अन्ना हज़ारे का अनशन शुरू

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे जन लोकपाल के समर्थन में अपने गांव रालेगण सिद्धि में आज से अनिश्चतकालीन अनशन पर बैठ गए हैं.
रालेगण सिद्धि में मौजूद स्थानीय पत्रकार देवीदास देशपांडे के अनुसार अन्ना हज़ारे के अनशन मंच के आसपास करीब 5000 लोगों जमा हैं.
इनमें से ज़्यादातर गाँवों और कस्बों से आए हुए स्थानीय निवासी हैं. अनशन पर बैठने से पहले अन्ना हज़ारे ने गाँव के यादव बाबा मंदिर में जाकर प्रार्थना की.
इस बीच प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री वी नारायणसामी ने कहा कि उन्होंने लोकपाल बिल लाने के लिए राज्य सभा को नोटिस दिया है. उन्होंने कहा कि यह बिल राज्य सभी की प्रवर समिति के पास था जिसने अपनी सिफ़ारिशें दे दी हैं.
नारायणसामी ने कहा, "हमने समिति की कुछ सिफ़ारिशों को मान लिया है. सरकार लोकपाल बिल पर चर्चा कराने और इसे पारित कराने के लिए तैयार है. लेकिन इसके लिए सदन की कार्यवाही चलनी चाहिए."
आरोप
इससे पहले अन्ना हज़ारे ने सोमवार को संवाददाताओं से बातचीत में कांग्रेस पर 'धोखा' देने और जन लोकपाल के वादे से मुकरने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि हाल में हुए विधानसभा चुनावों में लोगों ने कांग्रेस को करारा जवाब दिया है.
उन्होंने कहा कि जब तक संसद में उनका जन लोकपाल अध्यादेश पारित नहीं हो जाता तब तक वो अनशन पर बैठे रहेंगे.
अन्ना ने कहा था, "मेरे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है. इसलिए मैं अनशन पर बैठ रहा हूं."
अन्ना ने सवाल उठाया कि जब प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जब दंगा विरोधी बिल संसद में पारित कराने का वादा कर सकते हैं तो वह जन लोकपाल बिल से समर्थन में ऐसा वादा क्यों नहीं कर सकते हैं.
दिल्ली में अपने अनशन को याद करते हुए उन्होंने कहा, "सोनिया गांधी ने एक पत्र लिखकर कहा था कि सरकार जन लोकपाल विधेयक लाने को तैयार है. उन्होंने मुझसे अनशन तोड़ने का अनुरोध किया था. मैंने उन पर भरोसा करके अपना अनशन समाप्त किया था."
धोखा

अन्ना ने कहा, "मुझे पता नहीं था कि यूपीए सरकार जनता और मेरे साथ धोखा करेगी. सरकार ने लिखित आश्वासन दिया था लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी इस पर कोई अमल नहीं हुआ."
उन्होंने कहा कि जन लोकपाल बिल एक ही दिन में लोक सभा में पारित हो गया था. इसके बाद उसे स्थाई समिति को भेजा गया और फिर यह राज्य सभा के पास पहुंचा.
अन्ना ने कहा, "सब जगह से पारित होकर जन लोकपाल विधेयक राज्य सभा पहुंचा और इस पर केवल बहस होना बाक़ी है. लेकिन एक साल से ज़्यादा समय से यह बिल राज्य सभा में लंबित है. इस सदन में कांग्रेस के 71 सदस्य हैं लेकिन बिल वहां अटका पड़ा है."
उन्होंने कहा कि उन्हें सरकार की तरफ से कई पत्र मिले थे जिनमें कहा गया था कि 2012 के शीतकालीन सत्र में यह बिल संसद में लाया जाएगा. सरकार ने फिर से 2013 के बजट सत्र में और फिर मॉनसून सत्र में लाने का वादा किया.
अन्ना ने कहा, "मॉनसून सत्र भी चला गया. अब हमारे पास अनशन पर बैठने के अलावा कोई विकल्प नहीं है."
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