धरने पर बैठने को मजबूर हैं केजरीवाल- आशुतोष

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- Author, आशुतोष
- पदनाम, राष्ट्रीय प्रवक्ता, आम आदमी पार्टी, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
हमारा पैग़ाम बहुत स्पष्ट है, हम चाहते हैं कि दिल्ली में घर से बाहर निकलने वाली हर लड़की हर महिला सुरक्षित घर पहुंचे. दिल्ली को अपराध नगरी कहा जाने लगा है जो महिलाओं के लिए सबसे अधिक असुरक्षित है.
इसकी वजह ये है कि दिल्ली की पुलिस जबावदेह नहीं है. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इसी जबावदेही और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए धरने पर बैठे हैं.
STYहां, मैं मौक़ापरस्त हूं: आशुतोषहां, मैं मौक़ापरस्त हूं: आशुतोषवरिष्ठ पत्रकार आशुतोष आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए हैं. आशुतोष ने आम आदमी पार्टी में शामिल होते हुए कहा कि मैं तटस्थ नहीं रह सकता था, इसलिए आम आदमी पार्टी के साथ जुड़ा.2014-01-11T15:46:49+05:302014-01-11T16:32:43+05:30PUBLISHEDhitopcat2
केजरीवाल सरकार को दिल्ली पुलिस से सहयोग मिल रहा है या नहीं, ये एक अलग मसला है. अलग इसलिए है क्योंकि आप देखें कि पिछले दिनों ऐसी तीन-तीन घटनाएं हुई हैं. उस इलाक़े के लोग परेशान थे. उन्होंने अपने इलाक़े से आने वाले मंत्रियों से सम्पर्क करने की कोशिश की.
फिर मंत्री मौके पर पहुंचते हैं जहां पुलिस सहयोग करने और अपराधियों पर शिकंजा कसने के बजाए मंत्रियों को ही चुनौती देती है, उनकी बात नहीं सुनती.
जब किसी राज्य की पुलिस मंत्रियों की ही नहीं सुन रही है तो आम आदमी की बात क्या सुनेगी. इसीलिए ये सवाल अहम हो गया है.
PGLएक मुख्यमंत्री का धरनाएक मुख्यमंत्री का धरनादिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल रेल भवन के पास धरना दे रहे हैं. ये उन गिनी-चुनी घटनाओं में से एक है जब किसी सरकार का मुखिया अपने ही राज्य की पुलिस के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहा है. 2014-01-20T17:40:01+05:302014-01-20T21:16:50+05:30PUBLISHEDhitopcat2
आमूलचूल बदलाव की ज़रूरत
संबंधित पुलिस अधिकारियों को निलंबित करना इस पूरे मसले की पहली और बहुत छोटी प्रक्रिया है. लेकिन सिर्फ़ निलंबित किये जाने से बात नहीं बनने वाली, पूरे तंत्र में आमूलचूल बदलाव करने की ज़रूरत है.

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चुनी हुई सरकार के प्रति पुलिस को जबावदेह होना पड़ेगा और इसी तरह पुलिस को आम लोगों के प्रति संवेदनशील भी बनना होगा. ये सवाल बहुत बड़ा है जो सिर्फ़ आम आदमी पार्टी की ओर से ही नहीं उठाया जा रहा है.
पुलिस में आम लोगों की आस्था कम होने की वजह से यही आम लोग पिछले डेढ़-दो साल में कई बार सड़कों पर उतर चुके हैं.
आम आदमी की हालत ये है कि यदि उसे अपनी कोई शिकायत लिखानी है तो इससे पहले उसे थाने में शर्मसार होना पड़ता है, बिना शर्मिन्दगी झेले कोई आम इंसान पुलिस के पास जा ही नहीं सकता है.
बात सोमनाथ भारती की
रही बात सोमनाथ भारती पर लगाए गए आरोपों की, तो आप देखिए जिस इलाके की ये घटना है, वो सोमनाथ भारती का ही इलाका है जहां ड्रग्स और वेश्यावृत्ति का धंधा काफ़ी समय से चल रहा है.

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स्थानीय लोगों ने इस बारे में मंत्री को बाक़ायदा लिखित में शिकायत दी है. लोगों ने सोमनाथ भारती से सम्पर्क तब किया जब पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की.
सोमनाथ भारती ने वहां जाने से पहले स्थानीय पुलिस अधिकारियों से सम्पर्क किया था और इसके बाद ही वे वहां पहुंचे थे. मुझे लगता है कि इस पूरे मामले को जान-बूझकर तोड़ा-मरोड़ा जा रहा है.
सोमनाथ भारती का अपराध बस इतना है कि उन्होंने अपने इलाक़े के लोगों की समस्याओं को सुनने का काम किया और पुलिस को जबावदेह बनाने की मांग की है.
उन्हें सराहा जाना चाहिए लेकिन इसके ठीक विपरीत उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की मांग की जा रही है.
राजनीतिक संस्कृति
हमारे देश में नेताओं को एसी कमरों में रहने और एसी गाड़ियों में घूमने की आदत लग गई है और एक बार चुने जाने के बाद फिर वो पांच साल बाद ही नज़र आते हैं.

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मुझे लगता है कि भारत की इस राजनीतिक संस्कृति को बदलने की ज़रूरत है.
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस मामले में सबसे पहले लेफ्टिनेंट गर्वनर से बात करने की कोशिश की, फिर गृह मंत्री से बात करने का प्रयास किया और जब उन्होंने भी बात नहीं सुनी तब उन्हें बाध्य होकर धरने पर बैठना पड़ा.
जब नये तरीके की राजनीति होगी, जहां लोगों की भागीदारी होगी, उसे कुछ लोग पसंद करेंगे, कुछ लोग नापसंद करेंगे.
कुछ लोग इसे अपनी तरह से तोड़ने-मरोड़ने की कोशिश भी करेंगे, मुझे लगता है हमें इस बात को समझने की ज़रूरत है.
(बीबीसी संवाददाता ज़ुबैर अहमद से बातचीत पर आधारित)
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