मुज़फ़्फ़रनगर 'राहत शिविरों में 34 बच्चों की मौत'

उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर ज़िले में सितंबर में हुए सांप्रदायिक दंगों के बाद पलायन कर गए हजारों लोगों के लिए बने राहत शिविरों में अब तक कम से कम 34 बच्चों की मौत हो गई है.
एक अधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार मुज़फ़्फ़रनगर और शामली ज़िलों के पांच राहत शिविरों में अब भी 4783 लोग रह रहे हैं.
सितंबर में भड़के दंगों में 60 से अधिक लोग मारे गए थे. जबकि कई विश्लेषक इन दंगों को, पिछले एक दशक के दौरान देश में हुए सबसे भयानक दंगों में से एक बता रहे हैं.
इन ज़िलों में हुई हिंसा के दौरान हज़ारों लोग अपना घर छोड़कर जाने पर मजबूर हो गए थे.
सरकार की ओर से नियुक्त एक पैनल की रिपोर्ट के अनुसार राहत शिविरों में 12 वर्ष से कम आयु के कम से कम 34 बच्चे मारे गए. जबकि मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार इनमें से कई बच्चे कड़ाके की सर्दी की वजह से मारे गए हैं.
अलग-अलग कारण
उत्तर प्रदेश सरकार में वरिष्ठ अधिकारी एके गुप्ता ने पत्रकारों से कहा "इन सभी बच्चों के मारे जाने की कई वजहें हैं. इनमें से चार निमोनिया और बाकी उल्टी-दस्त की वजह से मारे गए हैं. जबकि एक बच्चे की मौत समय से पहले जन्म लेने के कारण हुई है."
उन्होंने कहा "जिन बच्चों की मौत हुई है उनमें से अधिकतर के माता-पिता उन्हें इलाज के लिए शिविरों से बाहर ले गए थे या फिर उन्हें सरकारी अस्पतालों के लिए भेजा गया था."
इन दंगों में अब तक कुल 65 लोग मारे जा चुके हैं और 85 घायल हो गए हैं. दंगों में पचास हजार से ज्यादा लोग बेघर हो गए हैं, जिनमें अधिकांश मुसलमान हैं.
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