सरकार बनते ही दिल्ली में नौ अधिकारी बदले गए

दिल्ली में सत्ता संभालने के पहले ही दिन आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार ने वित्त सचिव, ऊर्जा सचिव एवं दिल्ली जल बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) समेत उच्च पदों पर बैठे नौ वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला कर दिया.
शनिवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने अपने नए मंत्रिमंडल की पहली बैठक में ये फ़ैसला लिया.
हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि ईमानदार अधिकारियों को डरने की ज़रूरत नहीं है और उनके ख़िलाफ़ बदले की कोई कार्रवाई नहीं होगी.
समाचार एजेंसी भाषा के अनुसार शनिवार को लिए गए फ़ैसले के बाद दिल्ली जल बोर्ड की मौजूदा सीईओ देवश्री मुखर्जी को उनके पद से हटाकर उन्हें अब दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की मुख्य प्रबंध निदेशक (सीएमडी) बनाया गया है.
देवश्री की जगह वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी विजय कुमार को दिल्ली जल बोर्ड का नया सीईओ नियुक्त किया गया है.
तबादला
ऊर्जा सचिव आरके वर्मा, जो दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड के सीएमडी और प्रगति पॉवर कॉरपोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष भी हैं, को उच्च शिक्षा विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है. वर्मा प्रशिक्षण एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव के प्रभार में भी रहेंगे.
परिवहन सचिव पुनीत गोयल को ऊर्जा सचिव नियुक्त किया गया है. विकास विभाग में प्रधान सचिव-सह-आयुक्त अरविंद रे परिवहन विभाग के अतिरिक्त प्रभार में रहेंगे.
मुखर्जी और वर्मा का तबादला काफ़ी अहमियत रखता है क्योंकि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार सवेरे ही बयान दिया था कि उनकी सरकार जलापूर्ति पर सोमवार तक फ़ैसला करेगी और बिजली पर मंगलवार या बुधवार तक फ़ैसला करेगी.

आम आदमी पार्टी (आप) ने अपने चुनाव में हर परिवार को रोज़ाना 700 लीटर मुफ्त पानी और बिजली की मौजूदा दरों में 50 फ़ीसदी तक की कटौती करने का वादा किया था.
इस बीच, दिल्ली के वित्त सचिव एमएम कुट्टी, जो पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के प्रधान सचिव भी थे, को समाज कल्याण तथा महिला एवं बाल विकास विभाग का प्रधान सचिव बनाया गया है. गृह सचिव अर्चना अरोड़ा को वित्त विभाग का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है.
उच्च शिक्षा सचिव राजेंद्र कुमार को मुख्यमंत्री का प्रधान सचिव बनाया गया है.
शनिवार को ही कैबिनेट की पहली बैठक में ये भी फ़ैसला लिया गया कि कोई भी मंत्री, विधायक या दिल्ली सरकार का अधिकारी अपनी गाड़ियों में लाल बत्ती का इस्तेमाल नहीं करेगा.
इसके अलावा मंत्रिमंडल ने ये भी निर्णय लिया की कोई भी विधायक या मंत्री सुरक्षा के नाम पर एस्कॉर्ट गाड़ी नहीं लेगा और किसी भी विधायक या मंत्री को ख़तरे के आकलन के बाद ही सुरक्षा मुहैया कराई जाएगी.
शनिवार को लिए गए इस फ़ैसले के बाद दिल्ली सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने अपनी गाड़ियों से लाल बत्ती उतार दिए.
शनिवार को ही दिल्ली के पुलिस आयुक्त बीएस. बस्सी ने केजरीवाल से मुलाक़ात की.
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