चीन ने पूरी तरह बंद किए विवादित लेबर कैंप

लैबर कैंप
    • Author, जॉन सडवर्थ
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, शंघाई

चीन के सरकारी अख़बार 'बीजिंग न्यूज़' ने ख़बर दी है कि 'दोबारा शिक्षा के ज़रिए सुधार' कार्यक्रम के तहत चलाए जा रहे लैबर कैंपों से सभी क़ैदियों को रिहा कर दिया गया है.

इन कैंपों से साइन बोर्ड भी हटा लिए गए हैं. मैंने शंघाई के लैबर कैंपों का जायज़ा लेने की सोची. थोड़ी सी मेहनत से सभी कैंपों के पते इंटरनेट पर सर्च कर लिए.

पाँच दशकों से अधिक तक ये कैंप बिना न्यायिक प्रक्रिया के लोगों को हिरासत में रखने का केंद्र थे. राजनीतिक विद्रोही, छोटे-मोटे अपराधियों और प्रशासन की नज़र में रुकावट पैदा करने वालों लोगों को यहाँ भेजा दिया जाता था.

शंघाई में भी चीन की न्याय व्यवस्था के इस सबसे विवादित पहलू को इतिहास का हिस्सा बना दिया गया है. मैंने पाया कि ज़्यादातर लैबर कैंप बंद किए जा चुके हैं.

लैबर कैंप

जैसा कि तस्वीरों में दिख रहा है, भले ही साइनबोर्ड से अक्षर हट गए हों लेकिन उनके निशान बाक़ी हैं और ये इनकी पहचान बताते हैं.

अक्षर हटा दिए जाने के बाद भी कैंपों के नाम आसानी से समझे जा सकते हैं. ये कैंपों के भयावह इतिहास की याद दिलाते हैं.

लेकिन अब ये कैंप बंद हो चुके हैं और तमाम क़ैदी जा चुके हैं.

चीन के अन्य इलाक़ों में प्रशासन ऐसी ही एक व्यवस्था को वापस ले रहा है. 'हिरासत और शिक्षा' नाम की यह व्यवस्था वेश्याओं को हिरासत में रखने के लिए विशेष रूप से स्थापित की गई थी.

लैबर कैंप

इन्हें बंद करने का फ़ैसला नवंबर में लिया गया था और पिछले हफ़्ते इसे औपचारिक मंजूरी भी मिल गई है. अब ऐसा लग रहा है कि वेश्याओं को हिरासत में रखने के इन कैंपों में से अधिकतर बंद हो चुके हैं.

चीन की अदालतें कम्युनिस्ट पार्टी के सख़्त नियंत्रण में हैं. ऐसे में न्याय की आस भले ही आभासी हो लेकिन चीन की सरकार व्यवस्था के सबसे विवादित और कठोर हिस्से को बंद करने के अपने वादे को पूरा कर रही है.

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