पटना विस्फोट: संदिग्ध हमलावर का शव लेने से इनकार क्यों

पटना धमाके के संदिग्ध हमलावर तारिक का गाँव
    • Author, नीरज सिन्हा
    • पदनाम, राँची के सीठियो गाँव से लौटकर

मन व्यथित है. चेहरे पर गम साफ झलक रहे हैं. पूरा परिवार आहत है.

गमों से समझौता करने की मुश्किल और इन सब के बीच एक कठोर फैसला लेने की कशमकश.

पटना में नरेंद्र मोदी की रैली के दौरान हुए बम धमाके में घायल हो गए मामले के सदिंग्ध तारिक उर्फ ऐनुल की मौत के बाद उनके परिवार वालों ने फिलहाल शव लेने से मना किया है.

<link type="page"><caption> घावों पर मरहम या सियासी दांव?</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/11/131101_modi_back_in_patna_rd.shtml" platform="highweb"/></link>

ये फैसला तारिक के बड़े भाई तौहीद अंसारी ने लिया है और उनके अब्बा अताउल्लाह अंसारी भी इस पर कायम हैं.

तौहीद अंसारी के मुताबिक उनके परिवार ने पुलिस को भी ये जानकारी दे दी है.

तारिक की इलाज के दौरान मौत हो गई थी. वे रांची के सीठियो गांव के रहने वाले थे.

इनकार क्यों?

पटना धमाके के संदिग्ध हमालवर तारिक के बड़े भाई तौहीद अंसारी
इमेज कैप्शन, तौहीद अंसारी ने तारिक के शव को लेने से इनकार कर दिया है.

इस सवाल पर तौहीद अंसारी कहते हैं, "अगर वाकई तारिक इस घटना में शामिल थे तो यह परिवार और देश के साथ धोखा है. पूरा परिवार इस घटना से आहत हैं. बच्चे अनसुलझे सवाल करते हैं. हमारे पास इसके जवाब नहीं होते."

"इसलिए यह फैसला लिया गया है कि तारिक की लाश नहीं लेंगे. आगे पुलिस प्रशासन जैसा अच्छा समझे कदम उठाए."

<link type="page"><caption> यकीन नहीं होता...</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/10/131030_imtiyaj_connection_patna_blast_vs.shtml" platform="highweb"/></link>

इस बीच झारखंड पुलिस के प्रवक्ता एडीजी एसएन प्रधान ने कहा है कि तारिक के शव को उनके परिवार को सौंपने के लिए पुलिस बात करेगी. वैसे इस मामले में आगे की कार्रवाई पटना पुलिस को करनी है. पटना पुलिस की सूचना पर ही उनके घर वालों को पत्र सौंपा गया है.

चारों संदिग्ध सीठियो गांव के हैं. इसी मामले में बम धमाके के ऐन मौके पर सीठियो गांव के ही इम्तियाज पहले ही हिरासत में लिए गए हैं. इसके बाद रांची के मणिटोला से एक अन्य सदिंग्ध उरैज को एनआईए गिरफ्तार कर दिल्ली ले गई है.

उत्तरी छोटानागपुर के उरैज पर आरोप है कि वे इम्तियाज को आर्थिक मदद पहुंचाते थे. पुलिस का कहना है कि दो अन्य संदिग्ध नुमान और तौफीक पटना से फरार होने में सफल रहे हैं. ये दोनें भी सीठियों गांव के रहने वाले हैं.

18 साल की उम्र

पटना रैली के दौरान हुए धमाकों के बीच एक संदिग्ध बम की तस्वीर

तौहीद कहते हैं कि उनकी (तारिक की) उम्र ही क्या थी. दो साल पहले ही मैट्रिक की परीक्षा पास की थी.

पिता अताउल्लाह अंसारी हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन के रिटायर कर्मचारी है. उनके पांच बेटे हैं. तारिक सबसे छोटे थे. तौहीद दूसरे नंबर पर हैं.

<link type="page"><caption> संदिग्ध हमलावर की मौत</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/11/131101_patna_blast_einul_ap.shtml" platform="highweb"/></link>

तौहीद बताते हैं कि तारिक वॉल पेंटिंग का काम करते थे. कभी घर वालों को इसका अहसास नहीं था कि वे किसी संदिग्ध गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं.

जाने से पहले कुछ नहीं बताया था? इस सवाल पर तौहीद बताते हैं कि घर से जाने से पहले उन्होंने कुछ भी नहीं बताया था. घटना के बाद मीडिया में आई खबरों से पता चला कि तारिक बम विस्फोट में घायल हुए हैं.

अब वे शव लेने से मना कर रहे हैं, आगे पुलिस क्या करेगी, इस पर उन्होंने कहा कि यह फैसला पटना पुलिस को लेना है. लेकिन उससे पहले भी उनके परिवार से अंतिम बार पूछताछ कर सहमति ली जाएगी.

'जख्मों को न कुरेदें'

पटना धमाके में घायल हुए लोग
इमेज कैप्शन, पटना बम धमाके में छह लोग मारे गए और कई लोग घायल हो गए.

धुर्वा थाना के प्रभारी बीएन सिंह के मुताबिक तारिक की मौत की खबर उनके परिवार को दे गई है. तारिक के पिता, दो भाई, गांव के मुखिया का हस्ताक्षर भी लिए गए हैं.

तौहीद के घर वालों का ये भी कहना है कि रांची पुलिस मौत की बाबत सूचना पर हस्ताक्षर कराने आई थी. पटना की पुलिस ने भी फोन पर बात की थी.

<link type="page"><caption> एनआईए का स्पष्टीकरण</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2013/10/131031_patna_blast_accused_ap.shtml" platform="highweb"/></link>

लेकिन पुलिस को घायल या उनके शव की तस्वीर भी देनी चाहिए थी. पहले हम देखते-जानते, कि वाकई वे कौन हैं?

आपलोग पटना जाकर शव की शिनाख्त तो कर सकते हैं? यह पूछने पर तौहीद कहते हैं, "जख्मों को ज्यादा मत कुरेदें. फैसला पूरे परिवार का है."

इस घटना ने पूरे परिवार को झकझोर दिया है. उन्होंने अपनी तस्वीर देने से भी मना किया. कहा जो दाग लगे हैं, उसमें उनकी तस्वीर सामने आने से नहीं मिट सकते.

'दहशतगर्दी मंजूर नहीं'

सीठियो गाँव के बुजुर्ग

सीठियो गांव की जिंदगी धीरे-धीरे समान्य हो रही है. गांव के बच्चे गलियों में खेलते- कूदते नजर आए. बच्चे स्कूल- कॉलेज भी आने-जाने लगे हैं. बड़े-बुर्जुगों का मन अब भी मथता है.

गली, चौपाल,नुक्कड़ों पर सीठियो गांव पर लगे कथित आरोपों की चर्चा होती हैं. शुक्रवार को गांव के लोगों की इकट्ठे बैठक भी हुई थी.

इसमें फैसले लिए गए कि गांव पर आगे इस तरह की कोई आंच नहीं आए.

अंसारी महापंचायत के रांची जिला अध्यक्ष मोहम्मद ओवेश आजाद कहते हैं, "दहशतगर्दी हमें मंजूर नहीं. इस्लाम भी इसकी इजाजत नहीं देता. पूरा गाँव इस घटना से दुखी है."

महबूब आलम के मुताबिक पहले पुलिस की गाड़ियाँ इस गांव में कभी-कभार ही आती थीं. छह दिनों से यह आलम है कि सीठियो गांव हतप्रभ है.

गांव के बुजुर्ग सवासत अंसारी के मुताबिक अस्सी की दहलीज पर हैं. वे कहते हैं, "यकीन नहीं होता कि 17-18 साल के लड़के ऐसे कथित तौर पर गंभीर मामले में शामिल हो गए हैं. परिस्थितियां ऐसी है कि हकीकत की पड़ताल करने की जरूरत है."

<bold><italic>(बीबीसी हिन्दी के <link type="page"><caption> एंड्रॉएड ऐप</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2013/03/130311_bbc_hindi_android_app_pn.shtml" platform="highweb"/></link> के लिए आप <link type="page"><caption> यहां क्लिक</caption><url href="https://play.google.com/store/apps/details?id=uk.co.bbc.hindi" platform="highweb"/></link> कर सकते हैं. आप हमें <link type="page"><caption> फ़ेसबुक</caption><url href="https://www.facebook.com/bbchindi" platform="highweb"/></link> और <link type="page"><caption> ट्विटर</caption><url href="https://twitter.com/BBCHindi" platform="highweb"/></link> पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)</italic></bold>