजी अरविंद पांडेय ने की है.
<link type="page"><caption> गणतंत्र दिवस</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2014/01/140126_mumbai_republic_day_pix_sdp.shtml" platform="highweb"/></link> के मौक़े पर अपने आवास में यह 'घंटा' लगाकर उन्होंने इसकी शुरुआत की.
यह 'घंटी' वास्तव में एक आम कॉल बेल ही है, जिसके ऊपर ‘जहांगीरी घंटी’ लिखा है और साथ ही घंटी की एक बड़ी सी तस्वीर चिपकाई गई है.
इस घंटी को बजाकर कोई भी व्यक्ति किसी भी व़क्त अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है.
जहांगीर का असर
घंटी का नाम ‘जहांगीरी घंटी’ रखने की वजह आईजी अरविंद पांडेय यह बताते हैं कि वो <link type="page"><caption> मुग़ल बादशाह</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/09/130919_humayun_tomb_conservation_ra.shtml" platform="highweb"/></link> जहांगीर से प्रभावित रहे हैं, जिन्होंने जनता की शिकायतें सुनने के लिए अपने महल के बाहर एक बड़ा सा लोहे का घंटा लगाया था.
अरविंद पांडेय ने दरभंगा ज़ोन के दस ज़िलों के सभी पुलिस अधिकारियों को यह निर्देश दिया गया है कि वो चौबीस घंटे आम जनता की शिकायत सुनने के लिए अपने सरकारी आवास पर ऐसी एक घंटी लगाएं.
उन्होंने बताया कि शिकायत दर्ज करने के लिए पुलिस अधीक्षक और दूसरे अधिकारियों के कार्यालयों में प्रतिनिधि अधिकारी भी नियुक्त किए जाएंगे. यह घंटा इंस्पेक्टर से लेकर आईजी स्तर तक के सभी अधिकारियों के आवास पर लगाया जाएगा.
शिकायत हुई दर्ज
कैसे काम करती है यह घंटी? इस बारे में वीर राय ने बताया कि 28 जनवरी की दोपहर आईजी आवास पर घंटी बजाने से पहले वो थोड़ा डर रहे थे, लेकिन फिर आस-पास मौजूद लोगों ने हौसला बढ़ाया और उन्होंने घंटी का स्विच दबा दिया.
घंटी बजाने के कुछ देर बाद एक सिपाही उन्हें अंदर ले गया. वहां उनका आवेदन देखा गया और शिकायत सुनी गई. फिर उनकी शिकायत को रजिस्टर में दर्ज भी किया गया.
इसके बाद उन्हें आईजी से मिलाया गया. आईजी से उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी शिकायत को दस दिनों के अंदर दूर कर दिया जाएगा.
मोबाइल का ज़माना

इमेज स्रोत, PTI
<link type="page"><caption> मोबाइल और इंटरनेट</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/01/140126_khap_panchayat_girls_mobile_aj.shtml" platform="highweb"/></link> के ज़माने में घंटी लगाने का फ़ैसला क्यों किया गया? इसके जवाब में अरविंद पाण्डेय का तर्क है कि अधिकारियों के मोबाइल नंबर तो पहले से ही सार्वजिनक हैं.
लेकिन कई मामलों में लोग अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से मिल कर अपनी शिकायत दर्ज कराना चाहते हैं. ऐसे में मीलों दूर से आने वाले फ़रियादियों को अधिकारियों के आवास से निराश होकर न लौटना पड़े, इसे ध्यान में रखकर घंटी लगाई है.
इस घंटी का एक फ़ायदा वो यह भी बताते हैं कि इससे आम लोगों को अपनी शिकायत या परेशानी दर्ज कराने के लिए कार्यालय खुलने या अधिकारियों के ‘जनता दरबार’ का इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा.
अरविंद पांडेय बताते हैं कि पहले जब वो मुज़फ्फ़रपुर ज़ोन के डीआईजी थे, तब भी उन्होंने अपने आवास के बाहर यह व्यवस्था की थी.
ज़रूरी है कार्रवाई
समय के साथ सरकार और सरकारी तंत्र ने <link type="page"><caption> शिकायत</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2014/01/140109_arvind_kejriwal_grievance_procedure_vs.shtml" platform="highweb"/></link> सुनने के कई तरीक़े विकसित कर लिए गए हैं, लेकिन क्या ये लोगों की उम्मीदों को पूरा कर पा रहे हैं.
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता नारायण चौधरी बताते हैं, "बात शिकायत दर्ज होने की नहीं है. ज्यादा महत्त्वपूर्ण आज यह है कि कार्रवाई कितनी जल्दी और कितने कारगर तरीक़े से होती है."
वो ये आशंका भी ज़ाहिर करते हैं कि कहीं आईजी के बदलते ही यह घंटी बंद न हो जाए!
खैर नतीजा चाहें जो हो, लेकिन दरभंगा आईजी की यह पहल फ़िलहाल मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ है.
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