मुझे बिजली के झटके दिए गए थे: सोनी सोरी

छत्तीसगढ़ के बस्तर के एक प्राइमरी स्कूल में अध्यापिका, सोनी सोरी को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम ज़मानत मिल गई है. सोनी सोरी को पांच अक्तूबर 2011 को क्राइम ब्रांच और छत्तीसगढ़ पुलिस के संयुक्त अभियान में दिल्ली से गिरफ़्तार किया गया था.
उनका मामला तब चर्चा में आया था जब अक्तूबर 2011 में कोलकाता के एक अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी रिपोर्ट में कहा कि सोनी के शरीर में कुछ बाहरी चीज़ें पाई गईं.
अंतरिम ज़मानत मिलने के बाद सोनी सोरी ने बीबीसी संवाददाता विनीत खरे से बातचीत में कहा कि उन्हें राहत मिलने से आदिवासियों में भी उम्मीद जगी है.
आपने पुलिस पर किन अत्याचार के आरोप लगाए हैं?
मैंने पहले भी कहा है कि मुझे निर्वस्त्र किया गया. करंट छोड़ा गया. ये सच है मेरे साथ ऐसा हुआ था.

मैं एक आदिवासी हूं, मैंने सोचा था कि अपने लोगों को पढ़ा-लिखा कर आगे बढ़ाऊंगी. आज मेरे पास कई केस डाल दिए गए, कुछ में मैं बरी भी हो गई, इस केस में भी मुझे पूरी उम्मीद है कि मैं बरी हो जाऊंगी.
इससे सिर्फ़ मेरी ही बर्बादी नहीं हुई, जिन बच्चों को मैं अपने आश्रम में पढ़ा रही थी उनका भी भविष्य अंधकार में है. कुछ बच्चे भाग गए हैं. जितना इलाके का विकास होना था वो नहीं हो पाया.
छत्तीसगढ़ में आदिवासियों की हालत पर काफी कुछ लिखा गया है, आप क्या सोचती हैं?
मुझे लगता है कि आदिवासियों को अच्छी शिक्षा मिलनी चाहिए. अगर अच्छी शिक्षा मिलेगी तो जो हो रहा है वो ख़त्म हो जाएगा. ताकि इन्हें अच्छे-बुरे की समझ आ सके. जब मैंने ग़लती ही नहीं की तो क्यों अत्याचार सहूं. इसके खिलाफ मैं लड़ी, बहुत दिक्कत हुई.
सब की मदद से मैंने लड़ाई को यहां तक पहुंचाया. सुप्रीम कोर्ट ने जो मुझे राहत दी है वो मेरे लिए ही नहीं है बल्कि आदिवासियों में भी विश्वास जगा है कि आज हमारे लिए और भी दरवाज़े हैं.
आप पर आरोप लगे कि आप माओवादियों की समर्थक हैं, क्या कहेंगी आप?
मैं कहती हूं कि ऐसा था तो मुझे गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया, वारंट बनाकर क्यों रखे गए. अगर मैं नक्सलियों की समर्थक होती तो अपने पिता को क्यों नहीं बचा पाई. आज मेरे तीनों भाई बिखरकर रह गए.
आपको पुलिस ने क्यों गिरफ़्तार किया?
मैं भी जानना चाहती हूं कि मुझे गिरफ़्तार क्यों किया गया.
याचिका में कहा गया था कि आपके शरीर में से पत्थर मिले, इसमें कितनी सच्चाई है?
वो मैं अभी नहीं बताऊंगी. ये बात मैं तब बताऊंगी जब मैं दिल्ली जाऊंगी. अभी मेरी मानसिक स्थिति ऐसी हो गई है. मुझसे पूछेंगे तो मुझे रोना आएगा.
अभी परिवार के बीच थोड़ा बोल पा रही हूं. अभी मेरे परिवार वालों ने मुझे घेर रखा है. अभी परिवार के सामने इस घटना को बताऊंगी तो परिवार को बहुत तकलीफ़ होगी.
ये नहीं पता कि परिवार के लोग कितना जानते हैं. गांव में रहते हैं. उन्हें तो ये देखकर डर लग रहा है कि इतनी पुलिस क्यों आई है.
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