सोनी सोरी को मिली अंतरिम ज़मानत

सोनी सोरी
इमेज कैप्शन, सोनी सोरी पर माओवादियों के साथ संबंध होने के आरोप हैं.

माओवादियों से कथित सांठगांठ के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोनी सोरी को अंतरिम ज़मानत दे दी है. सोनी सोरी पर एस्सार समूह से 'सुरक्षा के बदले पैसे वसूलने' के आरोप हैं. हालांकि एस्सार समूह माओवादियों को किसी तरह की रक़म देने से इनकार करता है.

सोनी सोरी के साथ उनके भतीजे लिंगाराम कोड़ोपी को भी ज़मानत मिल गई है.

सोनी सोरी के वकील कॉलिन गोंज़ालविस के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने ज़मानत अवधि के दौरान सोनी सोरी और उनके भतीजे लिंगाराम कोड़ोपी को छत्तीसगढ़ में प्रवेश नहीं करने के निर्देश भी दिए हैं.

<link type="page"><caption> सोनी सोरी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/02/120229_soni_sori_hungerstrike_ar.shtml" platform="highweb"/></link> की ज़मानत पर टिप्पणी करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार ने कहा कि यह एक सुखद स्थिति है. उन्होंने कहा- “हम जानते हैं कि उन्हें फ़र्ज़ी तरीक़े से गिरफ़्तार किया गया और मुक़दमे दर्ज किए गए. वह सभी मामले में निर्दोष साबित होंगी.”

मामला

रायपुर में स्थानीय पत्रकार आलोक पुतुल के मुताबिक़ छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर के एक प्राइमरी स्कूल में अध्यापिका, सोनी सोरी को पांच अक्तूबर 2011 को क्राइम ब्रांच और छत्तीसगढ़ पुलिस के संयुक्त अभियान में दिल्ली से गिरफ़्तार किया गया था.

सोनी सोरी के ख़िलाफ़ राज्य सरकार ने नक्सल गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया था और उनके ख़िलाफ़ आठ अलग-अलग मुक़दमे दर्ज किए गए थे.

इनमें से पांच मामलों में सोनी सोरी को पहले ही निर्दोष क़रार दे दिया गया है. इसके अलावा एक मामला बंद हो चुका है और एक मामले में उन्हें पहले ही ज़मानत मिल चुकी है.

सोनी सोरी का <link type="page"><caption> मामला</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2011/12/111203_sonisori_torture_da.shtml" platform="highweb"/></link> तब चर्चा में आया, जब अक्तूबर 2011 में कोलकाता के एक अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने सर्वोच्च अदालत को एक रिपोर्ट सौंपी, जिसमें सोरी के शरीर में कुछ बाहरी चीज़ें पाई गईं. लेकिन यह टीम यह नहीं तय कर पाई कि ये चीज़ें कैसे उनके जननांगों में डाली गईं.

एमनेस्टी इंटरनेशनल की भारत इकाई ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह को एक खत लिखकर सोनी सूरी के उन आरोपों की जांच की मांग की थी जिनमें उन्होंने हिरासत के दौरान यौन शोषण और हिंसा का आरोप लगाया था.

एमनेस्टी के अनुसार आठ और नौ अक्टूबर, 2011 को पुलिस हिरासत में सोनी सूरी को पीटा गया, उनसे यौन हिंसा की गई और बिजली के झटके दिए गए.

सोनी सोरी के मामले में सुप्रीम कोर्ट की इजाज़त के बाद मुलाक़ात करने और उनके मामले को उच्चतम अदालत तक पहुंचाने वाली छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की अधिवक्ता सुधा भारद्वाज ने कहा- “जिस तरह के <link type="page"><caption> अत्याचार</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/01/120127_sonisori_police_da.shtml" platform="highweb"/></link> सोनी सोरी पर हुए हैं, उसमें ज़मानत के अलावा बड़ा मुद्दा दोषी अफ़सरों पर कार्रवाई का भी है.”

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