आम आदमी पार्टी को जाल में नहीं फंसाया है: कांग्रेस

- Author, अशोक कुमार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
अपने जनमत संग्रह के दौरान आम आदमी पार्टी की तरफ़ से बयान आते रहे हैं कि जनता चाहती है कि दिल्ली में उनकी सरकार बने. लेकिन सरकार बनाने के लिए 'आप' को उसी कांग्रेस के समर्थन की ज़रूरत पड़ेगी जिसके विरोध पर उसे विधानसभा चुनावों में सफलता मिली है.
'आप' ने पहले ही कहा था कि वो इस मामले में अपना अंतिम फैसला सोमवार को देगी और उसका फैसला जनमत पर आधारित होगा.
लेकिन ये सवाल पूछे जाने लगे हैं कि क्या कांग्रेस 'आप' की सरकार को टिकने देगी?
इस सवाल पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के प्रभारी शकील अहमद कहते हैं, "हम लोग बाहर से आप को समर्थन देंगे. हम चाहते हैं कि दिल्ली में एक सरकार बने, जनता को चुनी हुई सरकार मिले. हमने उन्हें स्पष्ट कर दिया था कि हम बाहर से समर्थन देंगे. इसका मतलब यह हुआ कि हम सरकार में शामिल नहीं होंगे. हमारी यह पेशकश अब भी बरक़रार है."
सरकार बनने से पहले ही आप और कांग्रेस में तकरार शुरू हो चुकी है. आप के नेताओं के कांग्रेस पर तीखे हमले किए हैं और समर्थन लेने के लिए शर्तें भी रखी.
इस बारे में शकील ने कहा, "आप के नेता जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं वो अपरिपक्व राजनीति का उदाहरण है. उन्होंने जो 18 मुद्दे उठाए थे उनमें से 16 मुद्दे विशुद्ध रूप से प्रशासनिक थे जिनके लिए विधानसभा और संसद की मंजूरी की कोई जरूरत नहीं है. उनकी पार्टी अभी नई है और काम सीखने में वक़्त लगेगा."
कांग्रेस का जाल

आप ने कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के विरोध के नाम पर चुनाव लड़ा था और अब वह कांग्रेस के ही समर्थन से सत्ता में आ सकती है.
कुछ लोग मानते हैं कि आप कांग्रेस के जाल में फंस गई है.
इस पर शकील का कहना है, "हमने कोई जाल नहीं बिछाया है. आप ने दिल्ली की जनता ने कुछ वादे किए थे और दिल्ली के लोगों को उनमें एक उम्मीद दिखी थी. कांग्रेस चाहती है कि आप उन वादों को पूरा करे. अगर दोबारा चुनाव होता है तो आम आदमी पर इसका बोझ पड़ेगा."
"आम आदमी पर बोझ नहीं पड़े इसलिए कांग्रेस ने आप को बाहर से समर्थन देने का फ़ैसला किया है. हम उम्मीद करते हैं कि वो सरकार बनाएंगे और दिल्ली की जनता से किए गए वादों को पूरा करेंगे."
माना जा रहा है कि आप अगर सरकार बनाने के बाद जनता से किए गए वादे पूरे नहीं कर पाती है तो उस पर नाकामी का आरोप लग जाएगा.
जो लोग आप और कांग्रेस के साथ आने के खिलाफ हैं वो कहते हैं कि केजरीवाल को निपटाने का इससे बेहतर मौका कांग्रेस को नहीं मिल सकता है.

विकल्प
इस बारे में शकील ने कहा, "मतगणना के दूसरे दिन ही सबसे पहले मैंने पार्टी में यह सुझाव रखा था कि हमारे पास केवल दो विकल्प हैं. या तो हम आप का समर्थन करें या फिर दोबारा चुनाव हो."
उन्होंने कहा, "आप ने हमारे बाहर से समर्थन की पेशकश को सीधे ख़ारिज नहीं किया बल्कि 18 सवाल पूछे. उन्होंने उपराज्यपाल से भी दस दिन का समय मांगा. अब वो क्या फ़ैसला करते हैं ये उन पर निर्भर करता है."
सवाल यह है कि अगर यह सरकार बन जाती है तो कितने दिन टिकेगी?
शकील ने कहा, "अगर कोई दल जनता की भलाई चाहता है और उसके लिए काम करना चाहता है तो उसके लिए हमारी शुभकामनाएं हैं. अगर उन्होंने वरगलाने के लिए वादे किए हैं तो यह उनके लिए एक बड़ी चुनौती है कि वो अपने घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा करे."
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