सरकार गठन पर 'आप' ने मांगी जनता की राय

आम आदमी पार्टी ने कहा है कि दिल्ली में सरकार बनाने के लिए वो जनता की राय लेगी. इसके लिए पार्टी ने रविवार तक की समय सीमा तय की है.
आम आदमी पार्टी के विधायक दल के नेता अरविंद केजरीवाल ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा है, "हम पूरी दिल्ली की जनता को चिट्ठी लिख रहे हैं. इस चिट्ठी की 25 लाख प्रतियाँ बांटी जा रही हैं."
केजरीवाल ने कहा, "जनता आम आदमी पार्टी के फ़ेसबुक पेज और आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर भी अपना राय दे सकती है."
केजरीवाल ने कहा कि वो रविवार शाम तक जनता की राय लेंगे और उसके बाद जो जनता कहेगी, वो मान लेंगे.
दिल्ली विधानसभा चुनावों में किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला. भाजपा 31 सीटें, उसके सहयोगी अकाली दल को एक सीट, आम आदमी पार्टी को 28 सीटें और कांग्रेस को 8 सीटें मिली.
इसलिए सरकार के गठन को लेकर गतिरोध जारी है. लेकिन आप कांग्रेस का समर्थन लेने से हिचक रही है. उसका कहना है कि कांग्रेस की नीतियों के विरोध में ही आप पार्टी का गठन हुआ है.
कांग्रेस ने दिया जवाब

आम आदमी पार्टी के विधायक दल के नेता अरविंद केजरीवाल शनिवार को उप राज्यपाल नजीब जंग से मिले थे.
उप राज्यपाल से मुलाकात के बाद केजरीवाल ने कहा था कि उन्हें जनता की राय जानने के लिए कुछ समय चाहिए.
इसके बाद केजरीवाल ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और भारतीय जनता पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर 18 मुद्दे उठाए जिन पर सहमति के बाद ही उन्होंने समर्थन लेने की बात कही.
इन 18 मुद्दों में दिल्ली में वीआईपी कल्चर बंद करना, जनलोकपाल बिल पारित करना, दिल्ली में 'स्वराज' की स्थापना, दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा, महिलाओं को सुरक्षा के लिए विशेष बल बनाना और झुग्गी बस्तियों में रहने वालों को पक्के मकान देना जैसी बातें शामिल हैं.
कांग्रेस ने केजरीवाल के पत्र का जवाब दे दिया है लेकिन भाजपा की तरफ से उन्हें कोई जवाब नहीं मिला.
केजरीवाल ने पत्रकारों से कहा, "कांग्रेस ने कहा है कि 16 मुद्दे प्रशासनिक हैं बाकी दोनों मुद्दों पर उसका समर्थन है."
'बहुमत नहीं'

आम आदमी पार्टी से पहले दिल्ली के उप राज्यपाल ने 12 दिसंबर को भारतीय जनता पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार डॉ. हर्षवर्धन को सरकार बनाने के बारे में चर्चा करने के लिए बुलाया था.
उप राज्यपाल से चर्चा के बाद, हर्षवर्धन ने कहा था कि वो दिल्ली में सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है क्योंकि उन्हें स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है.
उप राज्यपाल से मिलने के बाद डॉक्टर हर्षवर्धन ने कहा, "दिल्ली विधानसभा में बहुमत के लिए 36 सीटों की आवश्यकता है और उनके पास अकाली दल को मिलाकर सिर्फ़ 32 सीटें ही हैं."
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