अन्ना ने ख़ारिज किए लोकपाल के संशोधन

अन्ना हजारे
इमेज कैप्शन, लोकपाल कानून के नए मसौदे को अन्ना ने खारिज कर दिया है.

भ्रष्टाचार रोकने के लिए लोकपाल गठन के मुद्दे पर सरकार को मजबूर करने वाले अन्ना हज़ारे ने केंद्रीय मंत्रिमंडल की ओर से मंज़ूर किए गए लोकपाल विधेयक के नए मसौदे को ख़ारिज कर दिया है.

उन्होंने इस मसौदे को 'झूठा' बताते हुए कहा कि सरकार एक 'कमज़ोर' क़ानून पारित करवाना चाहती है.

अन्ना ने कहा,"भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए सख्त लोकपाल लाने के मसले पर अब प्रधानमंत्री और सोनिया गांधी पर और भरोसा नहीं किया जा सकता है. अगर इस मुद्दे पर वे ईमानदार होते तो इस सिलसिले में ठोस फैसला लेने में सरकार दो साल नहीं लगते".

अन्ना हजारे ने कहा कि उन्होंने इस संदर्भ में सोनिया गांधी को चिठ्ठी लिखकर स्पष्टीकरण मांगा है कि क्या प्रस्तावित कानून में सीबीआई और सीवीसी को सरकारी नियंत्रण से बाहर रखा गया है नहीं.

भाजपा को भी एतराज

राज्य सभा में विपक्ष के नेता अरुण जेतली ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि सीबीआई की कमजोरी ही यूपीए की ताकत है और उसका अस्तित्व इसी पर कायम है.

उन्होंने कहा कि संसदीय समिति ने जो सिफारिशें की हैं उनसे सीबीआई को सरकारी अंकुश से थोड़ी आजादी मिलेगी.

उन्होंने कहा कि हमारी लड़ाई इस बात पर ज्यादा है कि किस तरह से सीबीआई को सरकारी प्रभाव से मुक्त कराया जाए.

जेतली ने कहा, "संसद में मतदान के दौरान हमेशा ही मैंने पाया है कि वोटिंग से पहले सीबीआई अपने हलफनामों में अपना रवैया बदलती है और समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी संसद में अपना रवैया बदलते हैं".